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निर्भया केस: फांसी के खिलाफ आरोपी मुकेश की पुनर्विचार याचिका पर फैसला सुरक्षित

चीफ जस्टिस बोले- आपकी दलील मान लें तो कोई ट्रायल चलेगा ही नहीं।

Danik Bhaskar | Dec 13, 2017, 06:59 AM IST

नई दिल्ली। निर्भया गैंगरेप और हत्याकांड के दोषी मुकेश की मौत की सजा पर रीकंसीडरेशन पिटिशन की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले पुरानी दलीलें रखने पर मुकेश के वकील एमएल शर्मा को कोर्ट ने फटकार लगाई। शर्मा ने दलील दी कि पुलिस ने टॉर्चर कर सीआरपीसी की धारा 313 के तहत मुकेश का बयान दर्ज किया था।

दलील मान ली तो नहीं चल पाएगा ट्रायल

- कोर्ट ने कहा कि यह दलील मान ली तो देश में कोई भी ट्रायल चल ही नहीं पाएगा। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने हिमालय पर्वत की भांति शांत होकर केस सुना है।

- कोर्ट ने तीन अन्य दोषियों विनय शर्मा, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर को 10 दिन में पुनर्विचार याचिका दायर करने को कहा है। अगली सुनवाई 22 जनवरी को होगी। उल्लेखनीय है कि 16 दिसंबर 2012 के निर्भया कांड में इस साल 5 मई को सुप्रीम कोर्ट ने दोषी मुकेश, विनय, पवन और अक्षय की फांसी की सजा पर मुहर लगाई थी।


अब नए तथ्य स्वीकार्य नहीं, फैसला कैसे गलत था यह बताएं

- चीफ जस्टिस ने कहा कि डीएनए जांच, पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर मुकेश अन्य तीन दोषी ठहराए गए थे। पीड़िता के शरीर पर मुकेश के दांतों के निशान अनदेखे नहीं कर सकते।

- मुकेश का बयान अहम साक्ष्य है। इस स्टेज पर नए तथ्य स्वीकार्य नहीं हैं। बताएं कि फैसला कहां गलत है? कोई विश्लेषण या जांच गलत थी तो साबित करो।

निर्भया का मृत्यु पूर्व दिया बयान भरोसे लायक नहीं

- मुकेश के वकील ने निर्भया के मृत्यु पूर्व बयान को भरोसे लायक नहीं बताया। कहा- मुकेश काे बस चलानी नहीं आती। लाइसेंस भी सिर्फ दोपहिया का है। टाॅर्चर के बारे में ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था। विचार नहीं हुआ। पुलिस ने भी सही जांच नहीं की।

टॉर्चर के खिलाफ कभी शिकायत नहीं की
दिल्लीपुलिस की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर सिद्धार्थ लूथरा ने मुकेश के वकील की दलीलों पर कहा कि मुकेश ने टाॅर्चर संबंधी कोई भी शिकायत तिहाड़ जेल प्रशासन या ट्रायल कोर्ट में नहीं की। यह मामला पुनर्विचार का नहीं है। उसकी याचिका खारिज की जानी चाहिए।