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​होली गैजेट- इस साल बाजार में ये नई पिचकारियां

इस पिचकारी के हालिया शिकार जस्टिन ट्रूडो हुए हैं। सोचिए कि होली का दिन है और लोग आपको इस कदर इग्नोर कर रहे हैं कि कोई आ

Bhaskar News | Last Modified - Mar 02, 2018, 08:11 AM IST

  • ​होली गैजेट- इस साल बाजार में ये नई पिचकारियां

    इग्नोरमार पिचकारी : इस पिचकारी के हालिया शिकार जस्टिन ट्रूडो हुए हैं। सोचिए कि होली का दिन है और लोग आपको इस कदर इग्नोर कर रहे हैं कि कोई आप पर रंग तक नहीं डाल रहा है। आप लोगों के आगे कूद जाते हैं, कुर्ते पहनकर नाचे जाते हैं, उन्हें हैप्पी होली कहते हैं, लेकिन सामने वाला इस लायक भी नहीं समझता कि आपके कुर्ते को भिगोने के लिए भी रंग मार दे। इग्नोरमार पिचकारी का असर इतना व्यापक है कि आप खुद के पैसों से गुलाल खरीद ले जाओ, तब भी पैसे देने पर कोई इसे मुंह पर लगाने को तैयार न हो। जस्टिन ट्रूडो पर तो ये इग्नोरमार पिचकारी इस कदर इस्तेमाल की गई कि दिल्ली में गोलगप्पे खाने के बाद जब उन्होंने सूखी पापड़ी मांगी तो गोलगप्पे वाले ने भी ये मांग अनसुनी कर दी।

    पार्टीबाज़ पिचकारी : बड़ा आदमी जब सफल होते-होते थक जाता है तो पार्टी बना लेता है। साउथ में तो राजनीति अभिनेताओं की पेंशन स्कीम होती है। पहले रजनीकांत और अब कमल हासन इस क्षेत्र में आगे बढ़ लिए हैं। पार्टीबाज़ पिचकारी का इस्तेमाल करने वाला पिचकारी चलाने के पहले माहौल बनाता है। पहले वो समय लेता है, आम राय बनाता है कि पार्टी बनाऊं या ना बनाऊं। आप चाहते हैं वो पार्टी बना लें, पिचकारी चला दें, लेकिन वो भीड़ इकट्ठी कर रहा होता है। जैसा कि रजनीकांत ने किया। ये पिचकारी रखने वाला बाकी पिचकारियां भी देखता है, जैसा कमल हासन ने केजरीवाल के साथ मिलकर किया और अंत में वो पिचकारी चला भी देता है। इस पिचकारी के चलने में टाइमिंग का सबसे बड़ा रोल होता है, ऐसी पिचकारियां बहुत सोच-समझकर चुनाव के ठीक पहले चलाई जाती हैं।

    पकोड़ामार पिचकारी : जीवन में जब भी आप खुद को कुछ करने योग्य न पाएं तो पकोड़ा पिचकारी इस्तेमाल करें। सुबह की चाय भी अगर आप खुद के हाथों न बना सकें तो सोचिए ‘तो क्या फर्क पड़ता है। मैं पकोड़े तो बना सकता हूं।’ इंसान की फितरत होती है, वो जग जीतना चाहता है। दुनिया तो कोई नहीं जीत सका, आप मोबाइल पर कैंडी क्रश भी हार जाएं तो सोचिए ‘तो क्या होता है, मैं पकोड़े तो बना सकता हूं।’ ये आपको नई स्फूर्ति देगा। असफल इंसान बहाने बनाता है, पकोड़ा पिचकारी इस्तेमाल करने वाला पकोड़े बनाता है। इस पिचकारी को इस्तेमाल करने में न रंग की जरूरत होती न पानी की। क्योंकि जब आपके पास कोई संसाधन न हों तब भी आप पकोड़े बना सकते हैं।

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Web Title: New Political Pichkari In Market
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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