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62 साल की सास ने अपनी बहू को डोनेट की किडनी, फिर ऐसे बच गई बहू की जान

मां का ब्लड ग्रुप मैच नहीं हुआ तो सास ने दी किडनी।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 08, 2018, 06:55 AM IST

  • 62 साल की सास ने अपनी बहू को डोनेट की किडनी, फिर ऐसे बच गई बहू की जान
    बहू देवकी के साथ सास शिव प्यारी।

    फरीदाबाद.रील और रियल लाइफ में अक्सर आपने सास-बहू के झगड़े के बारे में सुना व देखा होगा। कई बार लोग यह कहते हैं कि सास कभी मां नहीं हो सकती है। लेकिन यह मामला इसके विपरीत है। एक सास और बहू की ऐसी कहानी शायद ही पहले कभी अपने सुनी होगी। इसमें सास ने अपनी किडनी देकर बहू की जिंदगी बचाई है।

    जब मां के टिश्यू बेटी से मैच नहीं हुए तो बहू की जान बचाने के लिए ममता की मिसाल बनकर उसकी सास आगे आई। मामला फरीदाबाद का है। जहां सास शिव प्यारी ने अपनी बहू देवकी की जान बचाने के लिए अपनी किडनी डोनेट कर दी।

    20 फरवरी को हुआ किडनी ट्रांसप्लांट
    फरीदाबाद के सर्वोदय अस्पताल में 20 फरवरी को सफल किडनी ट्रांसप्लांट किया गया। वुमेंस डे के एक दिन पहले बहू को डिस्चार्ज कर दिया गया। यह मामला इसलिए खास है कि इस बार इंटरनेशनल वुमेंस डे और वर्ल्ड किडनी डे एक साथ है।

    62 साल की सास ने दी जिंदगी

    डॉ. राम काबरा के मुताबिक जब किसी से ग्रुप मैच नहीं हुआ तो हमने देवकी की मां को बुलाया। लेकिन चेकअप के बाद हमें पता चला कि उनकी किडनी नहीं ले सकते। हमें डोनर नहीं मिल रहा था। इसके बाद देवकी की सास शिव प्यारी आगे आईं। जांच के बाद उन्होंने पाया कि 62 साल की शिव प्यारी का ब्लड ग्रुप उनकी बहू देवकी से मैच कर रहा है। वह किडनी डोनेट करने के लिए पूरी तरह से हेल्दी हैं। इसके बाद सर्जरी की गई। अब सास-बहू दोनों स्वस्थ हैं।

    अस्पताल के निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा कि भले ही मेडिकली यह केस रेयर नहीं था, लेकिन सोशली बिल्कुल रेयर है। जिसमें एक सास अपनी बहू को किडनी देने के लिए आगे आई। मरीज की आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं है। इसलिए अस्पताल ने अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझते हुए और इस अनूठे प्यार को सलाम करते हुए मरीज को इलाज में आर्थिक रियायत भी दी है।

    बहू की दोनों किडनी हो गई थी फेल

    सर्वोदय अस्पताल के वरिष्ठ किडनी रोग विशेषज्ञ डॉ. राम काबरा ने बताया कि भिवानी की रहने वाली 30 साल की देवकी देवी की दोनों किडनी फेल हो गई थीं। वह एक साल से डायलिसिस पर निर्भर थी। जब वह हमारे अस्पताल में आईं तो उनकी हालत बहुत ज्यादा ही खराब थी। उनकी जान बचाने के लिए सिर्फ किडनी ट्रांसप्लांट ही एक रास्ता था। किडनी ट्रांसप्लांट कर ही देवकी की जिंदगी को बचाया जा सकता था। इसके बाद डोनर की तलाश की गई। देवकी के घर वालों के टेस्ट किए गए। लेकिन किसी से भी देवकी का ब्डल ग्रुप मैच नहीं कर रहा था। अन्य जगह से भी किड़नी की व्यवस्था के लिए संपर्क किया गया। लेकिन कहीं भी किड़नी डोनर नहीं मिला फिर देवकी की सास शिव प्यारी आगे आईं इनका ब्लड ग्रुप मैच कर रहा था।

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Web Title: Mother-In-Law Has Donated Kidney To His Daughter-In-Law
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