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कंट्रोवर्सी | फाइनेंशियल कमिश्नर ने 12 दिन में पलटा सरकार का फैसला, खुला अस्पताल

शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस वापस होते ही बुधवार को राजनीति गरमा गई।

bHASKAR NEWS | Last Modified - Dec 21, 2017, 07:06 AM IST

कंट्रोवर्सी | फाइनेंशियल कमिश्नर ने 12 दिन में पलटा सरकार का फैसला, खुला अस्पताल

नई दिल्ली.शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस वापस होते ही बुधवार को राजनीति गरमा गई। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने आप सरकार पर िनशाना साधते हुए कहा कि मनीष सिसोदिया के वित्त आयुक्त ने पर्दे के पीछे डील करके ये फैसला लिया है।

‘आप’ ने इसके जवाब में कहा कि एलजी भाजपा सरकार का है। हॉस्पिटल से डील करने के मामले में एलजी वित्त सचिव को तुरंत जेल भेजें। वहीं, इस मामले में एलजी कार्यालय खुद को पाक-साफ बताने में जुटा रहा।


दिल्ली सरकार ने 8 दिसंबर को जीवित शिशु को मृत बताए जाने पर शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर दिया था। वित्त आयुक्त ने इस फैसले को 12 दिन में ही पलटकर लाइसेंस बहाल कर दिया। अपीलेट अथॉरिटी के इस आदेश पर जहां दिल्ली सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया जताई। वहीं, एलजी ऑफिस ने कहा-उन्हें अधिकार है।

नागेंद्र शर्मा बोले-पहली ही सुनवाई में कैसे हुआ फैसला
दिल्ली सरकार के प्रवक्ता नागेंद्र शर्मा ने ट्वीट किया, आखिर किस अाधार पर पहली ही सुनवाई में मैक्स का लाइसेंस बहाल कर दिया गया। बुलेट ट्रेन की तर्ज पर पैसा कमाने वाले निजी अस्पताल के पक्ष में यह फैसला लिया गया। क्या अथॉरिटी को जनता की समस्याएं नहीं दिखतीं? आप प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने मनोज तिवारी को जवाब दिया है कि भाजपा सरकार का एलजी है। तत्काल वित्त आयुक्त का ट्रांसफर करो और हॉस्पिटल से डील करने के मामले में जेल भेजो।

एलजी ऑफिस : हम इसमें कहीं भी शामिल नहीं हैं
एलजी ऑफिस ने कहा कि अस्पताल प्रशासन ने वित्त आयुक्त के समक्ष अपील की थी। अर्ध न्यायिक कार्य होने के कारण वित्त आयुक्त द्वारा लिए गए फैसले में किसी का हस्तक्षेप नहीं होता है। एलजी कार्यालय ने यह भी जानकारी दी है कि वित्त आयुक्त के आदेशों को लेकर पीड़ित व्यक्ति अथवा संस्था दिल्ली हाईकोर्ट में अपील कर सकती है। कुछ लोग स्वार्थ के चलते गलत अफवाह फैला रहे हैं, जबकि एलजी कार्यालय इस मामले में किसी भी स्तर पर शामिल नहीं है।

दिल्ली के वित्त अायुक्त का पद वैधानिक पर उपराज्यपाल की शक्तियाें का इस्तेमाल करके सुनवाई करते हैं

दिल्ली के वित्त आयुक्त का पद वैधानिक है। यह एक कोर्ट की तरह काम करता है। यह आबकारी आयुक्त, मंडलायुक्त, दिल्ली के स्वास्थ्य महानिदेशक, खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त, पर्यावरण सचिव समेत 23 अधिनियम और नियम में जारी किए गए आदेशों के खिलाफ अपीलीय प्राधिकारी के रूप में सुनवाई कर सकता है। इसमें भूमि सुधार, को-ऑपरेटिव सोसायटी, दिल्ली नर्सिंग होम रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1953, मैकेनिकल एंड टॉयलेट प्रिवेंशन एक्ट, मनोरंज एक्ट शामिल हैं। मूल रूप से दिल्ली के वित्त आयुक्त उन शक्तियों का इस्तेमाल करते हैं जो पहले दिल्ली के उपराज्यपाल के पास थीं।

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Web Title: kntrovrsi : faainenshiyl kmishnr ne 12 din mein pltaa srkar ka faislaa, khulaa aspatal
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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