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40 हजार किमी का सफर आधा पूरा कर चुकीं नेवी की 6 अफसर, बोलीं-पहली बार देखी सदर्न लाइट्स

आईएनएस तारिणी पर दुनिया नापने निकलीं नेवी की ले.कमांडर वर्तिका का समुद्र के बीच से पहला इंटरव्यू।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 05:28 AM IST
आईएनएस तारिणी से पूरी दुनिया नापने निकली इंडियन नेवी की 6 महिला अफसर। आईएनएस तारिणी से पूरी दुनिया नापने निकली इंडियन नेवी की 6 महिला अफसर।

नई दिल्ली. बीच समंदर लहरों की चुनौती। कभी व्हेल के झुंड ने सहमा दिया तो कभी डॉल्फिन की अठखेलियाों ने रुकने को मजबूर किया। राेमांच की ये कहानी आईएनएस तारिणी से पूरी दुनिया नापने निकली भारतीय नौसेना की 6 जांबाज महिला अफसरों की है। उनका सफर सितंबर में शुरू हुआ था। इस वक्त बोट फॉकलैंड आईलैंड की ओर बढ़ रही है। इस मिशन में लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, लेफ्टिनेंट कमांडर पी स्वाति, लेफ्टिनेंट पायल गुप्ता, लेफ्टिनेंट एश्वर्य बोडापटी और लेफ्टिनेंट शोर्ग्राकपम विजया देवी शामिल हैं। लहरों पर सवार कमांडर वर्तिका जोशी से भास्कर ने वॉट्सएप के जरिए बात की।

165 दिन का है मिशन, मार्च-अप्रैल तक होगी वापसी
- कमांडर वर्तिका जोशी ने भास्कर को बताया कि समुद्र के रास्ते पूरी दुनिया की सैर करने का मिशन यानी 21600 नॉटिकल मील से ज्यादा की यात्रा। वह भी 55 फीट की एक नाव में। 165 दिन का मिशन 50% पूरा हो चुका है। अभी फॉकलैंड आईलैंड की ओर बढ़ रहे हैं। मार्च-अप्रैल तक मिशन खत्म होगा।

- मिशन पर सारा काम शारीरिक रूप से काफी कठिन होता है। इसलिए फिजिकल ट्रेनिंग बहुत काम आती है। एक ही कम्पार्टमेंट में महीनों गुजारने के लिए काफी मानसिक तैयारी भी चाहिए होती है। बोट पर लगे सैटेलाइट कम्युनिकेशन के जरिए ही हम ईमेल, वॉट्सएप करते हैं और घर पर बात कर पाते हैं।

मौसम बिगड़ने पर ऐसे हो हैं हालात

- कमांडर वर्तिका ने बताया कि मौसम बिगड़ता है तो रेडी टू ईट खाने से काम चलाना पड़ता है। वरना हम बारी-बारी से मनपसंद खाना बनाते हैं। बोट पर एक हजार लीटर पानी स्टोर करने की क्षमता है। रिवर्स ओसमोसिस प्लांट भी है। इससे एक घंटे में 30 लीटर पानी पीने लायक बन जाता है। पूरे दिन में तीन वॉच सिस्टम बनाए हैं।

- 4 दिसंबर को नेवी डे के दिन हम न्यूजीलैंड के पास थे। केक काटकर झंडा फहराया। तभी सैटेलाइट सिस्टम पर सूचना मिली कि रक्षामंत्री सीतारमण बात करेंगी। वीडियो कॉल पर उन्होंने हमारे हौसले की दाद दी। एक और दिलचस्प वाकया हुआ।

सदर्न लाइट्स देखा

- तारिणी जब तस्मानिया के दक्षिण में पहुंची तो अद्भुत नजारा दिखा। अब तक सदर्न लाइट्स के बारे में सुना ही था लेकिन उसका दीदार हो जाएगा, ये उम्मीद नहीं थी। क्षितिज पर कॉस्मिक वंडर खेलने लगा।

- गुलाबी और हरे रंगों से आकाश रंगीन कैनवास में तब्दील हो गया। उस कैनवास तले लहरों की लोरी सुनने का अलग ही मजा होता है। यकीनन अब तक के सफर में कुदरत हम पर मेहरबान सी लगती है।

40 हजार किमी का सफर आधा पूरा कर चुकीं नेवी की 6 अफसर। 40 हजार किमी का सफर आधा पूरा कर चुकीं नेवी की 6 अफसर।