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सब्जी हो या तोप, महिलाएं मोलभाव करेंगी तो पैसे बचेंगे- रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दैनिक भास्कर से निर्मला सीतारमण की खास बातचीत।

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 04:09 AM IST
सीतारमण ने कहा कि उन्हें कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाए जाने के बाद भी पता नहीं था कि यह जिम्मेदारी दी जा रही है। सीतारमण ने कहा कि उन्हें कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाए जाने के बाद भी पता नहीं था कि यह जिम्मेदारी दी जा रही है।

नई दिल्ली. राजधानी के साउथ ब्लॉक में पुरुषों का वर्चस्व उस समय टूट गया जब कर्नाटक से राज्यसभा सांसद निर्मला सीतारमण ने रक्षा मंत्री के तौर पर कदम रखा। इस तरह वे देश की पहली फुल टाइम महिला रक्षा मंत्री बनीं। इससे पहले प्रधानमंत्री रहते हुए इंदिरा गांधी दो बार डिफेंस मिनिस्ट्री संभाल चुकी हैं। ब्रिक्स समिट के संबंध में चीन में हुई बैठक के दौरान भारत का पक्ष रखने और चीन से कारोबारी रिश्तों की बेहतरी के लिए काम करने को लेकर निर्मला सीतारमण को इस पद पर प्रमोट किया गया। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर दैनिक भास्कर के संतोष कुमार और मुकेश कौशिक से उनसे खास बातचीत की।

जब रक्षा मंत्री के पद के लिए चुना गया तो भावनात्मक और निजी तौर पर आपकी अपने लिए क्या प्रतिक्रिया थी?
- यह जिम्मेदारी सौंपते हुए जो विश्वास प्रधानमंत्री ने जताया उससे मैं भावविभोर हो गई थी। उसी समय मन में आया था कि इस भरोसे पर खरा उतरना है। कुछ कर दिखाना है। महिलाओं के लिए बात करने वाले तो बहुत हैं पर उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ किया नहीं। जो हमारी पार्टी पर, हमारी विचारधारा को महिलाओं के बारे में रूढ़िवादी होने का आरोप लगाते हैं, वे अब क्या जवाब देंगे। हमारी पार्टी पर जो तथाकथित लिबरल यह आरोप लगाते थे कि हम पुरातनपंथी हैं, वे सिर्फ लिप सर्विस करते रह गए और इतनी बड़ी जिम्मेदारी के लिए मुझे चुना गया।

डिफेंस के बारे में बातें होती थीं कि पुरुष किसी महिला से कैसे आदेश लेंगे। आपको क्या अनुभव देखने को मिले?
- मुझे यहां एक मिनट के लिए भी सर्विसेज़ और अधिकारियों में कभी संकोच या कंफ्यूजन नहीं दिखा कि वे महिला से कैसे आदेश लेंगे। छह महीने हो गए। एक पल भी मुझे नहीं लगा कि ऑर्डर लेने में उनके मन में कोई अलग भावना है।

क्या आपको पहले अहसास था या पीएम ने बताया था कि आपको डिफेंस दिया जा रहा है?
- कैबिनेट मंत्री की शपथ दिलाए जाने के बाद भी पता नहीं था कि यह जिम्मेदारी दी जा रही है। यह एकदम सरप्राइजिंग था।

सोशल मीडिया पर टिप्पणियां आईं थी कि अब एक महिला रक्षा मंत्रालय देखेंगी तो वे भी आम महिला की तरह मोलभाव करेंगी कि तोप का ऐसा डिजाइन दिखाओ, सही भाव लगाओ आदि। ​महिलाओं के बारे में इस तरह के परसेप्शन को आप किस ढंग से देखती हैं?
- सोशल मीडिया में बहुत कुछ स्टीरियोटाइप होता है। कुछ भी धारणा बनाई जा सकती है, लेकिन इसे भी मैं पॉजिटिव रूप में देखना चाहती हूं। अगर महिला से यह उम्मीद है कि मैं तर्क करूंगी, बारगेन करूंगी तो यह देश के हित में ही तो है। टैक्सपेयर्स का पैसा बचा रही हूं। मजाक उड़ाते रहें, मैं उसका आनंद लेती हूं, लेकिन मैं कहना चाहूंगी कि महिलाएं सब्जी खरीदती हैं और मोलभाव करती हैं तो भी वह घर का ही पैसा बचाती हैं, उसी तरह घर की खरीदारी हो या फिर तोप की खरीदारी, सब जगह देश का पैसा बचाना ही तो मकसद है। प्राइवेट मनी हो या पब्लिक मनी हो।

- अक्सर महिलाओं के लिए सिम्बॉलिक कदम उठाए जाते हैं, लेकिन महिलाओं के एक बड़े वर्ग को मजबूती देने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
- एम्पावरमेंट की हर कवायद में ऐसा ही होता है। आप आधार को जितना बढ़ाएंगे, पिरामिड उतना तीखा और ऊंचा होता जाता है। अगर हर कोई ऊपर जाएगा तो पिरामिड नहीं बल्कि रेक्टेंगल बन जाएगा। असल बात यह है कि जितना भी ऊपर हम जाते हैं तो अवसर भी कम होते हैं। ओर ऊपर जाने के लिए होड़ भी बढ़ती है। आधार बढ़ाना होगा पर किसी के ऊपर जाने का मूवमेंट प्रभावित नहीं होना चाहिए।

- महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की मांग लंबे समय से पेंडिंग है, पिछले चार साल में इसको लेकर कोई खास कोशिश नहीं दिख रही, क्या कहेंगी आप?
- महिला आरक्षण के मुद्दे पर हम तो हमेशा साथ दे रहे हैं, पिछली बार जब राज्यसभा में बिल पास हुआ तो काफी हंगामा हुआ था। अब हम बार-बार अपना रुख क्या बताएं, वह जगजाहिर है, लेकिन बात तो उनसे करनी है जो इस बिल पर आ​पत्ति कर रहे हैं। हमने तो इस दिशा में कई कदम उठाए हैं। बीजेपी पहली पार्टी है जिसने अपने संगठन में हर स्तर पर राष्ट्रीय कार्यकारिणी से पदाधिकारी तक महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण दिया हुआ है। यह सिलसिला बीजेपी ने 2008 में ही शुरू कर दिया था, अब उन लोगों को जवाब देना है जो इस बिल और पहल का विरोध कर रहे हैं।


- पार्टी की पॉलिसी तय करने वाली सबसे बड़ी संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड में महिलाओं की 33 फीसदी अगुआई आज भी नहीं है। आपको नहीं लगता यह होना चाहिए?
- पार्टी में, पार्लियामेंट्री बोर्ड में महिलाओं का बेहतर लीडरशिप है। सुषमाजी काफी वक्त से बोर्ड में मौजूद हैं। महिला इकाई की अध्यक्ष भी पदेन सदस्य के तौर पर पार्लियामेंट्री बोर्ड का हिस्सा रहती हैं। इसलिए मेरा मानना है कि बीजेपी के संसदीय बोर्ड में अगुआई है।

- अमित शाह ने पार्टी में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के लिए एक कमेटी बनाई थी, उसमें आपको जिम्मेदारी दी थी। हाल में नीति आयोग की रिपोर्ट में देखने में आया है कि गुजरात समेत अनेक राज्यों में लिंगानुपात (Sex ratio) गड़बड़ाया है, इस

दिशा में क्या कदम उठाने चाहिए?
- जब भी लिंगानुपात का जिक्र आता था तो लोग हरियाणा का नाम लेते थे। कहा जाता था कि इस राज्य में 1000 लड़कों पर 800 लड़कियां हैं। हमारी सरकार आने के बाद से यह हालात बदले हैं। हरियाणा में हर जिले, हर तहसील में जिस तरह कदम उठाए गए, उसी तरह हर राज्य की अपनी समस्या होती है। जैसे कुछ राज्यों में शादी, ज्वेलरी के खर्च को देखते हुए लोग बेटी को तरजीह नहीं देते। हर राज्य की इसी तरह की अलग-अलग समस्याएं हैं, लेकिन यह सच है कि हर राज्य की दिक्कतों को देखते हुए प्रोग्राम चलाने होंगे। हरियाणा में अगर सफलता मिली है तो बाकी राज्यों में भी मिल सकती है।


- सैन्य बलों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए आप क्या कदम उठा रही हैं?
- यह एक क्षेत्र है जिसे मैं निजी तौर पर देख रही हूं, लेकिन यह भी सच है कि अनेक अदालतों में कई तरह के मामले इस बारे में चल रहे हैं। मैं यह अहसास नहीं देना चाहती कि हम उनकी परवाह नहीं करते। लिहाजा हम अदालती फैसलों का इंतजार और उनका सम्मान करेंगे। शॉर्ट सर्विस कमिशन के बारे में फैसला आया है। उसका आदर किया गया है। मुझे लगता है कि सरकार को इस दिशा में आगे बढ़ना होगा और रास्ते तलाशने होंगे।


- अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
- मैं इतनी बड़ी नहीं हुईं हूं कि मैसेज देने लग जाऊं, लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि महिलाओं के आगे बढ़ने पर कोई सीमा या रोक नहीं है। किसी भी क्षेत्र पॉलिटिक्स हो या साइंस का क्षेत्र, मौका मिले तो महिलाएं आगे बढ़ सकती हैं। उन्हें उनके सपने को पूरे करने से कोई नहीं रोक सकता। वे आगे बढ़ सकती हैं। बस कमिटमेंट और डेडिकेशन की जरूरत है। यह हौंसला उनके मन में होना चाहिए कि आगे बढ़ना है।

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रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 जनवरी बुधवार को जोधपुर एयर बेस से देश के सबसे एडवांस फाइटर जेट सुखोई से उड़ान भरी थी। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने 17 जनवरी बुधवार को जोधपुर एयर बेस से देश के सबसे एडवांस फाइटर जेट सुखोई से उड़ान भरी थी।