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अमेरिका में टैक्स छूट: अब यहां काॅर्पोरेट, इनकमटैक्स में राहत संभव

जानकार भी संभावनाएं जता रहे हैं कि आयकर की टैक्स छूट सीमा 2.5 लाख रु. से बढ़कर 3.5 से चार लाख रु. हो सकती है।

पीयूष बबेले, संतोष कुमार | Last Modified - Dec 31, 2017, 06:46 AM IST

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    टैक्स की कैटेगरीज में भी बदलाव हो सकता है। (सिम्बॉलिक)

    नई दिल्ली. अरुण जेटली जब 1 फरवरी को मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट पेश करेंगे तो लोगों को उम्मीद रहेगी कि भारत सरकार भी देश के उद्योग जगत और मिडल क्लास को वैसी ही कर राहत दे, जैसी राहत एक जनवरी से डोनाल्ड ट्रम्प सरकार अमेरिका में देने जा रही है। एक्सपर्ट्स भी संभावनाएं जता रहे हैं कि इनकम टैक्स की छूट सीमा 2.5 लाख रु. से बढ़कर 3.5 से चार लाख रु. हो सकती है। टैक्स की कैटेगरीज में भी बदलाव हो सकता है।

    जेटली के सामने होंगी चुनौती

    - कॉर्पोरेट टैक्स को 28% से घटाकर 25% करने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं। लेकिन इसमें कुछ रुकावटें भी मानी जा रही हैं- जैसे जीएसटी का लगातार टारगेट से कम कलेक्शन और बढ़ता राजकोषीय घाटा। ऐसे में कर में राहत यानी सरकार पर आर्थिक बोझ। वैसे कर में राहत की उम्मीदें बेबुनियाद भी नहीं है, क्योंकि फाइनेंशियल ईयर के शुरुआती छह महीने में इनकम टैक्स कलेक्शन 15% बढ़ा है। कर ढांचे में करीब 80 लाख नए टैक्सपेयर्स जुड़े हैं। सरकार ने कर राहत का वादा भी किया था।

    - उम्मीदों के पीछे कुछ राजनीतिक वजहें भी हैं। जैसे, गुजरात चुनाव में बीजेपी को मिली मामूली जीत। इसमें सबसे बड़ा नायक वहां का कारोबारी और मिडल क्लास रहा है। सरकार इनके लिए भी कर राहत की घोषणा कर सकती है। उधर अमेरिकी सरकार कॉर्पोरेट टैक्स की दर 35% से घटाकर 21% करने और इनकम टैक्स में छूट देने की तैयारी में है।

    सरकार वादा निभाए

    - अमेरिका की तर्ज पर भारत में कॉर्पोरेट टैक्स में कमी के सवाल पर इंडस्ट्रियल ऑर्गेनाइजेशन फिक्की के महासचिव संजय बारू कहते हैं, "अमेरिका से सरकार इन्सपिरेशन ले या न ले, लेकिन खुद जेटली ने अपने पहले बजट में कॉर्पोरेट टैक्स घटाने का वादा किया था। हम सरकार से इतनी उम्मीद रखते हैं कि वह अपना वादा निभाएं।"

    - जेटली ने अपने पहले बजट में कॉर्पोरेट टैक्स की दर 30 से घटाकर 25% करने की बात कही थी।

    - अगर सरकार टैक्स घटाती है तो इसका क्या असर होगा? इस पर बारू का कहना है, कंपनियों की प्रोडक्शन लागत घट जाएगी और खर्च के लिए उनके हाथ में एक्स्ट्रा पैसा होगा। इससे प्रोडक्शन बढ़ेगा और इकोनॉमी में तेजी आएगी। सरकार ने दो साल से इनकम टैक्स में छूट सीमा को बढ़ाया नहीं है, ऐसे में इसके बढ़ने की संभावना ज्यादा है।

    - सीनियर सीए और केपीएमजी की एडवाइजर भावना दोषी कहती हैं कि चुनाव से पहले जेटली ने इनकम टैक्स से छूट लिमिट 5 लाख रु. करने की बात कई बार कही थी, चूंकि यह सरकार का आखिरी पूर्ण बजट है ऐसे में सरकार कम से कम एक से डेढ़ लाख रुपए की कर छूट दे सकती है।

    - इसके साथ ही सरकार टैक्स स्लैब में भी बदलाव कर सकती है। 10 लाख रु. तक आय वाली सीमा के लिए 10 फीसदी और 20 लाख रु. से अधिक आय वालों को 30 फीसदी स्लैब में लाया जाना चाहिए। सरकार के पास ऐसा करने की गुंजाइश भी है।

    नोटबंदी के बाद से तेजी से बढ़े आयकर बेस

    - फिक्की के इकोनॉमिस्ट संतोष तिवारी ने याद दिलाया कि डायरेक्ट कोड टैक्स 2009 में सिफारिश की गई थी कि 30% इनकम टैक्स के स्लॉट को 25 लाख रुपए से ऊपर की आमदनी वालों को लिए तय किया जाए। मौजूदा ढांचे में 10 लाख से अधिक की आमदनी पर 30% इनकम टैक्स लगता है। सरकार के पास इस सुझाव पर अमल करने का सुनहरा मौका है।
    - जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार इनडायरेक्ट टैक्सेस में सिर्फ कस्टम ड्यूटी में ही बदलाव कर सकती है। अगर सरकार यह बदलाव करती है तो पेट्रोलियम पदार्थों और तंबाकू प्रोडक्ट्स की कीमत में फर्क पड़ सकता है।

    - सरकार इस समय कोयले के इम्पोर्ट पर 5% कस्टम ड्यूटी लगा रही है। बिजनेस ऑर्गनाइजेशंस की मांग है कि इसे घटाकर 2% कर दिया जाए। ऐसा करने से देश में बिजली की दरें कम हो जाएंगी। हालांकि क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी इससे अलग राय रखते हैं।

    - उनके मुताबिक जीएसटी का टैक्स कलेक्शन घट रहा है। जीडीपी विकास दर भी लगातार दबाव में बनी हुई है। ऐसे में जब तक जीएसटी के बेहतर और स्थिर परिणाम सामने नहीं आने लगते सरकार के लिए अपना वादा लागू करना कठिन होगा।

    - इस सवाल पर कि अपने अाखिरी बजट में सरकार अपने प्रिय मतदाता के लिए कुछ तो करेगी ही? जोशी कहते हैं, सरकार इनकम टैक्सपेयर्स के लिए इस तरह की घोषणा कर सकती हैं जो सुनने में तो अच्छी लगें, लेकिन बुनियादी तौर पर बहुत असर न डालें।

    - अगर देश के इनकम टैक्स पेयर्स की स्थिति पर नजर डालेंं तो संसद में इस साल 4 अगस्त को पेश आंकड़ों के मुताबिक 2016-17 में देश का इनकम टैक्स बेस 8.26 करोड़ आयकर दाताओं तक पहुंच गया है, जो बीते फाइनेंशियल ईयर से 80 लाख अधिक है।

    नोटबंदी के बाद इनकम टैक्स बेस बढ़ा

    - नोटबंदी के बाद के हालात पर नजर डालें तो 9 नवंबर 2016 से 31 मार्च 2017 तक 1.96 करोड़ लोगों ने टैक्स रिटर्न दाखिल किया, जबकि इससे पिछले फाइनेंशियल ईयर में इसी अवधि में 1.63 करोड़ लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया।

    - यानी नोटबंदी के बाद से इनकम टैक्स बेस तेजी से बढ़ रहा है। तो क्या बढ़े हुए इनकम टैक्स पेयर्स आयकर स्लैब घटाने की राह आसान नहीं बना देंगे? इस सवाल पर टैक्स स्पैनर फाउंडर सुधीर कौशिक कहते हैं, अगर अमेरिका और ब्रिटेन से तुलना करें तो भारत में आयकर की दरें पहले ही काफी कम हैं। लेकिन अगर भारत सरकार को अपना आयकर बेस तेजी से बढ़ाना है तो इस बजट में मिडल क्लास के लिए कुछ बड़ा करना होगा।

    - उन्होंने कहा कि मौजूदा आर्थिक हालात में सरकार चाहे तो 10 लाख तक की आय पर 10 फीसदी और 20 लाख तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स लगा सकती है।

    - 5 लाख तक की इनकम को टैक्स फ्री करने का फैसला अगर सरकार करती है तो इससे शहरी वोटर में मोदी की इमेज और मजबूत होगी। लोगों को यह भी लगेगा कि नोटबंदी का जो दर्द उन्होंने झेला अब उसके नतीजे आने लगे हैं।

    - कॉर्पोरेट टैक्स के सवाल पर कौशिक कहते हैं, अगर सरकार अपना वादा पूरा करती है तो इससे उद्योग क्षेत्र की हौसलाअफजाई होगी। जो एक तरफ जीडीपी और दूसरी तरफ नौकरियां बढ़ाएगा।

    मोदी सरकार के लिए जीडीपी से बड़ी है नौकरी पैदा करने की चुनौती

    - दरअसल मोदी सरकार के लिए जीडीपी से बड़ी चुनौती नौकरी पैदा नहीं होने की है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुजरात चुनाव अभियान में बराबर यह मुद्दा उठाते रहे कि चीन की तुलना में भारत में रोजगार पैदा करने की दर बहुत ही धीमी है। वैसे भी सरकार ने एमएसएमई के लिए तो 25 फीसदी की दर पहले ही तय कर दी है।

    - सरकार के लिए यह करना इसलिए बहुत कठिन नहीं होगा, क्योंकि उसका जीसटी कलेक्शन भले ही घट रहा हो लेकिन डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में सरकार अच्छा प्रदर्शन कर रही है। चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली दो तिमाही पर नजर डालें तो सितंबर 2017 तक भारत सरकार का डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 3.86 लाख करोड़ रुपए रहा, जो पिछले वित्तीय वर्ष की इसी अवधि से 15.8 फीसदी अधिक रहा।

    - यह चालू फाइनेंसियल ईयर के लिए अनुमानित डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन का 39.4 फीसदी है। इसी तरह सितंबर 2017 तक सरकार का एडवांस टैक्स कलेक्शन 1.77 लाख करोड़ रुपए रहा जो पिछले फाइनेंशियल ईयर की इसी अवधि से 11.5 फीसदी ज्यादा है।

    - एडवांस टैक्स के इन आंकड़ों को कॉर्पोरेट इनकम टैक्स और व्यक्तिगत इनकम टैक्स की नजर से देंखें तो कॉर्पोरेट टैक्स कलेक्शन में 8.1 फीसदी और व्यक्तिगत इनकम टैक्स कलेक्शन में 30.1 फीसदी का इजाफा फाइनेंसियल ईयर की पहली दो तिमाही में दर्ज किया गया।

  • अमेरिका में टैक्स छूट: अब यहां  काॅर्पोरेट, इनकमटैक्स में राहत संभव
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    जेटली ने अपने पहले बजट में कॉर्पोरेट टैक्स की दर 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की बात कही थी। (फाइल)
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