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नौ साल में गायब हो गईं 169 बेशकीमती पांडुलिपियां, सरकार नहीं जानती क्या करे

पीएमओ से मंत्रालय तक घूमी शिकायती चिट्‌ठी, फिर वापस शिकायतकर्ता तक पहुंची, नतीजा जीरो

विजयालक्ष्मी | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:13 AM IST

नौ साल में गायब हो गईं 169 बेशकीमती पांडुलिपियां, सरकार नहीं जानती क्या करे

नई दिल्ली. देश के इतिहास को संजोने वाली 169 बेशकीमती पांडुलिपियां नौ साल के भीतर गायब हो गईं। सरकार से इस बारे में शिकायत की तो चिट्‌ठी तीन माह के दौरान एक टेबल से दूसरी टेबल तक घूमती रही। मगर कोई यह नहीं बता पाया कि कार्रवाई क्या की जाएगी। अंत में चिट्‌ठी को वापस शिकायतकर्ता के पास भेज दिया गया। यह मामला राजस्थान के ओरियंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट की आठ ब्रांच से गायब हुईं पांडुलिपियों का है।


- यहां शोध अधिकारी रहे डॉ. रामकिशन पोहिया ने अपनी शिकायत में सरकार को बताया कि वर्ष 1999 से 2008 के बीच 169 पांडुलिपियां गायब हुई हैं। उन्होंने पिछले साल 6 सितंबर को पीएमओ को इस संबंध में चिट्‌ठी लिखी। इसमें उन्होंने कहा कि देशभक्त होने के नाते वे यह खत लिख रहे हैं।

- उन्होंने बताया कि कुछ पांडुलिपियों की अवैध तरीके से फोटोकॉपी भी कराई गई। आरटीआई से जानकारी ली गई तो पता चला कि यह पत्र 3 अक्टूबर को पीएमओ पहुंचा। यहां से इसे 28 नवंबर को संस्कृति मंत्रालय भेजा गया। संस्कृति मंत्रालय ने इस चिट्‌ठी को साहित्य कला अकादमी भेज दिया। अकादमी को समझ नहीं आया तो उन्होंने इसे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) को सौंप दिया। आईजीएनसीए ने 12 दिसंबर को फिर इसे राष्ट्रीय पांडुलिपी मिशन भेज दिया। अंत में 12 जनवरी को ये निष्कर्ष निकला कि इस पर मंत्रालय कोई कार्रवाई नहीं कर सकता।

- राष्ट्रीय पांडुलिपी मिशन ने इस बारे में बताया कि मिशन केवल पांडुलिपियों के सूचीकरण, संरक्षण, प्रकाशन और डिजिटाइजेशन के कार्य तक सीमित है। भारतीय पांडुलिपी के लिए अभी तक ऐसा कोई अधिनियम और नीति नहीं बनाई गई है, जिससे इस बारे में राष्ट्रीय पांडुलिपी मिशन (एनएमएम) द्वारा कोई कार्रवाई की जा सके।

1999 में डेढ़ लाख पांडुलिपियों की जांच के बाद हुआ था खुलासा

डॉ. रामकिशन पोहिया ने पीएमओ को अपने शिकायती पत्र में बताया कि राजस्थान ओरियंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट के जोधपुर ऑफिस में 1999 से 2008 के बीच डेढ़ लाख पांडुलिपियों की जांच की गई। इसमें इनके गुम होने की बात का खुलासा हुआ था। राजस्थान में इंस्टीट्यूट की आठ ब्रांच हैं। इनकी छह ब्रांचों में पांडुलिपि गुम होने की घटनाएं हुई। पांडुलिपि प्राचीन समय के हस्तलिखित दस्तावेज होते हैं।

जोधपुर: शाहजहां प्रकाश, नृपतिविलास, कल्पसूत्र सहित 90 बेशकीमती पांडुलिपी गायब।
कोटा: साल 2000 में यहां के ऑफिस से 60 पांडुलिपियां गायब मिली।
चितौड़गढ़: वर्ष 2006-07 में वेरीफिकेशन के दौरान तीन महत्वपूर्ण पांडुलिपी गायब मिलीं।
भरतपुर: साल 2002 में भरतपुर ऑफिस से एक रंगीन पांडुलिपी गुम।
जयपुर: 2007-08 में तीन पांडुलिपियां गायब हुईं।
अलवर: यहां से भी पांडुलिपियां गायब मिलीं। साथ ही दत्तात्रेय तंत्र और नामार्जुन तंत्र पांडुलिपियों की फोटोकॉपी कराई गई।

क्या है गायब हुई पांडुलिपियों का महत्व

शाहजहां प्रकाश: करीब 400 साल पुरानी इस पांडुलिपी में शाहजहां के शासनकाल के बारे महत्वपूर्ण जानकारियां थीं। इस तरह की पांडुलिपियों की विदेशों में काफी मांग रहती है।
नृपतिविलास: किसी राजा की आर्थिक परिस्थिति को सुधारने और राजनीति के संबंध में जानकारी इस पांडुलिपी में लिखी हुई थी।

कल्पसूत्र: 12वीं सदी में बनाई गई कुछ रंगीन तस्वीरें हैं जिससे उस समय के शासनकाल के बारे में पता चलता है।

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Web Title: Nao saal mein gaaayb ho gayin 169 beshkimati paandulipiyaan, srkar nahi jaanti kyaa kare
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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