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130 करोड़ की आबादी में टैलेंट नहीं, छोटे शहरों से आते हैं ज्यादातर कर्मी, इन्हें अंग्रेजी ही नहीं आती

कमेटी ने स्टाफ के मुसाफिरों से व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मुसाफिरों के साथ किसी झुंड की तरह बर्ताव किया जाता है।

Danik Bhaskar | Jan 06, 2018, 04:49 AM IST
एयरलाइन कंपनियां फ्यूल की कीमत 50 फीसदी कम हाेने के बावजूद पैसेंजर्स काे फायदा नहीं देतीं। (फाइल फोटो) एयरलाइन कंपनियां फ्यूल की कीमत 50 फीसदी कम हाेने के बावजूद पैसेंजर्स काे फायदा नहीं देतीं। (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. पैसेंजर्स से मनमाना किराया वसूलने और लंबी कतारों में खड़ा रहने को मजबूर करने पर पार्लियामेंट्री कमेटी ने एयरलाइन्स को फटकार लगाई है। दो दिन पहले राज्यसभा में पेश 256वीं रिपोर्ट में ट्रांसपोर्टेशन, टूरिज्म और कल्चर पर कमेटी ने कहा कि एयरलाइन्स पहले तो कैपिसिटी से ज्यादा टिकटें बुक कर लेती हैं। बाद में चेक-इन के वक्त लोगों को लंबी कतारों में खड़ा करके ऐसे बनावटी हालात बना देती हैं कि कन्फर्म टिकट के बावजूद उन्हें बोर्डिंग से रोक सकें। कमेटी ने पैसेंजर्स के साथ स्टाफ के बिहेवियर पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि मुसाफिरों के साथ किसी झुंड की तरह बर्ताव किया जाता है।

कमेटी के जवाब का इंडिगो ने दिया अजीब तर्क

- कमेटी ने जब इस बारे में इंडिगो से जवाब मांगा तो उसने अजीब तर्क देते हुए कहा, ''130 करोड़ की आबादी में भी टैलेंट नहीं मिलता, ज्यादातर स्टाफ छोटे शहरों से आते हैं, जिन्हें अंग्रेजी नहीं आती।''

- इंडिगो ने सफाई में कहा कि यहां बहुत बड़ी-बड़ी डिग्री वाले बहुत से युवक हैं, लेकिन जो टैलेंट हमें चाहिए, वह नहीं मिलता है। इंडिगो टियर टू और टियर थ्री शहरों से युवकों को नौकरी पर रखता है। उन्हें अंग्रेजी नहीं आती।

- कमेटी ने एयरलाइन्स के इस तर्क को नकारते हुए कहा, "आप यह नहीं कह सकते कि सरकारी स्कूल अच्छे बच्चे तैयार नहीं करते। उन्हें ट्रेनिंग देना आपकी जिम्मेदारी है।"

1. टिकट और कैंसिलेशन चार्ज

त्योहारों, छुटि्टयों में मनमाना किराया, एविएशन मिनिस्ट्री कुछ नहीं कर रही

- किराया तय करने के लिए विकसित देशों में लागू डायनेमिक प्राइसिंग भारत के लिए सही नहीं है। त्योहार, छुट्‌टी या यात्रा की तारीख के पास बुकिंग पर एयरलाइन्स 10 गुना तक किराया वसूलती हैं।

- एटीएफ की कीमत 50% घटने का फायदा कंज्यूमर्स को नहीं दिया। इस शोषण की जानकारी के बावजूद सिविल एविएशन मिनिस्ट्री किराया नियंत्रित करने को कुछ नहीं कर रहा।

- प्राइवेट एयरलाइन्स तो ऑफर की आड़ में बुक करवाई गई टिकट रद्द करने पर पूरा किराया वसूलती हैं।

सिफारिश: सरकार प्लेन टिकट का मैक्सिमम किराया तय करे। कैंसिलेशन चार्ज 50% तक रहे। डीजीसीए निगरानी रखे।

2. पैसेंजर्स के साथ बुरा बर्ताव

इंडिगो कर्मियों का रवैया ऐसा, जैसे वह किसी ऊंची जमीन पर हैं और यात्री झुंड हैं

- इंडिगो के कर्मियों का रवैया ऐसा है, जैसे वह किसी ऊंची जमीन पर हैं और मुसाफिर झुंड हैं। ग्राउंड स्टाफ का व्यवहार तो केबिन क्रू से भी बुरा है।

- एयरलाइन्स स्टाफ का नजरिया कुछ ऐसा है जैसे यात्री अनपढ़ हैं, उन्हें कुछ नहीं मालूम और उन्होंने कभी प्लेन से यात्रा नहीं की। कभी-कभी एयरलाइन्स कर्मी ‘कृपया’ और ‘धन्यवाद’ बुदबुदाते हैं।

- ऐसी कई घटनाएं हैं, जिसमें एयरलाइन्स के ग्राउंड स्टाफ और केबिन क्रू ने पैसेंजर्स के साथ मारपीट और बुरा व्यवहार किया है।

सिफारिश: बदसलूक कर्मियों पर सख्त कार्रवाई हो। बुरा बर्ताव एयरलाइन्स की परेशानी है। इंडिगो पैसेंजर्स से दोस्ताना व्यवहार का तरीका खोजे।

3. खाने की क्वालिटी
जेट एयरवेज के सीईओ ने माना कि उनके यहां खाने की क्वालिटी गिरी

- विमानों में बेहतर खाना परोसा जाए। मेन्यू समय-समय पर बदलना जरूरी है। कुछ एयरलाइन्स का खाना अच्छा होता है। जेट एयरवेज के सीईओ ने माना कि उनके यहां खाने की क्वालिटी बिगड़ी है। कमेटी ने पाया कि सस्ती एयरलाइन्स में खाना और पानी लेना काफी मुश्किल है, खासकर इंडिगो में। इंडिगो में खाना पहले ही बुक करना पड़ता है। बोर्डिंग के बाद कोई खाना मांगे तो मना कर देते हैं। डायबिटीक या किसी अन्य बीमार व्यक्ति को भी खाना नहीं देते।

सिफारिश: इंडिगाे और अन्य सस्ती एयरलाइन्स सुनिश्चित करें कि यात्रियों को मांगने पर खाना दे सकें। कैटरिंग किचन का समय-समय पर ऑडिट हो।

10 महीने में इंडिगो एयरलाइन की 901 कंप्लेंट्स सामने आई हैं।  (सिम्बॉलिक इमेज) 10 महीने में इंडिगो एयरलाइन की 901 कंप्लेंट्स सामने आई हैं। (सिम्बॉलिक इमेज)