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जनरल साहब! हैल्थकेयर से दूर हैं लाखों सैनिक, कुछ कीजिए

इलाज के लिए सैन्य अस्पताल ही सहारा, मगर गैर मिलिट्री स्टेशनों से ये कोसों दूर, फौजियों को हेल्थ कवर भी नहीं

मुकेश कौशिक | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:39 AM IST

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    जनरल बिपिन रावत के व्हाट्सएप बॉक्स में पहली बार ऐसी शिकायत।

    नई दिल्ली. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के व्हाट्सएप बॉक्स में एक ऐसी याचिका आई है जो गैर मिलिट्री स्टेशनों पर तैनात फौजियों और उनके परिवारों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं के बारे में चौंकाने वाला खुलासा करती है। सैनिकों के दुखदर्द जानने के लिए जनरल रावत ने यह व्हाट्सएप बॉक्स पिछले साल जनवरी में शुरू किया था। अभी तक इस पर कोई ठोस शिकायत नहीं दर्ज नहीं हुई थी।
    हाल ही में एक कर्नल ने आर्मी चीफ से उन सैनिकों और उनके परिवार को हैल्थकेयर सुविधाएं दिलाने की फरियाद की है जो मिलिट्री स्टेशनों में नहीं रहते। आर्मी अस्पताल भी उनके घरों से सौ से दो सौ किलोमीटर दूर हैं।

    कर्नल ने इस याचिका में कहा है कि मिलिट्री स्टेशनों में तैनात सैनिकों और अधिकारियों को तो पूरी चिकित्सा सुविधा आर्मी हॉस्पिटल्स में मिल जाती है। मगर दूरदराज में बसे उनके परिवारों के लिए रोजमर्रा की बीमारियों से लड़ने की खातिर कोई हेल्थ कवर नहीं है।

    मिसाल के तौर पर हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और कई दक्षिण व पूर्वोत्तर के राज्यों में सैन्य अस्पताल ना के बराबर हैं। दिलचस्प यह है कि हैल्थकेयर की सुविधा सेवा में तैनात सैनिकों और उनके परिवार के सदस्यों के लिए तो नहीं है लेकिन रिटायरमेंट के बाद उनको ईसीएचएस की सुविधा मिल जाती है। सेवारत सैनिकों के लिए सिर्फ मिलिट्री अस्पतालों में फ्री इलाज की सुविधा है लेकिन असैनिक अस्पतालों में उपचार के लिए कोई मेडिकल कवर उनके पास नहीं हैं।

    आर्मी ग्रुप इंश्योरेंस स्कीम के तहत सेवाकाल में सैनिक अंशदान देता रहता है और रिटायरमेंट के समय उसकी मैच्योरिटी हो जाती है। तीनों सेनाओं में करीब 15 लाख जवान और अधिकारी हैं जिनमें से आधे से अधिक सैन्यकर्मी गैर मिलिट्री स्टेशनों पर तैनात हैं। अधिकतर मिलिट्री स्टेशनों पर तैनात सैनिकों के परिवारजन साथ नहीं रहते और उनकी रिहाइश सैन्य अस्पतालों से कोसों दूर होती है।

    ईसीएचएस सुविधा यानी...

    एक्स सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हैल्थ स्कीम। इसके तहत करीब 52 लाख पूर्व सैनिकों और उनके परिवार वालों को लाभ मिलता है। इसमें रिटारमेंट के समय रैंक के हिसाब से 15 से 60 हजार रुपए तक का एक बार पैसा देना होता है। इसके बाद सैनिक और परिवार के सदस्य जीवनभर मुफ्त इलाज करा सकते हैं। इस स्कीम के तहत देशभर के 28 रीजनल सेंटरों में 426 पॉलिक्लिनिक हैं।

    सेवारत सैनिक ले लेते थे लाभ

    सेवा में तैनात जवान और उनके बीवी-बच्चे ओपीडी में इलाज करा लेते थे। कर्नल को हाल ही में पता चला कि इस सुविधा से सेवारत जवानों, अफसरों और उनके परिवारों को दूर कर दिया गया है। इस तरह का आदेश भी जारी किया गया।

    क्यों नहीं ले सकते लाभ

    सेना से पड़ताल में पता चला कि ईसीएचएस की सुविधा सेवारत सैनिकों के लिए थी ही नहीं। चूंकि इसमें सेवारत सैनिकों का अंशदान नहीं होता। इसलिए उन्हें और उनके परिवारों को इस सुविधा के लिए अनधिकृत कर दिया गया है।

    बिपिन रावत को सुझाया फॉर्मूला

    कर्नल की याचिका में इस समस्या का समाधान भी सुझाया गया है। इसके अनुसार यदि सर्विंग जवानों और अधिकारियों से भी कंट्रीब्यूशन ले लिया जाए तो नॉन मिलिट्री स्टेशन पर बसे सैनिक और उनके बाल-बच्चे देशभर में ईसीएचएस स्कीम की सुविधाओं के हकदार बन सकते हैं।

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    ईसीएचएस सुविधा भी रिटायरमेंट के बाद, सेवारत सैनिक इससे भी हुए दूर
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Web Title: Millions Of Indian Soldiers Away From Healthcare
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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