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देश का सबसे अशांत गांव, लोगों ने बनाए बंकर; बुलेट प्रूफ स्कूल

दो ग्राउंड रिपोर्ट बता रही हैं कैसे विपरीत हालात में भी खुशहाल हैं लोग

Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 05:39 AM IST
पाकिस्तानी सेना की फायरिंग से बचने के लिए  लोगों ने घरों में बनाए बंकर पाकिस्तानी सेना की फायरिंग से बचने के लिए लोगों ने घरों में बनाए बंकर

जम्मू-कश्मीर. यहां नौशेरा सेक्टर के झंगड़ क्षेत्र में सीमा पार से गोलीबारी आम बात है। हथगोला गिरने से गांव के प्राइमरी और मिडिल स्कूल बंद हो चुके हैं। सुरक्षा कारणों से उन्हें वापस नहीं खोला जा सकता है। बच्चों की पढ़ाई पंचायती भवन में मोबाइल स्कूल में जारी है। यहां पहली से 8वीं तक के बच्चे एकसाथ पढ़ रहे हैं। 5वीं तक के बच्चों को एक टीचर पढ़ाते हैं। बाकी क्लासेस की जिम्मेदारी तीन टीचर्स पर है। शिक्षक बताते हैं कि स्कूल में प्रार्थना की बजाय जीरो पीरियड होता है।


- वहीं, दूसरी ओर एक निजी स्कूल ने पाकिस्तानी फायरिंग से बचने के लिए बुलेट प्रूफ क्लास रूम बनाकर इस समस्या का भी हल निकाल लिया है। यहां जैसे ही घंटी बजती है सभी स्टूडेंट बुलेट प्रूफ क्लास रूम में चले जाते हैं। टीचर भी वहीं आ जाते हैं और पढ़ाई जारी रहती है। हर सप्ताह ऐसी घटना सामान्य है।

- प्रिंसिपल मनजीत सिंह का कहना है कि हमारे 10वीं तक के स्कूल में 100 स्टूडेंट्स पढ़ते हैं। हमने अपने सभी स्टूडेंट्स को गोलीबारी या बमबारी होने पर छिपने की ट्रेनिंग भी दी है।
- भास्कर टीम जब इस गांव पहुंची तो बच्चे माता-पिता के साथ स्कूल जा रहे थे। घर और दुकानों का काम सामान्य रूप से चल रहा था। लोगों ने बताया कि रातभर पाकिस्तान की ओर से गोलीबारी होती रही। जो तड़के 3:30 बजे बंद हुई। फिर भी मई के बाद घर छोड़कर नौशेरा के बेस कैंपों में बसे ज्यादातर ग्रामीण अब लौटने लगे हैं।

अगले माह शादी

- यहां रहने वाले चांद हीर की अगले माह शादी है। इतनी गोलीबारी और अशांति के बावजूद यह शादी गांव में ही होगी। तैयारियां शुरू हो गई हैं।

- 73 वर्षीय महिला कैलाश कहती हैं कि फायरिंग तो यहां रोज होती है। हमारे घर के बाहर गोलियों के निशान देख सकते हैं। हथगोले ने दरवाजा तोड़ दिया है, लेकिन घर छोड़कर नहीं जाएंगे।

- इस गांव के सरपंच संजय कुमार की पत्नी भी इन दिनों नौशेरा के राहत शिविर मेें हैं, क्योंकि उनके बच्चे छोटे हैं।

- गांव में किराना दुकान चलाने वाले अमित बताते हैं कि अब ज्यादातर लोगों ने बंकर बनाने शुरू कर दिए हैं ताकि बार-बार भागना ना पड़े। सरकार से ढाई लाख रुपए तक की मदद मिल रही है। हालांकि गरीब लोगों के लिए खुद के बंकर बनाना आसान नहीं है फिर भी वे मिल-जुलकर बना रहे हैं।

नौशेरा के स्कूल की दीवारों पर लगी गोलियों के निशान (लाल घेरे में) बताते हैं कि यहां बच्चों का स्कूल आना तक खतरों से खाली नहीं है। फिर भी वे नियमित आते हैं। नौशेरा के स्कूल की दीवारों पर लगी गोलियों के निशान (लाल घेरे में) बताते हैं कि यहां बच्चों का स्कूल आना तक खतरों से खाली नहीं है। फिर भी वे नियमित आते हैं।
यहां कई घरों में गोले गिरने से छतों में ऐसे छेद हो गए हैं। यहां कई घरों में गोले गिरने से छतों में ऐसे छेद हो गए हैं।
हर जगह दिखते हैं गोलीबारी के ऐसे निशान। हर जगह दिखते हैं गोलीबारी के ऐसे निशान।
छतों को ऐसे ढका गया है। छतों को ऐसे ढका गया है।
घर के आगे बनाई गई दिवार। घर के आगे बनाई गई दिवार।
घर के अंदर ऐसे बनाए गए हैं बंकर। घर के अंदर ऐसे बनाए गए हैं बंकर।
कई जगह ऐसे दिखते हैं गोलियों के निशान। कई जगह ऐसे दिखते हैं गोलियों के निशान।