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हॉकिंग ने कहा था ब्रह्माण्ड को समझना आसान, पर महिला खुद ही एक रहस्य है

हॉकिंग ने बच्चों को विज्ञान समझाने के लिए उनके शब्दों में लिखी बुक

Bhaskar News | Last Modified - Mar 15, 2018, 09:00 AM IST

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    दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग।

    लंदन.दुनिया के जाने-माने वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग नहीं रहे। 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया है। स्टीफन हॉकिंग अपनी किताब के प्रमोशन के लिए 2001 में भारत भी आए थे। कहा था कि भारतीय गणित और भौतिकी को काफी अच्छे से समझते हैं। उन्होंने रिलेटिविटी, ब्लैक होल और बिग बैंग थ्योरी को समझने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने काम से दुनियाभर में करोड़ों युवाओं को विज्ञान पढ़ने के लिए प्रेरित किया। हॉकिंग एक ऐसी बीमारी से पीड़ित थे, जिसके चलते उनके शरीर के कई हिस्सों को लकवा मार गया था। बावजूद इसके उन्होंने कभी हार नहीं मानी। विज्ञान के क्षेत्र में नई खोज जारी रखी। हॉकिंग ने शारीरिक अक्षमताओं को पीछे छोड़ते हुए यह साबित किया कि अगर इच्छाशक्ति हो तो इंसान कुछ भी कर सकता है। उन्होंने दो शादियां कीं। दोनों नाकाम रहीं। दूसरी पत्नी मेसन ने उन पर प्रताड़ना के आरोप लगाए। पुलिस केस किया। बाद में पुलिस ने हॉकिंग को बरी कर दिया। इसके कुछ साल बाद हॉकिंग ने कहा कि- ब्रह्मांड को समझना आसान है, लेकिन महिलाएं तो खुद एक रहस्य हैं।

    हॉकिंग की बुक 237 हफ्ते बेस्टसेलर रही

    - हॉकिंग ने विज्ञान से जुड़ी 15 किताबें लिखीं। 1988 में आई ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ सबसे मशहूर रही।

    - ये किताब 237 हफ्ते तक बेस्टसेलर बनी रही। इस किताब की 1 करोड़ प्रतियां बिकीं, जो एक रिकॉर्ड है।
    - कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में गैलीलियो, न्यूृटन और आइंस्टीन गणित के प्रोफेसर थे। उसी यूनिवर्सिटी में हॉकिंग भी इसी पद पर नियुक्त हुए।

    मर्लिन मुनरो से मिलने का सपना था

    स्टीफन हॉकिंग का एक सपना था- टाइम मशीन बनाना और इसके जरिए समय में पीछे जाकर हॉलीवुड की खूबसूरत अदाकारा मर्लिन मुनरो और महान वैज्ञानिक न्यूटन से मिलना।

    भगवान को नकारा, विरोध झेला
    हॉकिंग ने अपनी किताब ‘द ग्रैंड डिजाइन’ में भगवान के अस्तित्व को नकारा। कहा कि स्वर्ग की कहानी अंधेरे के डर से बचाने के लिए बनाई गई। इस वजह से उन्हें धार्मिक नेताओं का विरोध भी झेलना पड़ा।

    चेतावनी: दुनिया के 200 साल ही बचे
    हॉकिंग ने कहा था, "इंसानों को अपना वजूद बचाने के लिए अगले 100 सालों में वो तैयारी पूरी करनी चाहिए, जिससे पृथ्वी को छोड़ा जा सके। धरती आग का गोला बन रही है और ये 200 साल में खत्म हो जाएगी।"

    डॉक्टर लाइफ सपोर्ट हटा रहे थे, पत्नी नहीं मानी

    - जेन ने अपने और हॉकिंग के संबंधों पर लिखा था कि सर्न ट्रिप के दौरान इंफेक्शन होने की वजह से हॉकिंग को हॉस्पिटल ले जाना पड़ा। वो इतने बीमार हो गए थे कि डॉक्टरों ने कहा कि हमें लाइफ सपोर्ट सिस्टम से इन्हें हटाना पड़ेगा। ऐसा करने से जेन ने मना कर दिया और वो हॉकिंग को कैम्ब्रिज हॉस्पिटल ले आईं। यहां ऑपरेशन ने हॉकिंग की जान बचा ली। लेकिन कुछ समय बाद हॉकिंग बच्चों की तरह जिद्दी हो गए। पति और पत्नी का रिश्ता मालिक और गुलाम जैसा हो गया था।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें: हॉकिंग की जिंदगी के 4 किस्से...

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    भरोसा टीचर से कहा कि फर्स्ट ग्रेड देंगे, तो कैम्ब्रिज जाऊंगा

    टीचर से कहा कि फर्स्ट ग्रेड देंगे तो कैम्ब्रिज जाऊंगा

    ग्रेजुएशन में हॉकिंग के टीचर ये तय नहीं कर पा रहे थे कि उन्हें फर्स्ट ग्रेड दें या सेकंड। वाइवा के टीचर से हॉकिंग ने कहा कि अगर आप मुझे फर्स्ट क्लास पास करेंगे तो मैं कैम्ब्रिज से पीएचडी करूंगा। इस पर टीचर ने उन्हें फर्स्ट क्लास डिग्री दी और आगे की पढ़ाई उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और यहीं प्रोफेसर भी बने।

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    अडिग गाजा पट्‌टी पर कब्जे के विरोध में इजरायल नहीं गए

    गाजा पट्टी पर कब्जे के विरोध में इजरायल नहीं गए

    स्टीफन हॉकिंग कहते थे कि हमेशा अपने सिद्धांतों पर टिके रहो। उन्होंने वियतनाम युद्ध से लेकर गाजा पट्‌टी पर इजरायली कब्जे का भी खुले तौर पर विरोध किया। हॉकिंग ने फिलीस्तीनी पक्ष से सहानुभूति रखी और गाजा पर इजरायली कब्जे के विरोध में 2013 में एक सेमिनार के लिए इजरायल जाने से साफ मना भी कर दिया था।

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    संदेश रिसर्च में लिखा- घड़ी को वापस पीछे घुमाना असंभव

    रिसर्च में लिखा- वक्त को पीछे घुमाना असंभव

    हॉकिंग समय को बर्बाद करने से नफरत करते थे। उन्होंने समय पर अपनी रिसर्च पूरी की थी। उन्होंने अपनी ये रिसर्च इस टिप्पणी के साथ खत्म की कि घड़ी को वापस पीछे घुमाना असंभव है। संदेश साफ था कि हम पैसा बना सकते हैं लेकिन गया हुआ समय कभी वापस नहीं लौटता। इसलिए हमें बुद्धिमानी से इसका उपयोग करना चाहिए।

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    जज्बा कहते थे- मुझे मौत की आशंका ने जीना सिखा दिया

    कहते थे- मौत की आशंका ने जीना सिखा दिया

    स्टीफन हॉकिंग को दुनिया भर में तमाम पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया। पर नोबेल उनसे दूर ही रहा। हॉकिंग ने एक इंटरव्यू मेें कहा था, "मोटर न्यूरान बीमारी की चपेट में आने से पहले मैं जिंदगी से ऊब गया था। लेकिन मृत्यु की आशंका ने मुझे अहसास करा दिया कि जिंदगी तो वाकई जीने लायक है। मुझे अभी कुछ करना है।"

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