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पांच हजार से ज्यादा डीजल रेल इंजन अब नहीं होंगे 'कबाड़'

रेलवे इंजीनियरों ने पहली बार डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलने में सफलता हासिल की, मार्च के अंत तक होगा ट्रायल

शेखर घोष | Last Modified - Mar 05, 2018, 08:00 AM IST

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    नई दिल्ली. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेश के कारण कबाड़ बनने जा रहे 5345 डीजल इंजनों को अब भारतीय रेलवे बचा लेगा। इसके लिए उसने महज 69 दिन में एक नई तकनीक ईजाद की है। इस तकनीक के जरिए वह इन डीजल इंजनों को इलेक्ट्रिक इंजन में तब्दील कर सकेगा। भारतीय रेलवे की लखनऊ स्थित प्रोडक्शन यूनिट डीजल लोकोमोटिव वर्क्स (डीएलडब्ल्यू) के इंजीनियरों ने पहली बार इसमें सफलता हासिल कर ली है।

    - पहले चरण में पटियाला लोकोमेटिव शेड की ब्रॉडगेज एसी ट्रैक्शन (डब्ल्यूएजी7) श्रेणी के डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदला गया है। ये डीजल इंजन 80 के दशक के हैं। ये इंजन 5 हजार हॉर्स पावर की बिजली जनरेट कर सकेंगे। फिलहाल 'ऑन ट्रैक' इंजनों की क्षमता 2600 हॉर्स पावर की है।

    - इस इंजन का ट्रायल मार्च माह के अंत में बरेली-सहारनपुर रूट पर किया जाएगा। इसके लिए इसमें ट्रांसफार्मर, चेसिस, पीजी पैनल जैसे कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं। ट्रायल के दौरान शुरू में नए इलेक्ट्रिक इंजन की स्पीड 65 किलोमीटर प्रति घंटा रखी जाएगी। फिर प्रति स्लैब इस रफ्तार को 10 किलोमीटर प्रति घंटा तक बढ़ाया जाएगा।


    दोनों तरफ चल सकेगा नई पीढ़ी का ये इलेक्ट्रिक इंजन, दो डीजल इंजनों को जोड़कर हुआ है तैयार
    - लखनऊ डीजल लोकोमोटिव के चीफ डिजाइन इंजीनियर अनिल सिंह ने बताया कि दो डीजल इंजनों को आपस में जोड़कर एक '12 एक्सल वाला परमानेंट इलेक्ट्रिक इंजन' बनाया गया है। ऐसे इसकी क्षमता 10 हजार हॉर्स पावर की हो गई है। इससे मालगाड़ियों की ढोने की क्षमता बढ़ जाएगी।

    - उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक इंजनों में एक ही तरफ चलने की व्यवस्था होती है। नई पीढ़ी में दो इंजनों के जुड़ने से यह दोष भी खत्म हो गया है।

    महज 69 दिनों में एक कांसेप्ट बना हकीकत
    लखनऊ डीजल लोकोमोटिव की जीएम रश्मी गोयल के मुताबिक सबसे पहले आरडीएसओ, डीएलडब्ल्यू, सीएलडब्ल्यू और बीएचईएल के इंजीनियरों की एक टीम बनी। आरडीएसओ ने उपकरण का लेआउट, डीएलडब्ल्यू ने चेसिस में बदलाव केे लिए 22 दिसंबर को डायफ्रेम बनाया। बीएचईएल-आरडीएसओ के इंजीनियरों ने इलेक्ट्रिक ड्राइव पर काम किया। 29 दिसंबर कोे इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ। 28 फरवरी को यह इंजन तैयार था। इस तरह एक कांसेप्ट को हकीकत बनने में महज 69 दिन लगे।

    रेल इंजन की ताकत भी बढ़ी
    भारतीय रेलवे के इंजीनियरों ने दुनिया में पहली बार डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदलने में कामयाब रहे हंै। यही नहीं इंजन की ताकत भी 2600 से बढ़ाकर 5000 हॉर्स पावर करने में भी सफल रहे हैं।
    - वेदप्रकाश, अतिरिक्त निदेशक, सूचना व संपर्क, रेलवे बोर्ड


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Web Title: More Than Five Thousand Diesel Rail Engines Will No Longer Be Junk
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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