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इजरायल की हाड़-मांस वाली ‘कंप्यूटर काउ’ भारत में देगी दूध

इसी महीने उनका ड्रीम प्रोजेक्ट ‘कंप्यूटर काउ’ भी यहां साकार होने जा रहा है।

मुकेश कौशिक | Last Modified - Jan 16, 2018, 07:01 AM IST

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    नई दिल्ली.यह इत्तेफाक है कि जब इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत यात्रा पर हैं, तो इसी महीने उनका ड्रीम प्रोजेक्ट ‘कम्प्यूटर काउ’ भी यहां साकार होने जा रहा है। हालांकि, यह कम्प्यूटर काउ मशीनी नहीं, बल्कि आम गाय है। फर्क सिर्फ इतना है कि इसे पूरी तरह कम्प्यूटर प्रोग्राम्स के जरिए पाला जाता है। यानी गाय के खान-पान, वेदर कंडीशन आदि को सॉफ्टवेयर के जरिए तय किया जाता है। गर्भ में बछड़े के मूवमेंट्स पर भी कम्प्यूटर से लगातार निगाह रखी जाती है। आंकड़े बताते हैं कि ये गायें दुनिया में सबसे ज्यादा दूध देती हैं।

    इजरायल दौरे पर मोदी ने दिखाया था इंटरेस्ट

    - प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पिछले साल इजरायल की ऐतिहासिक यात्रा पर गए थे तो नेतन्याहू ने उन्हें खास तौर पर इन गायों के बारे में बताया था। तब मोदी ने इसमें बेहद रुचि दिखाई थी।

    - यही वजह है कि इसी माह हरियाणा के हिसार में सेंटर फॉर एक्सीलेंस में ‘कम्प्यूटर काउ’ मिल्क प्रोडक्शन शुरू करेगी।

    - इस सेंटर के लिए 2015 में इजरायली इंटरनेशनल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन एजेंसी मैशाव और हरियाणा सरकार ने हाथ मिलाया।

    - इस समझौते के तहत हिसार लाइव स्टॉक फार्म के स्टेट कैटल ब्रीडिंग प्रोजेक्ट को सेंटर फॉर एक्सीलेंस में बदला गया।

    मिल्क प्रोडक्शन (डेली एवरेज)

    भारतीय गाय - 7:1

    ब्रिटिश गाय - 25.6

    अमेरिकी गाय - 32.8

    इजरायली गाय - 38.7

    (आंकड़े : किलोग्राम में)

    मिल्क सॉलिड्स प्रोडक्शन (हर साल)

    - इजरायली गाय : 1100 केजी

    - न्यूजीलैंड की गाय : 373 केजी

    - भारतीय गाय : 220 केजी

    (जब दूध से पानी पूरी तरह सुखा दिया जाता है तो पाउडर रूप में बचे उत्पाद को मिल्क सॉलिड कहते हैं।)

    खजूर पर भी होगा काम
    - दोनों प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए भुज के कुकामा गांव में खजूर को बेहतर बनाने के लिए स्थापित गए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का भी इनॉगरेशन करेंगे।

    - इस सेंटर में रॉ फ्रूट से ही खूजर के प्रिजर्वेशन पर काम होगा। खजूर लंबे समय तक टिके रहें, इस पर भी काम होगा।

    ‘कम्प्यूटर काउ’ यहीं पैदा की गई, तरीका ये अपनाया

    - हिसार के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ‘होल्सटीन जर्मप्लाज्म’ नस्ल को फ्रोजन सीमेन के रूप में इजरायल से लाया गया।
    - इसके बाद गायों का एक चुनिंदा समूह चुना गया, ताकि भविष्य के लिए भारत में यह खास नस्ल मिलती रहे।
    - गायों से जर्मप्लाज्म नस्ल विकसित करने के लिए सेंटर में सौ से अधिक शेल्टरों की मिनी लैब बनाई गई।

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