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इसलिए कश्मीर में हो रहा है लगातार खूंखार आतंकियों का सफाया

श्रीनगर के लाल चौक पर जिंदगी अपनी रौ में है। दुकानों पर रौनक है और सड़कों पर भीड़-भाड़।

bhaskar news| Last Modified - Dec 03, 2017, 03:59 AM IST

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Operation report of more than 200 killed terrorists in 11 months
इस साल घाटी में 200 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। इनमें से 40 आतंकी डिस्ट्रिक्ट कमांडर या इससे ऊपर के लेबल के थे। -फाइल

श्रीनगर.   श्रीनगर के लाल चौक पर जिंदगी अपनी रौ में है। दुकानों पर रौनक है और सड़कों पर भीड़-भाड़। वाहनों में अच्छी खासी तादाद पीले रंग की स्कूली बसों की है, जिनमें कहीं नीला तो कहीं हरा ब्लेजर पहने बच्चे चहक रहे हैं। सड़क किनारे सीआरपीएफ के जवान बख्तरबंद जैकेट और हाथ में एके 47 लिए मुस्तैद खड़े हैं। पत्थरबाजी की कोई बड़ी घटना हुए महीनोंं बीत चुके हैं। यह वह कश्मीर तो नहीं है जो डेढ़ साल पहले बुरहान वानी के एनकाउंटर के बाद से उबलता और सुलगता नजर आता था। पुलिस के मुताबिक इस साल घाटी में 200 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। इनमें से 40 आतंकी डिस्ट्रिक्ट कमांडर या इससे ऊपर के लेबल के थे। 

 

 

अनंतनाग और पुलवामा से पीयूष बबेले की ग्राउंड रिपोर्ट

- घाटी की बदली फिज़ा का हाल जानने के लिए मैंने सबसे पहले जम्मू कश्मीर पुलिस के आईजी श्रीनगर मुनीर खान के दफ्तर का रुख किया। मुनीर 1990 के दशक से आतंक के खिलाफ अभियानों का एक बड़ा चेहरा रहे हैं। इस समय चल रहे ऑपरेशन में सेना, अर्द्धसैनिक बलों और पुलिस के बीच वे सूत्रधार की भूमिका में हैं।

- कश्मीर में इस साल के शुरुआती 11 महीनों में 205 आतंकी मार गिराए गए, इसकी असल वजह क्या है? खान का सीधा जवाब, "ऊपर से साफ आदेश हैं कि ईमानदारी से आतंक खत्म करना है।’

- अपनी बात को समझाते हुए वे कहते हैं कि अब यह तय हो चुका है कि हालात कैसे भी हो जाएं सुरक्षा बलों की संयुक्त टीम ऑपरेशन खत्म किए बिना लौटेगी नहीं। कन्फ्यूजन की कोई गुंजाइश ही नहीं है। 

 

इन्होंंने अब तक 19 आतंकियों को मार गिराया
- मुनीर खान दूसरी बात यह बताते हैं कि जनता का भरोसा जीतने के लिए जहां लगता है कि नरमी से काम लिया जा सकता है, वहां ऐसा ही किया जाता है। पत्थरबाजी के 4,500 से ज्यादा आरोपियों से मुकदमे वापस लिए जाना एेसी ही पहल है। सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस तीनों में तालमेल बढ़ा है।

- सीआारपीएफ के आईजी ऑपरेशन्स जुल्फिकार हसन बताते हैं, तीनों बलों के प्रमुख की हैसियत से हम लोग हफ्ते में कम से कम दो बार तो साथ बैठ ही लेते हैं।

- सशस्त्र सीमा बल के डीआईजी राजेंद्र कुमार भूंबला कहते हैं, लोकल लेवल पर भी अफसरों के बीच बेहतर तालमेल है। अब किसी ऑपरेशन के लिए कागजबाजी की जरूरत नहीं पड़ती।

- आतंकवाद से सबसे ज्यादा पीड़ित जिलों में से एक दक्षिण कश्मीर के पुलवामा में तैनात सीआरपीएफ की बटालियन के कमांडर नरेंद्र पाल सिंह ने बताया, हमारी बटालियन ने, सेना की बटालियन ने और जिला पुलिस ने अपने-अपने स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप बना रखे हैं। इन तीनों ग्रुप में मिलाकर करीब 50 सबसे तेज जवानों का ग्रुप बन जाता है, जो किसी भी तरह की सूचना मिलने पर पांच मिनट के भीतर एक्शन में आने को तैयार रहता है। इसी को-अॉर्डिनेशन का असर है कि यह बटालियन पिछले साल तक जहां हर साल औसत 2-3 आतंकवादी मार गिरा पाती थी, वहीं इस साल इन्होंंने अब तक 19 आतंकियों को मार गिराया है। 

 

 

110 विदेशी और 90 भारतीय हैं यहां आंतकी
- ऐसे कई ग्रुप बने हैं। इसमें अबु दुजाना जैसा कुख्यात आतंकवादी भी शामिल है। पुलवामा की इस बटालियन के कमांडर नरेंद्र पाल सिंह हेडक्वार्टर के स्पेशल रूम में ले गए।

- इस कमरे में जो चीज सबसे पहले आपकी निगाह खींचती है वह है दीवार पर लगी 50 आतंकियों की तस्वीरें। इनमें से कुछ पर क्रॉस लगा है, जबकि कुछ साबुत हैं।

- कमांडर बताते हैं, "जहां क्रॉस लगा है, उनका तो काम तमाम हो चुका है। जिन पर क्रॉस नहीं लगा है, उन पर भी जल्दी ही लग जाएगा।"

- सुरक्षा बलों के इस बुलंद इरादे की तस्दीक श्रीनगर में राष्ट्रीय राइफल्स के बादामी बाग मुख्यालय मेंं बैठे सेना के स्पोक्सपर्सन कर्नल राजेश कालिया भी करते हैं।

- कालिया ने बताया, "करीब 200 आतंकियों की पहचान कर ली गई है। इनमें से 110 विदेशी और 90 भारतीय हैं। इस तादाद को लेकर सारी सिक्युरिटी फोर्सेज के बीच रजामंदी है।"

 

इस साल सेना ने मारे 200 आतंकी

- ये आतंकी सुरिक्षत पनाहगाहों में लौट पाएं इससे पहले ही इन्हें मार गिराने के लिए सुरक्षा बल इस बार सर्दियों में भी पूरी शिद्दत से ऑपरेशन ऑल आउट चलाने की तैयारी में हैं।

- आइजी जुल्फिकार ने बताया, इस बार ऑपरेशन धीमा होने की जगह और तेज हाेगा। गुजरात चुनाव खत्म होने के बाद सीआरपीएफ के पास कश्मीर के लिए और जवान होंगे।

- सूत्रों की मानें तो सीआरपीएफ के करीब 5,000 जवान दिसंबर के दूसरे हफ्ते में कश्मीर पहुंच जाएंगे।

- इस साल सिक्युरिटी फोर्सेज की कार्रवाई में जो 200 आतंकी मारे गए उनमेंं से 40 आतंकी डिस्ट्रिक्ट कमांडर या इससे ऊपर के लेबल के थे। इनमें से कई आतंकी चार-पांच साल से एक्टिव थे, जबकि आमतौर पर आतंकियोंं की उम्र हथियार उठाने के दो 2-3 साल बाद खत्म हो जाती है। कश्मीर पुलिस युवाओं के प्रति काफी नर्मी भी बरत रही है।

- आईजी श्रीनगर मुनीर खान यह भी कहते हैं कि- जो नए लड़के आतंक की राह पर गए हैं, अगर उन्होंने कोई सीरियस क्राइम नहीं किया है तो उन्हें घर वापसी का पूरा मौका दिया जा रहा है। इन लड़कों से कहा गया है कि उन्हें थाने जाने की भी जरूरत नहीं है, वे सीधे अपने घर चले जाएं। इन लड़कों और उनके परिवार से किसी तरह की पूछताछ नहीं की जाएगी। खान कहते हैं- माफी मतलब माफी। 

 

टैरर फंडिंग में 40 से ज्यादा लोगों पर गाज, रुकी  पत्थरबाजी
- कश्मीर में तैनात सिक्युरिटी ऑफिसर बताते हैं कि टेरर फंडिंग पर नकेल कसने से पत्थरबाजी कम हुई है। दरअसल, एनआईए ने कश्मीर में बड़ी तादाद में ऐसे बैंक खातों की पहचान की जिनमें लगातार विदेशों से पैसा आता रहता था। ऐसे 40 से ज्यादा खातों को सील किया गया है। यह पैसा कृषि उपज या अन्य सामान के एक्सपोर्ट के बदले में आया दिखाया जाता था। फंडिंग में शामिल ज्यादातर लोग सफेदपोश थे और अपने आेवर ग्राउंड काडर की मदद से पत्थरबाजों को पैसा भेजते थे। अब चूंकि इनमें से ज्यादातर लोग कश्मीर से बाहर की जेलों में भेज दिए गए हैं, इसलिए पैसे की आसान पहुंच रुक गई है।

 

 

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घाटी में पत्थरबाजी के 4,500 से ज्यादा आरोपियों के मुकदमे वापस लिए गए हैं। -फाइल
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