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‘बेरोजगारी खत्म होने में लग जाएगा एक दशक’

पिछली सरकारों में रोजगार के साधन नहीं बढ़ रहे थे। जनता का भरोसा उठ चुका था। एक बड़े बदलाव की जरूरत थी।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 23, 2017, 07:00 AM IST

‘बेरोजगारी खत्म होने में लग जाएगा एक दशक’

नई दिल्ली। नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार को देश में बेरोजगारी खत्म होने का भरोसा है। मगर वह यह भी मानते हैं कि इसमें एक दशक लगेगा। सरकार ने हाल ही में जो सख्त फैसले लिए इससे अर्थव्यवस्था के पटरी पर आने की उम्मीद जगी है। रोजगार, अर्थव्यवस्था और चीन से कारोबारी रिश्तों समेत कई मुद्दों पर दैनिक भास्कर के स्पेशल रिपोर्टर अमित कुमार निरंजन और पवन कुमार ने राजीव कुमार से खास बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश :

नीति आयोग बेरोजगारी खत्म करने के क्या प्रयास कर रहा है?
जवाब - इस मामले में हम सही रास्ते पर हैं। 2014-15 में 66 हजार करोड़ रुपए का लोन छोटे, मझोले उद्योग को दिया जाता था । उसके बाद मुद्रा ऋृण योजना लागू हुई। उसके एक साल बाद 1 लाख 42 हजार करोड़ रुपए का लोन ‌इन्हें दिया गया। इस साल तक 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपए का लोन छोटे उद्योग चलाने वाले लोगों द्वारा लेने की संभावना है । इस तरह करीब सात करोड़ अलग-अलग तरह के लोन दिए जा चुके हैं। इसका अगर 50% भी रिजल्ट आने लगा तो बेरोजगारी का बैकलॉग पूरा होने लगेगा। अगर हम हर साल डेढ़ करोड़ बेरोजगारी बैकलॉग खत्म करने में कामयाब हुए, तो लगभग एक दशक में पूर्ण रोजगार अर्थव्यवस्था बन जाएंगे।


पिछली सरकारों के विकास मॉडल के बारे में क्या कहेंगे?
जवाब - देखिए पिछले छह-सात सालों में हर साल सिर्फ डेढ़ लाख युवाओं को ही रोजगार मिल रहा था। साल 2011-12 के दौरान विकास की गति को धक्का लगा था। रोजगार के साधन नहीं बढ़ रहे थे, निवेश घट गया था। सरकार से भरोसा उठ गया था। इसे बदलने की जरूरत थी।
मौजूदा सरकार ने बदलाव के लिए क्या किया?
जवाब- नोटबंदी और जीएसटी जैसे दो बड़े फैसले लिए गए। गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव से साफ हो गया कि सख्त फैसलों को जनता का समर्थन मिला है।
डोकलाम विवाद के बाद संघ ने चाइनीज प्रोडक्ट के बायकॉट की बात कही थी। उन्होंने यह भी कहा था कि नीति आयोग की प्रासंगिकता खत्म हो गई है?
जवाब -(मुस्कुराते हुए) संघ के लोग भी हमारे मित्र हैं और नीति आयोग की प्रासंगिकता कम से कम मेरे रहते तो बनी रहेगी। रही बात चीन की तो मैं, पिछले हफ्ते चीन में ही था। वहां ऐसी आवभगत हुई, जिसका मुझे अंदाजा भी नहीं था।
चीन की ओर से वो उत्साह नहीं दिखता जितना उसके प्रति हमारा। क्या कहेंगे?
जवाब -उनके पास कई क्षेत्रों में तजुर्बा है। जैसे उन्होंने 20 हजार किमी से ज्यादा का हाईस्पीड ट्रेन का ट्रैक तैयार किया, जिस पर 300 किमी/घंटे रफ्तार से ट्रेन दौड़ती है। वहां मुझे बताया गया कि भारतीय ट्रैक्स को बिना बदले तकनीक की मदद से 200 किलोमीटर स्पीड से ट्रेन दौड़ाई जा सकती है।
लेकिन भारत और चीन के बीच ट्रेड गैप बहुत है।
जवाब - यह बात सही है कि चीन से अभी हमारा ट्रेड गैप काफी है, देश के विकास के लिए यह गैप कम करना बेहद जरूरी है। हमें चीन के साथ सभी विवादों को पीछे छोड़कर अर्जुन की तरह सिर्फ अपने लक्ष्य पर ही ध्यान केंद्रित करना चाहिए। हमारा लक्ष्य विकास है इस पर ध्यान देना चाहिए। बाकी बातों को इसके आड़े लाना ठीक नहीं होगा। चीन से हमें काफी मदद मिलेगी। दूसरे विश्व युद्ध के समय जापान और चीन में तल्खी काफी थी। इसके बावजूद भी चीन में 1982 के बाद जापान का निवेश शुरू हुआ। आज सबसे ज्यादा सात हजार कंपनियां वहां जापान की हैं। यहां तक कि ऑटोमोबाइल और बुलेट ट्रेन की तकनीक को चीन ने जापान की मदद से ही आगे बढ़ाया है। इसलिए ट्रेड के मामले में गैप नहीं होना चाहिए।

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Web Title: berojgaaari khatm hone mein lga jaaegaaa ek dshk
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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