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दिल्ली हादसा : सभी मरने वाले एक ही गली के, जो बचकर आया उसने सुनाई पूरी कहानी

दिल्ली के बवाना फैक्ट्री में जान गंवाने वाले सभी लोग एक ही गली के हैं।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 21, 2018, 08:15 AM IST

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    हादसे में कुल 17 लोगों की मौत हो गई जिसमें 10 महिलाएं शामिल है।

    नई दिल्ली. दिल्ली के बवाना फैक्ट्री में जान गंवाने वाले सभी लोग एक ही गली के हैं। हादसे से बचकर आए रूपप्रकाश ने बताया कि फैक्ट्री में तीन जगहों पर काम किया जाता था। कुछ लोग फर्स्ट फ्लोर पर थे, जबकि कुछ बेसेमेंट और कुछ ग्राउंड फ्लोर पर। रूपप्रकाश के मुताबिक आग फैक्ट्री के मेन गेट पर रखे समान लगी थी, जो फैक्ट्री के बाकि हिस्से में फैल गई। मेन गेट पर पर आग लगने के चलते कोई बाहर नहीं आ पाया और जो जहां था, मौत ने उसे वहीं अपने अगोश में ले लिया।पत्नी की मौत के बाद बेसुध हुआ पति

    - मेट्रो विहार इलाके में सन्नाटा पसरा हुआ है। यह इलाका बवाना की जिस फैक्ट्री में आग लगी है, वहां से 5 किलोमीटर दूर है।

    - इस फैक्ट्री में मरने वाले अधिकतर लोग मेट्रो विहार इलाके के ही हैं। यहां रहने वाले लोग मूलत: उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं।

    - अपने परिवारवाले को ढूंढ़ने पहुंचे लोगों की माने तो उन्हें यहां रंग बनाने का काम बताकर लाया गया था। लेकिन यहां पटाखों की पैकिंग का काम होता था। ऐसे में यहां काम करने वाली अधिकतर महिलाएं थीं और सभी एक साथ काम के लिए आती थीं।

    - फैक्ट्री में हादसे की सूचना के बाद बाबूराम अपनी 23 साल की बहन सोनी को ढूंढ़ने पहले फैक्ट्री और फिर हॉस्पिटल पहुंचे। प्रशासन न तो उनके परिवारवाले के बारे में कुछ बता रहा है और न ही हॉस्पिटल में उनसे मिलने दिया जा रहा है।

    - रोते हुए बाबूराम ने बताया कि उसकी बहन सोनी पांच माह की प्रेग्नेंट है और उसके पति संतोष 17 जनवरी को ही उसे उनके पास छोड़ कर अपने घर गए थे। फैक्ट्री में मरने वालों में शामिल सुषमा की मौत से उनके पति विश्वनाथ बेसुध हैं।

    - उन्होंने बताया कि उसके छोटे-छोटे 6 बच्चे हैं। वह खुद बीमार रहते हैं। वह भी मजदूरी करता है। लेकिन उसकी मजदूरी से मिलने वाला अधिकतर पैसा उसके इलाज में ही खत्म हो जाता है। सुषमा की कमाई से ही घर चलता था। लेकिन अब उसकी मौत हो गई। ऐसे में विश्वनाथ को चिंता सता रही है कि उसके छह बच्चे कैसे पलेंगे।

    धमाके हो रहे थे और कुछ लोग कूद गए
    - 10 साल के शिवम ने भास्कर को बताया कि शाम को मैं घर के बाहर खेल रहा था। तभी धमाके की बहुत तेज आवाज सुनी। मैंने देखा की फैक्ट्री में पटाखे फूट रहे थे। वहां से लोगों के चीखने-चिल्लाने की आवाज आने लगी।

    -मैंने यह बात अपने घर पर बताई। मम्मी ने एक महिला की फैक्ट्री में कुछ दिन पहले ही नौकरी लगवाई थी। मेरी बात सुनकर घर के सभी लोग फैक्ट्री के पास पहुंचे। वहां हमने देखा की फैक्ट्री में आग लग चुकी थी।

    - जान बचाने के लिए कुछ लोग ऊपर से कूद गए। इसमें एक महिला भी शामिल थी। फैक्ट्री में काम करने वाले बाकी लोग बाहर ही नहीं निकल पाए।

    - मम्मी ने जिस महिला की नौकरी लगवाई थी, उसका भी पता नहीं चला। फोन लगाने के आधा घंटा बाद फायर ब्रिगेड की गाड़ी वहां पहुंची।’

    मृतकों को पांच लाख रुपए का मुआवजा

    मुख्यमंत्री केजरीवाल ने हादसे में मृतकों को पांच लाख रुपए मुआवजा देने की बात कही। वहीं घायलों को एक-एक लाख रुपया दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि हादसे की जांच के आदेश दिए गए हैं। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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    इस फैक्ट्री में मरने वाले अधिकतर लोग मेट्रो विहार इलाके के ही हैं। यहां रहने वाले लोग मूलत: उत्तर प्रदेश और बिहार से हैं।
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    हादसे में मारे गए लोग एक ही गली के रहने वाले हैं।
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    बवाना के सेक्टर पांच, एफ-83 के दो मंजिला गोदाम में आग दोपहर बाद करीब 3.30 बजे लगी थी।
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    फायर ब्रिगेड और पुलिस को इसकी सूचना शाम 6.20 बजे ही मिली।
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    दमकल की 6 गाड़ियाें ने करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
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    रात 11 बजे तक शव ढूंढने का काम जारी था।
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