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369 साल में पहली बार... मुल्तानी मिट्टी से लौट रही ताज की चमक

दुनिया के सात अजूबे में शामिल आगरा के ताजमहल की खूबसूरती में और निखार रहा है।

Danik Bhaskar | Dec 08, 2017, 06:29 AM IST
पॉल्यूशन के चलते ताज महल धीरे-धीरे अपनी सफेदी खोने लगा था। पॉल्यूशन के चलते ताज महल धीरे-धीरे अपनी सफेदी खोने लगा था।

आगरा. दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा के ताजमहल की खूबसूरती में और निखार रहा है। 1648 में बनी 240 फीट ऊंची और 17 एकड़ में फैली इस मुगलकालीन इमारत को पहली बार ‘मड-पैक थेरेपी’ (मुल्तानी मिट्‌टी) के जरिए पॉलिश किया जा रहा है। 2015 में शुरू हुआ यह काम करीब 75% पूरा हो चुका है। इसके नवंबर 2018 तक पूरा होने की उम्मीद है।

मीनार-गुंबद पर पड़ी पीली परत

-आईआईटी कानपुर और अमेरिकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स के मुताबिक, संगमरमर पर डीजल और जले हुए कचरे के धुएं से जमा इन परतों के कारण ताज महल धीरे-धीरे अपनी सफेदी खोने लगा था।
- वहीं, इंडस्ट्रियल जोन में होने के कारण यहां हमेशा पॉल्यूशन रहता है। इससे ताज की मीनारों और गुंबद पर पीले धुएं की परतें जम गई थीं।

चिकनाई और कार्बन को सोख लेती है मुल्तानी मिट्टी
मड-पैक थेरेपी: इमारत पर मुल्तानी मिट्टी की पतली परत बिछाई जाती है। बाद में इस परत पर प्लास्टिक शीट्स चढ़ा दी जाती है।

- ये परत संगमरमर पर जमी ग्रीस और कार्बन को सोख लेती है। जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाती है तो इसे डिस्टिल्ड वॉटर से साफ किया जाता है। पुरानी इमारतों को साफ करने का यह अब तक का सबसे सुरक्षित तरीका है।

इंडस्ट्रियल जोन में होने के कारण ताज महल के आसपास हमेशा पॉल्यूशन रहता है। इससे ताज की मीनारों और गुंबद पर पीले धुएं की परतें जम गई थीं। इंडस्ट्रियल जोन में होने के कारण ताज महल के आसपास हमेशा पॉल्यूशन रहता है। इससे ताज की मीनारों और गुंबद पर पीले धुएं की परतें जम गई थीं।