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मेघालय के दाउकी में भी अटारी जैसी बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी, भारत- बांग्लादेश के जवान लेंगे हिस्सा

अटारी-वाघा बॉर्डर की तर्ज पर भारत और बांग्लादेश के बीच यहां भी प्रतिदिन बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का आयोजन होगा।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 08:00 AM IST
बाघा बॉर्डर पर होने वाली बीटिं बाघा बॉर्डर पर होने वाली बीटिं

दाउकी(मेघालय). शिलांग से 83 किलोमीटर दूर स्थित दाउकी में बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स, बीएसएफ की चौकी के ठीक सामने 22 एकड़ में बन रहा है इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट (आईसीपी)। 2019 के बीच तक यहां एक नई शुरुआत होने जा रही है। अटारी-वाघा बॉर्डर की तर्ज पर भारत और बांग्लादेश के बीच यहां भी रोजाना बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी आर्गनाइज की जाएगी। सेरेमनी में बीएसएफ और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (बीजीबी) के जवान हिस्सा लेंगे। अभी यह सेरेमनी होती है, लेकिन सिर्फ बीएसएफ के द्वारा की जाती है।

खुला बॉर्डर एरिया है, इसलिए चौकसी ज्यादा

- शिलांग से 83 किलोमीटर दूर पहाड़ी जंगलों के खूबसूरत घुमावदार मोड़ के बाद आता है दाउकी। सुपारी और तेज पत्ता के घने-ऊंचे पेड़ों के बीच से यह रास्ता गुजरता है। मेघालय राज्य का छोटा-सा इलाका दाउकी, भारत और बांग्लादेश के बीच कारोबार और लोगों की आवाजाही का एक अहम केंद्र है।

- आईसीपी के पूरी तरह से बन जाने के बाद बांग्लादेश की बीजीबी इसमें हिस्सा लेना शुरू करेगी। भारत-बांग्लोदश के बीच चलने वाली बस दाउकी चेक पोस्ट से सोमवार और शुक्रवार को गुजरती है। यह रास्ता बांग्लादेश के सिलहट होते हुए ढाका तक जाता है। जीरो लैंड खत्म होते ही बांग्लादेश की चौकी तांबिल आती है।

- बीएसएफ की 30वीं बटालियन के ड्यूटी पर तैनात कंपनी कमांडर ने बताया कि यहां अभी बाड़ नहीं लगी है। खुला बॉर्डर एरिया है, इसलिए चौकसी ज्यादा रहती है। चेकपोस्ट पर चार-चार जवान हमेशा तैनात रहते हैं। चेकपोस्ट पर हमेशा शांति रहती है। यहां से करीब 70 से 80 लोग रोजाना बांग्लादेश से भारत और भारत से बांग्लादेश आते-जाते हैं।

बांग्लादेश जाने लगती है सामानों से भरे ट्रकों की लाइन

- चेकपोस्ट से एक किलोमीटर पहले ही कोयला, पत्थर, चूना और अन्य सामानों से भरे ट्रकों की लाइन बांग्लादेश जाने के लिए खड़ी रहती हैं। भारत से कोयला, पत्थर, चूना आदि का सामान जाता है। जबकि, बांग्लादेश से प्लास्टिक, बिस्किट आदि का सामान आता है।

- उन्होंने कहा कि फ्लैग सेरेमनी होने के बाद टूरिस्ट्स और ज्यादा संख्या में यहां आएंगे। अभी ज्यादातर लोग पश्चिम बंगाल, नार्थ ईस्ट से आते हैं।

इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट बन जाने के बाद टूरिस्ट्स को ज्यादा सुविधाएं मिलने लगेंगी

इंट्रीग्रेटेड चेकपोस्ट बनाने वाली कंपनी राइट्स के कंट्रोलिंग साइट इंजीनियर आशीष श्रीवास्तव कहते हैं कि मेघालय के वेस्टर्न जयंतिया हिल्स डिस्ट्रिक्ट का यह इलाका टूरिस्ट के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

चेकपोस्ट से बमुश्किल दो किलोमीटर दूर ही साफ पानी वाली उम्नगोत नदी बहती है, जिसे देखने टूरिस्ट्स आते हैं। इंटीग्रेटेड चेकपोस्ट बन जाने के बाद बॉर्डर देखने आने वाले टूरिस्ट्स को ज्यादा सुविधाएं मिलने लगेंगी।

यहां कार्गो बिल्डिंग, बैंक-एटीएम, पेसेंजर टर्मिनल, पासपोर्ट और वीजा जांच की सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

जनवरी 2017 में हुआ था शिलान्यास

- वहीं इलेक्ट्रिकल इंजीनियर अनुपम भट्‌टाचार्य ने बताया कि जनवरी 2017 में गृह राज्यमंत्री किरण रिजूजी ने आईसीपी का शिलान्यास किया था। 2019 के मध्य तक काम पूरा हो पाएगा। शुरुआत में ड्राॅइंग बनाने के बाद, पेड़ हटाए गए और फिर जमीन की लेवलिंग का कार्य किया गया। माइनिंग की मंजूरी ली और काम शुरू हो सका।

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