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अफगानिस्तान से आ रहे कण बढ़ा रहे दिल्ली का प्रदूषण, स्टडी में हुआ खुलासा

सीपीसीबी और दिल्ली आईआईटी के वैज्ञानिकों की स्टडी में खुलासा।

Danik Bhaskar | Dec 20, 2017, 05:55 AM IST

नई दिल्ली. पांच हजार किलोमीटर दूर अफगानिस्तान की साल्ट माइंस से कण तीन हजार मीटर ऊंचाई से ट्रैवल करते हुए दिल्ली पहुंच रहे हैं। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की एक स्टडी में यह बात सामने आई है। इसमें आईआईटी दिल्ली के भी विशेषज्ञ शामिल थे।

- सीपीसीबी के सीनियर साइंटिस्ट अभिजीत पाठक ने बताया कि हवाओं के विश्लेषण को समझने के लिए दुनिया भर में ट्रैजेक्ट्री मॉडल से इसे मापा जाता है। इसी से हमें यह जानकारी मिली। वहीं, सीपीसीबी के सीनियर साइंटिस्ट डी साहा ने बताया कि समुद्र के नमक का कोई पैमाना तय नहीं है।

- ये ज्यादातर समुद्र के नजदीक तटीय इलाकों में नजर आते हैं। मगर यह चौंकाने वाला है कि सर्दियों में समुद्री नमक के कण पीएम 2.5 के स्तर को बढ़ाने में हिस्सेदारी दे रहे हैं।

साल्टमाइंस से हाई लेवल क्लोराइड हवा में मिला
- स्टडी में यह पता चला कि इन साल्ट माइंस की वजह से दिल्ली की हवा में हाई लेवल क्लोराइड पाया गया। अभिजीत पाठक ने बताया कि उत्तर उत्तर पश्चिम दिशा से हवाएं दिल्ली की तरफ पहुंचेंगी, तभी इसका इफेक्ट नजर आएगा। इसमें अफगानिस्तान की साल्ट माइंस के हाई क्लोराइड के पदार्थ नजर सकते हैं।
- पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के प्रोजेक्ट सफर ने बताया था कि 7 नवंबर को दिल्ली में जो स्मॉग फैला था। उसमें 40 फीसदी हिस्सेदारी मिडिल ईस्ट से रही धूलभरी हवाओं की थी। सीपीसीबी के अभिजीत पाठक ने बताया कि ऐसी परिस्थितियां जरूर बनती हैं, जिससे पश्चिम एशिया से प्रदूषित कण ट्रैवल होकर दिल्ली में पहुंच सकते हैं। सर्दियों में जब हजारों किलोमीटर दूर से दूषित हवाएं दिल्ली पहुंचती हैं तो यहां का प्रदूषण खतरनाक कैटेगरी में तब पहुंच जाता है।

पहले लगा कि बंगाल की खाड़ी से पहुंचा क्लारोइड
- सीपीसीबी के वैज्ञानिक अभिजीत पाठक ने बताया कि यह स्टडी तब की गई थी, जब दिल्ली की हवा में फरवरी में बहुत ज्यादा क्लोराइड लेवल पाया गया। शुरू में लगा कि यह क्लोराइड बंगाली की खाड़ी या अरब सागर से पहुंचा है। मगर यह अफगानिस्तान की साल्ट माइंस से दिल्ली में पहुंचा था।

क्लोराइड पॉल्यूशन लेवल को 11 फीसदी बढ़ाता है
क्लोराइडसे हेल्थ पर ज्यादा इफेक्ट नहीं होते। मगर यह दिल्ली में मौजूद प्रदूषित कणों के साथ मिलकर उसे 11 पर्सेंट तक बढ़ा देते हैं। यह दिल्ली के प्रदूषण कणों से केमिकल रिएक्शन कर पॉल्यूशन बढ़ा देता है। मसलन अगर पीएम 2.5 का लेवल 200 है तो इससे यह 250 तक पहुंच जाता है।