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‘सॉफ्ट पावर’ बनने के लिए क्या किया, बताएगा विदेश मंत्रालय

भारत सरकार इन दिनों ‘सॉफ्ट पावर’ बनने की दिशा में काम कर रही है। ‘सॉफ्ट पावर’ बनने से मतलब है, कल्चरली भारत का महाशक्ति

मुकेश कौशिक | Last Modified - Jan 02, 2018, 06:44 AM IST

‘सॉफ्ट पावर’ बनने के लिए क्या किया, बताएगा विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली.भारत सरकार इन दिनों ‘सॉफ्ट पावर’ बनने की दिशा में काम कर रही है। ‘सॉफ्ट पावर’ बनने से मतलब है, कल्चरली भारत का महाशक्ति बनना। विदेश मंत्रालय इसका खाका तैयार कर रहा है। इसके तहत उसका जोर इस पर भी है कि इसे स्मार्ट तरीके से कैसे आगे बढ़ाया जाए। इसे उन्होंने ‘स्मार्ट पावर’ कहा है। अब संसद से जुड़ी स्थायी समिति 3 जनवरी को पड़ताल करेगी कि विदेश मंत्रालय ने इसके लिए जमीनी मोर्चे पर क्या कदम उठाए हैं। सुषमा स्वराज की अगुवाई वाला मंत्रालय उन्हें इसका जवाब देगा।


इस संबंध में संसदीय समिति ने विदेश मंत्रालय को अपनी सिफारिशें भी सौंपी थीं। उन सिफारिशों के अमल के बारे में भी विदेश मंत्रालय से जवाब-तलब किया जाएगा। भारत को चीन से चुनौती मिल रही है। विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि चीन का बजट इस मामले में भारत से कहीं ज्यादा है। भारत की ओर से इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिसर्च भारत की ओर से दुनियाभर में सांस्कृतिक अभियान चलाती है। मगर यह वित्तीय तंगी से जूझ रही है। मंत्रालय ने संसदीय समिति को सूचित किया है कि चीन ने कल्चरल डिप्लोमेसी के लिए 20 अरब डॉलर का बजट रखा है। इसके मुकाबले भारतीय संस्था का कुल बजट मात्र 215 करोड़ रुपये है। अधिकारी बताते हैं कि चीन बौद्ध धर्म को अपना बताने से लेकर कंफ्यूशियस तक के ज्ञान के सहारे दुनिया में खुद को सॉफ्ट पावर के रूप में स्थापित करने के अभियान में जुटा है। चीन ने विश्वभर में करीब 250 कंफ्यूशियस इंस्टीट्यूट कायम कर दिए हैं।

सांस्कृतिक ताकत की जंग :‘बुद्ध कूटनीति’ से लेकर बॉलीवुड और भेलपूरी तक का सहारा

1 पीएम मोदी बौद्ध सर्किट देशों की यात्रा कर रहे हैं। इनमें श्रीलंका, कंबोडिया, दक्षिण कोरिया, जापान जैसे देश हैं।

2 योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने के बाद भारतीय पर्व नवरोज को विश्व की अमूर्त धरोहर का दर्जा मिला।

3 कुंभ मेले को यूनीसेफ ने धरती के सबसे शांतिपूर्ण मेले के तौर पर मानवता की अमूर्त धरोहर घोषित किया।

फिल्म और सीरियल भी मददगार
- विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि सॉफ्ट पावर बनने में बॉलीवुड-भेलपुरी भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। फिल्मों-सीरियलों के गैर कमर्शियल राइट्स को लेकर भारतीय मिशन धाक जमा रहा है।

-सॉफ्ट पावर बनने के ये औजार सिर्फ हमारे पास | विविध संस्कृति, राजनीतिक मूल्य, आध्यात्मिक ज्ञान, खान-पान, बेहतरीन व्यंजन, कला और संगीत, नृत्य, अहिंसा का अस्त्र, धार्मिक बहुलता दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

गांधी ‘दर्शन’ भी अहम
विदेश सचिव एस जयशंकर ने कमेटी को सूचित किया कि प्रवासी भारतीयों के बीच महात्मा गांधी के दर्शन को ले जाने के लिए प्रवासी भारतीय केंद्र अहम भूमिका निभा सकते हैं। पीएम ने दक्षिण अफ्रीका की यात्रा में पीटरमार्टिज़बर्ग का दौरा किया था। यह वह स्टेशन है जहां महात्मा गांधी को ट्रेन से फेंका गया था। यह भी भारत की सॉफ्ट डिप्लोमेसी का हिस्सा था।

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Web Title: soft paavr banne ke liye kyaa kiyaa, btaaegaaa videsh mntraaly
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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