Hindi News »Union Territory »New Delhi »News» SC First Time Activated Monitoring Committee Since 2012

‘दिल्ली में देखें कहां हो रहा अवैध निर्माण, कार्रवाई करें’

दिल्ली में पांच साल बाद अवैध निर्माण पर सीलिंग का खतरा मंडरा गया है।

पवन कुमार | Last Modified - Dec 16, 2017, 04:46 AM IST

‘दिल्ली में देखें कहां हो रहा अवैध निर्माण, कार्रवाई करें’

नई दिल्ली. दिल्ली में पांच साल बाद अवैध निर्माण पर सीलिंग का खतरा मंडरा गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केजे राव की अध्यक्षता वाली मॉनिटरिंग कमेटी को 2012 के बाद पहली बार फिर सक्रिय होने के आदेश दिए। यह कमेटी अवैध निर्माण और आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक इस्तेमाल की रोकथाम के लिए साल 2004 में गठित की गई थी। कोर्ट ने कमेटी को कहा है कि वह दिल्ली में देखे कि कहां पर अवैध निर्माण हो रहा है और कहां पर आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से फैक्ट्रियों या औद्योगिक इकाइयों का संचालन हो रहा है? कमेटी उन सभी पर उचित कार्रवाई करे।

- जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने पर्यावरण एक्टिविस्ट एमसी मेहता की पिटिशन पर यह फैसला सुनाया।

कोर्ट ने दिल्ली और केंद्र सरकार दोनों को कानून व्यवस्था सही ढंग से लागू करने में नाकाम रहने पर फटकार भी लगाई।

- जस्टिस लोकुर ने कहा कि दिल्ली में सही प्रशासकीय व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है। इससे हमारी पीिढ़यों पर असर पड़ रहा है।

- इससे ज्यादा विनाशकारी कुछ हो ही नहीं सकता। जस्टिस लोकुर ने कहा कि यह कोर्ट लंबे समय से दिल्ली में अवैध निर्माण और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों पर नजर रखती आई है और कोर्ट ने आदेश भी जारी किए हैं। जिससे दिल्ली के शहरी जीवन में सुधार और स्वच्छता लाई जा सके, परंतु इससे कुछ फर्क नहीं पड़ा और जो पड़ा भी तो के बराबर। हमारे सामने इस समस्या को लेकर बहुत सी अर्जियां आईं और कोर्ट के पास ऐसी तारीखों की पूरी क्रोनोलॉजी है, जिसमें उन्होंने विभिन्न आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए केस की फाइल को दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया है।

संपत्ति डी-सील भी करा सकेंगे, पर आदेश सभी के लिए नहीं

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मॉनिटरिंग कमेटी लोगों की संपत्ति डी-सील करने का निर्णय ले सकती है।

- अगर कमेटी किसी की संपत्ति को डी-सील नहीं करती है तो संबंधित व्यक्ति कोर्ट में याचिका दायर कर सकता है।

- इतना ही नहीं अगर संपत्ति के डी-सील होने के बाद उक्त व्यक्ति दोबारा रिहायशी क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधि शुरू करता है तो उस पर कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई की जाएगी।

राहत सिर्फ इन्हें
वे जो पूर्व में एफिडेविट दे चुके हैं कि वे मकान में बिजनेस एक्टिविटीज नहीं करेंगे। इसमें भी छोटे लेवल की बिजनेस एक्टिविटीज जैसे दुकान, पार्लर इत्यादि ही शामिल होंगी।

...आैर इन्हें नहीं

जिनके रिहायशी क्षेत्र में बने मकानों में फैक्ट्री या औद्योगिक इकाइयों के पाए जाने पर उन्हें सील कर दिया गया था।

13 साल पहले आदेश, पांच साल पहले राहत
- सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई 2004 के अपने आदेशों के तहत दिल्ली में अवैध निर्माण और रिहायशी इलाकों में बिजनेस एक्टिविटीज खत्म करने के लिए के. जे. राव की अध्यक्षता वाली मॉनीटरिंग कमेटी गठित की थी।

- इसके बाद साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए कमेटी से कहा था कि वह दिल्ली में कोई संपत्ति सील नहीं करें, क्योंकि उसे उम्मीद थी कि प्राधिकार अपना दायित्व निभाएंगे।

सरकारों को फटकार...
दिल्ली व केंद्र ब्लेमगेम में उलझे हैं, कीमत चुका रहे दिल्लीवासी

- दिल्ली में मास्टर प्लान लागू नहीं किया जा सका। इस मामले में केंद्र सरकार कहती है कि वह दिल्ली का मास्टर प्लान लागू कराने वाली अधिकृत संस्था नहीं है। वहीं, दिल्ली सरकार ने भी अपनी असफलता की जिम्मेदारी उठाने से इंकार कर दिया है।

- दिल्ली सरकार व केंद्र सरकार एक दूसरे पर ब्लेमगेम खेल रहे हैं। इसी व्यवस्था के अभाव में दिल्ली वालों को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।

साइट पर मिलेगी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सब जानकारियों को लेकर मॉनीटरिंग कमेटी एक वेबसाइट बनाए और सभी संबंधित जानकारियां उस पर डाली जाएं। जिससे दिल्ली के सभी लोग उन जानकारियों से परिचित हो सकें।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Delhi News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: delhi mein dekhen khaan ho raha avaidh nirmaan, karrvaaee karen
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×