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13 Yr. में ग्रेनेड के धमाके में उड़ गये थे दोनों हाथ, अब कर रही है ये बड़ा काम

वह एक ऐसे हादसे से गुजर चुकी है,जिससे उभर पाना हर किसी के लिए आसान नहीं है।

Danik Bhaskar

Mar 08, 2018, 11:58 AM IST
मालविका अय्यर मालविका अय्यर

दिल्ली. डॉ. मालविका अय्यर एक इंटरनेशनल मोटिवेशनल स्पीकर, डिसेबल्ड के हक के लिए लड़ने वाली एक्टिविस्ट, सोशल वर्क में पीएचडी के साथ फैशन मॉडल के तौर पर जानी जाती हैं। वह एक ऐसे हादसे से गुजर चुकी है, जिससे उभर पाना हर किसी के लिए आसान नहीं है लेकिन मालविका ने उस हादसे को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद 8 मार्च को इंटरनेशनल वुमन्स डे के मौके पर उन्हें राष्ट्रपति भवन में 'नारी शक्ति' राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित करेंगे। मालविका ने Dainikbhaskar.com से बात की और अपनी अनटोल्ड स्टोरी को बयां किया।

ऐसे बीता था बचपन

- डॉ. मालविका (29) बताती है, “मेरा जन्म तमिलनाडू के कुम्बाकोनम में हुआ था। पिता बी. कृष्णन वाटर वर्क्स डिपार्टमेंट में इंजीनियर और मां हेमा कृष्णन हाउस वाइफ थी।
- घर में हम दो बहनें थी। मेरी बहन कादम्बरी अय्यर मुझसें बड़ी है। पिता गवर्नमेंट जॉब में थे। इसलिए उनका ट्रांसफर होता रहता था। पहले उनकी पोस्टिंग राजस्थान के बीकानेर शहर में थी। लेकिन बाद में उनका ट्रांसफर हो गया।

- मैं, मेरी बड़ी बहन और मां तीनों पापा के ट्रांसफर के बाद भी वहीं पर रूक गये। पापा छुट्टी में हम लोगों से मिलने के लिए बीच में आते रहते थे। हम दोनों बहनों का बचपन बीकानेर में काफी अच्छे से बीता था”।

मालविका इकोनामिक फोरम को एड्रेस करते हुए मालविका इकोनामिक फोरम को एड्रेस करते हुए

13 साल की उम्र में हादसे का शिकार

 

- “26 मई 2002 को मेरी एज 13 साल की थी। मैं तब 9th क्लास में पढ़ाई कर रही थी। उस दिन सन्डे था।  मम्मी-पापा सभी लोग  घर पर थे। कुछ मेहमान उनसे मिलने आए थे। पापा मेहमानों के साथ गेस्ट रूम में बैठे थे।

- मेरी बहन किचेन में चाय बना रही थी। उस दिन गर्मी काफी ज्यादा पड़ रही थी। इसलिए मां कूलर में पानी भरने गई हुई थीं। तभी मेरी नजर अपनी जींस की फटी जेब पर गई। मैंने सोचा, क्यों न इसे फेवीकॉल से चिपका दूं।

-ये सोचकर मैं गैराज में किसी भारी चीज की तलाश में चली गई, जिससे चिपकाने के बाद जींस पर भार रखा  जा सके। मेरे घर के पास ही सरकारी गोला-बारूद डिपो था।

-मुझे नहीं पता था कि हाल में ही उस डिपो में आग लगी है, जिससे डिपो में रखे कई विस्फोटक पदार्थ आसपास के इलाके में बिखर गए हैं। गैराज में भारी वस्तु की तलाश में मैं एक हैण्ड ग्रेनेड बम उठा लाई।

- उसका प्रयोग करने से पहले उसके बारे में मैं कुछ समझ पाती कि ग्रेनेड मेरे हाथों में ही फट गया। एक पल में ही मेरी आंखों के सामने अंधेरा छा गया।  मुझे हॉस्पिटल पहुंचाया गया।

 

मालविका अय्यर अपने फ्रेंड के साथ मालविका अय्यर अपने फ्रेंड के साथ

ऐसे दी चुनौतियों को मात

 

- “ हास्पिटल में करीब 2 साल तक मेरा ट्रीटमेंट चला। मेरी जान तो बच गई, पर उस हादसे की वजह से मैंने अपने दोनों हाथ गंवा दिए। साथ ही दोनों पैर भी बुरी तरह से डैमेज हो गए। मैं ठीक से चल भी नहीं सकती थी।

- लेकिन इसके बाद भी मैंने जिन्दगी से हार नहीं मानी। मैंने चेन्नई के एक स्कूल से प्राइवेट कैंडिडेट्स के तौर पर सेकेंडरी स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट एग्जाम में पार्टिसिपेट किया। मुझें एग्जाम में एक असिस्टेंट प्रोवाइड कराया गया।

- मैंने उस एग्जाम में 500 में से 483 मार्क्स हासिल कर स्टेट में टॉप किया। तब मुझें राष्ट्रपति भवन की तरफ से एक्स प्रेसिडेंट डॉ. अब्दुल कलाम आजाद से मिलने के लिए बुलाया गया।

- उसके बाद भी मैंने आगे की पढाई जारी रखी। मैंने समाज से वंचित लोगों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए 2012 में मद्रास स्कूल ऑफ़ सोशल वर्क से सोशल वर्क सब्जेक्ट में एमफिल की पढ़ाई पूरी की”।

 

रैंप वॉक करते हुए मालविका अय्यर रैंप वॉक करते हुए मालविका अय्यर

राष्ट्रपति के हाथों मिलेगा ये अवार्ड

 

- लोगों को जब मालविका के कार्यों के बारे में पता चला तब उन्हें 2013 में चेन्नई में आयोजित ‘TEDxYOUTH’ कांफ्रेंस में मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर अपनी बात रखने के बुलाया गया।

- मालविका ने उसके बाद से लाइफ में कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्हें न्यूयार्क, नार्वे, इंडोनेशिया, कोरिया समेत कई अन्य देशों में अलग –अलग मौकों पर अपनी बात रखने के लिए इनवाईट किया गया।

- वहीं अक्टूबर 2017 में दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के सम्मिट में उन्हें को -चेयर पर्सन के तौर पर भी अपनी बात रखने के बुलाया गया था।

- आज वह आर्टिफिशियल हैण्ड से काम करती है। वह अपना ड्रेस करने से लेकर किचन में खाना बनाने का भी काम अकेले ही करती है। मालविका समाज सेवा के कार्यों से भी जुड़ी हुई है और खाली टाइम में गरीब बच्चों को फ्री में एजुकेट करती है।

- समाज में उनके योगदान को देखते हुए इस बार 'नारी शक्ति' राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए उनका सेलेक्शन हुआ है। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद उन्हें राष्ट्रपति भवन में इस बार इंटरनेशनल वुमन्स डे के मौके पर सम्मानित करेंगे।

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