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साइबर कोर्ट में छह साल में नहीं हुआ है एक भी फैसला

मगर ट्रिब्यूनल में चेयरपर्सन की नियुक्ति ही नहीं की गई थी। इसलिए छह साल तक उन्हें तारीखें ही मिलती रहीं।

Dainik Bhaskar

Dec 10, 2017, 06:21 AM IST
पिछले छह साल से साइबर अपीलेट ट पिछले छह साल से साइबर अपीलेट ट

नई दिल्ली. आंध्रप्रदेश के रहने वाले संजीवन (बदला हुआ नाम) के बैंक अकाउंट से 2009 में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन में धोखाधड़ी कर चार लाख रुपए निकाल लिए गए। उन्होंने बैंक के खिलाफ केस कर दिया और जीत भी गए। इसके बाद 2011 में फैसले के खिलाफ बैंक साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल (सीएआरटी) चला गया। मगर ट्रिब्यूनल में चेयरपर्सन की अप्वाइंटमेंट ही नहीं की गई थी। इसलिए छह साल तक उन्हें तारीखें ही मिलती रहीं। आज तक इस केस का फैसला नहीं हुआ है और संजीवन को अपने चार लाख रुपए वापस नहीं मिले हैं।

6 साल में नहीं हुआ एक भी फैसला

- दरअसल ऑनलाइन फ्रॉड के केस अलग से सुनने की सरकार की कवायद पूरी तरह नाकाम रही है। पिछले छह साल से साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल (सीएआरटी) में एक भी फैसला नहीं हुआ है।

- वजह यह है कि 2011 के बाद से ट्रिब्यूनल में चेयरपर्सन की नियुक्ति ही नहीं की गई। 2006 से मई 2017 तक कुल 87 केस ट्रिब्यूनल में रजिस्टर्ड हुए थे, जिसमें से 17 केस का फैसला हुआ, और 70 केस अभी भी लंबित हैं। ये मामले तारीखों में उलझे हुए हैं।

- सीएआरटी के पूर्व सदस्यों का कहना है कि उन्होंने चेयरपर्सन की नियुक्ति के लिए केंद्र सरकार को कई बार लेटर लिखा, लेकिन कुछ नहीं हुआ।

- हालांकि 2015 में दो बार चेयरपर्सन की अप्वाइंटमेंट के प्रयास हुए। लेकिन चेयरपर्सन ने इसलिए मना कर दिया, क्योंकि वह सरकारी आवास और सुरक्षा से संतुष्ट नहीं थे।

- इधर इस साल जून में सरकार ट्रिब्यूनल का विलय टीडीसेट (टेलीकॉम डिस्प्यूट सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल) में कर दिया गया। लेकिन यहां भी पिछले छह महीने में एक भी सुनवाई नहीं हुई है।

- ऐसा क्यों हो रहा है, इस पर टेलीकॉम सीनियर एडवोकेट प्रशांत माली कहते हैं कि टीडीसेट में साइबर एक्सपर्ट नहीं होने के कारण केसों के निपटारे में दिक्कत रही है। वहां टेलीकॉम मामलों के तकनीकी विशेषज्ञ तो हैं मगर साइबर मामलों के नहीं। जबकि सायबर ट्रिब्यूनल में तकनीकि स्पेशलिस्ट की नियुक्ति होती थी।

- मंत्रालय के डायरेक्टर नवीन कुमार कहते हैं कि प्रक्रिया शुरू हो गई। फैसले भी आने लगेंगे। टीडीसेट में तकनीकी स्पेशलिस्ट की अप्वाइंटमेंट का प्रावधान ही नहीं है। जब साइबर अपीलेट ट्रिब्यूनल का टीडीसेट में मर्जर हुआ था। तब भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं बनाया गया था।

पिछले साल के मुकाबले 73 फीसदी तक कंप्लेन में हुआ इजाफा
- टीडीसेट के ज्यूडिशियल डिपार्टमेंट ने कहा कि कि सुनवाई चल रही है, लेकिन अभी तक किसी मामले का फैसला नहीं आया है।

- टीडीसेट के अधिकारियों का कहना है कि अभी तक तो यही तय नहीं है सुनवाई की प्रक्रिया क्या होगी। सुनवाई होने से तमाम लोगों ने अपने केस विड्रॉ कर लिए हैं। ये हालात तब हैं, जब देश का ई-कॉमर्स सेक्टर 19 फीसदी की दर से बढ़ रहा है और इससे जुड़ी शिकायतों में पिछले साल के मुकाबले इस साल 73 फीसदी तक का इजाफा हुआ है।

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