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IIT के स्टूडेंट थे ये 'खिलौना गुरु', इस शौक के लिए छोड़ दी नौकरी

अरविंद गुप्ता का नाम पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है।

Dainik Bhaskar

Jan 27, 2018, 07:48 PM IST
टॉय मेकिंग पर अरविंद गुप्ता 18 भाषाओं में 6200 फिल्में बना चुके हैं। टॉय मेकिंग पर अरविंद गुप्ता 18 भाषाओं में 6200 फिल्में बना चुके हैं।

दिल्ली. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों का एलान कर दिया गया है। समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में असाधारण उपलब्धियों के लिए समाज की महान हस्तियों को पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाता है। वहीं, वेस्ट मटेरियल से खिलौने बनाने वाले अरविंद गुप्ता का नाम पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना गया है। इस मौके पर DainikBhaskar.com अपने रिडर्स को बताने जा रहा है 'खिलौना गुरु' के अचीवमेंट्स के बारे में। कबाड़ से खिलौना बनाता है ये IITian...

बता दें कि शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुने गए अरविंद गुप्‍ता को घर के वेस्ट से खिलौने बनाने में महारत हासिल है। आईआईटी से पास आउट अरविन्द ने हजारों स्कूल में बच्चों को कबाड़ से खिलौना बनाकर पढ़ाने में मदद की।

बच्चों को खिलौने बनाना सीखाते हैं

64 वर्षीय अरविंद महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। आईआईटी कानपुर से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षा क्षेत्र को समर्पित कर दिया। फिलहाल, अरविंद पुणे के चिल्ड्रेन साइंस सेंटर चलाते में बच्चों को खिलौने बनाना सीखाते हैं और इसके जरिए बच्चों को साइंस और मैथ्स पढ़ाते हैं।

आगे की स्लाइड्स में जानें 'खिलौना गुरु' अरविंद गुप्ता के बारे में इंटरेस्टिंग फैक्ट्स...

Padma Shri for scientist & toymaker Arvind Gupta

इलेक्ट्रीकल ब्रांच से किया बीटेक

 

- IIT कानपुर से 1975 में इलेक्ट्रीकल ब्रांच में बीटेक करने के बाद अरविंद ने कबाड़ से खिलौने बनाकर बच्चों को विज्ञान पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद उनका ये तरीका पूरी दुनिया में मशहूर हो गया।

Padma Shri for scientist & toymaker Arvind Gupta

18 भाषाओं में 6200 फिल्में बनाई

 

- पिछले चार दशकों में अरविंद 3000 स्कूलों की यात्रा कर चुके हैं। टॉय मेकिंग पर वह 18 भाषाओं में 6200 फिल्में बना चुके हैं। यही नहीं वो अपनी वेबसाइट पर 12 किताबें मुफ्त में उपलब्ध कराते हैं।

Padma Shri for scientist & toymaker Arvind Gupta

इस शो से मिली प्रसिद्धि

 

- अरविंद के डीडी पर प्रसारित होने वाले शो तरंग (1980) को भी काफी सराहा गया था। इस शो को उन्होंने होस्ट किया था। 'घर के वेस्ट से कैसे खिलौनों का निर्माण किया जाए' के मुद्दे पर उनसे टेड टॉक विश्व में काफी चर्चित रहा।

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यहां आने पर बदल गई सोच


- IIT की पढ़ाई के बाद टेलको कंपनी में नौकरी करते हुए 1978 में उन्होंने कंपनी से एक साल के लिए पढ़ाई के लिए छुट्टी ली। इसके बाद वो मध्यप्रदेश के हौशंगाबाद जिले में साइंस टीचिंग प्रोग्राम में शामिल हुए। लेकिन, यहां आने के बाद उनकी सोच काफी बदल गई।

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ये बात अरविंद के दिल को छू गई


- बताया जाता है कि हौशंगाबाद में टीचिंग प्रोग्राम के दौरान वो एक बच्चे को साइंस पढ़ा रहे थे। लेकिन, बच्चे को समझ में नहीं आ रहा था तो उन्होंने एक खिलौना लेकर उसे समझाने की कोशिश की। फिर क्या था बच्चा बड़े ही दिलचस्पी के साथ उन्हें सुनने लगा। अरविंद को ये बात दिल तक छू गई।

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इसलिए छोड़ दी नौकरी


- इसके बाद अरविंद ने तय किया कि वो बच्चों के लिए अलग-अलग तरह के खिलौने बनाएंगे, जिससे बच्चों को विज्ञान अच्छी तरह से समझ में आए। उन्होंने नौकरी छोड़ दी और इसी काम में लग गए।

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टॉय मेकिंग पर अरविंद गुप्ता 18 भाषाओं में 6200 फिल्में बना चुके हैं।टॉय मेकिंग पर अरविंद गुप्ता 18 भाषाओं में 6200 फिल्में बना चुके हैं।
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