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3 दिन बाद आई थी फिरौती की कॉल, 12वें दिन डेढ़ घंटे में मासूम विहान आजाद

Bhaskar News | Last Modified - Feb 07, 2018, 09:09 AM IST

विहान के अपहरण से लेकर सकुशल घर वापसी तक की पूरी कहानी...
  • 3 दिन बाद आई थी फिरौती की कॉल, 12वें दिन डेढ़ घंटे में मासूम विहान आजाद
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    पहला अटैम्प्ट : स्कूल वैन के आसपास भीड़ देख लौट गए बाइक पर आए बदमाश

    नई दिल्ली. दिल्ली में 26 जनवरी की कड़ी सुरक्षा के बीच 25 जनवरी को सुबह साढ़े सात बजे जीटीबी एन्क्लेव में एक स्कूल वैन बच्चे को लेने के लिए खड़ी थी। तभी दो बाइक सवार वैन के सामने रुकते हैं और ड्राइवर को गोली मारते हैं। फिर विहान काे आवाज लगाते हैं। अपना नाम सुनकर छोटी बहन के साथ बैठा विहान बाहर आ जाता है। बाइक सवार उसे उठाकर भाग जाते हैं। ये खबर फैलते ही पुलिस की सुरक्षा पर सवाल खड़े होने लगते हैं। आनन-फानन में अिधकारी कई टीमें बनाकर बच्चे की तलाश में जुट जाते हैं।


    72 घंटे बाद क्राइम ब्रांच को सौंपी जाती है जांच
    तीन दिन में भी सफलता नहीं मिलने पर मामला क्राइम ब्रांच को सौंप दिया जाता है। यहां डीसीपी रामनाइक के नेतृत्व में 12 लोगों की टीम बनाई जाती है, जो सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल ट्रैक और मुखबिरों के जरिये बदमाशों की तलाश में जुट जाती है।


    फिर 60 लाख की फिरौती के लिए आता है फोन
    इसी बीच 28 जनवरी को आरोपियों का 60 लाख की फिरौती के लिए फोन आता है। इस दौरान पुलिस भी मौके पर होती है। बदमाश वाट‌्सएप कॉल कर बच्चे की बात भी करवाते हैं। इसमें एक आरोपी की हल्की झलक नजर आती है, लेकिन पता नहीं चलता कि है कौन।


    तीन लाख नंबर खंगालने पर मिलता है संदिग्ध नंबर
    इस बीच पुलिस 35 टावरों से तीन लाख नंबर खंगाल लेती है, जिसमें से एक संदिग्ध नंबर मिलता है, जो बच्चे के घर के आसपास भी एक्टिव मिलता है। इससे पुलिस का शक गहरा जाता है, तभी पुलिस को एक सीसीटीवी फुटेज में दो बदमाश बाइक पर बच्चे को ले जाते नजर आए। इसमें से एक बदमाश वही नजर आता है तो वाट्सएप कॉल में नजर आया था। संदिग्ध नंबर और बच्चे के घर के आसपास एक्टिव नंबर इसी युवक का निकलता है।


    नंबर की मदद से नितिन को ट्रेस करती है पुलिस
    इस पर पुलिस बदमाश नितिन शर्मा को ट्रेस कर लेती है। तभी पुलिस को कॉल रिकॉर्डिंग के दौरान पता चलता है कि नितिन शर्मा एक शादी में सोमवार रात दिल्ली की ओर आ रहा है। पुलिस कार के पीछे लग जाती है। 11.30 बजे सीमापुरी में कम्यूनिटी ब्लॉक के पास वह पकड़ा जाता है।


    पूछताछ में अपहरण की बात कबूलता है नितिन
    नितिन ने पंकज और रवि के साथ अपहरण की बात कबूली। पुलिस को बताया बच्चा जिंदा है, जिसे फ्लैट नंबर बी-505 इबोनी शालीमार सिटी, साहिबाबाद में रखा है।


    बच्चे को छुड़ाने के लिए रात 1 बजे पहुंची पुलिस
    डीसीपी डॉ. जी. रामगोपाल नाइक के नेतृत्व में 16 सदस्यीय टीम नितिन के साथ पांचवीं मंजिल स्थित फ्लैट पर पहुंची, तब रात के करीब एक बजे थे। फ्लैट के दो दरवाजे हैं, अंदर की लकड़ी का और बाहर लोहे की जाली वाला। नितिन ने कोड वर्ड में तीन बार दरवाजा खटखटाया। एक बदमाश ने लकड़ी का दरवाजा खोला। इंस्पेक्टर विनय त्यागी ने बच्चा पुलिस के हवाले करने को कहा। इंस्पेक्टर के साथ फ्रंट में कमांडो कुलदीप था। पीछे छह अन्य पुलिसकर्मी एके-47 के साथ पोजिशन में थे।


    बदमाश बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकी देते हैं
    बदमाश ने पुलिस को धमकाते हुए वहां से चले जाने की बात कही, ऐसा नहीं करने पर बच्चे को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी। इस बीच एक बदमाश ने बंद दरवाजे से ही फायरिंग कर दी। एक गोली त्यागी और दूसरी कुलदीप को लगी, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। एक गोली रवि की छाती पर लगी। पंकज कमरे की ओर भागने लगा, लेकिन एक गोली उसके पैर पर लग गई। बदमाशों ने पांच राउंड फायरिंग की।गोली चलने से लोहे की जाली ढीली पड़ गई, जिसके बाद टीम ने उसे खींच कर मोड़ दिया और अंदर हाथ डालकर दरवाजा खोल दिया।

    डीसीपी ने देखा बच्चा बेड के पास दुबका बैठा था
    डीसीपी बच्चे को ढूंढते हुए एक कमरे में गए तो बच्चा बेड के पास दुबका बैठा था। बच्चे को लेकर वे जैसे ही बाहर निकले, सबके चेहरे खिल गए। फिर बच्चा मां-बाप को दे दिया गया।

    फायरिंग की अावाज सुन बेडरूम में छिप गया था विहान, छह माह पहले किराए पर लिया था फ्लैट

    जिस फ्लैट में बच्चे को रखा था, उसे छह माह पहले किराए पर लिया गया था। फ्लैट उनकी मौजमस्ती का अड्‌डा था। यहां वे गर्लफ्रेंड को लेकर आते थे। वारदात के बाद बदमाश सीमापुरी बार्डर से होते हुए साहिबाबाद के इस फ्लैट में सीधे पहुंचे थे। फ्लैट का मकान मालिक मयूर विहार इलाके का रहने वाले हैं। उन्हें किराया भी समय पर नहीं दे रहे थे।

    एक सोता तो दाे पहरा देते थे
    फ्लैट में रहने के दौरान रात को एक बदमाश बच्चे के साथ सोता था, जबकि दो बाहर रूम में जागकर हथियार के साथ अलर्ट रहते थे। वे बाहर भी बेहद कम निकलते।

    नहीं पता था कि किडनैपर हैं : मकान मालकिन

    मकान मालकिन सुशीला गुप्ता ने बताया कि उन्हें इस बात की जरा भी भनक नहीं थी कि आरोपी किडनैपर हैं। पटपड़गंज स्थित तरंग अपार्टमेंट में रहने वाली सुशीला बताती हैं कि पुलिस वेरीफिकेशन भी कराया गया था।

    बदमाशों ने जो दो वीडियो भेजे, उसमें ये बोला विहान
    - पहला, डैडी आप मुझे लेने आ जाओ, मुझे आपकी बहुत याद आ रही है।
    - दूसरा, आई लव यू पापा।

    बच्चे के रूम में पहुंचने के बाद विहान से बोले डीसीपी नाइक

    - बेटा, मैं आपका चाचा हूं और पुलिस से हूं। आपको डैडी के पास ले जाने के लिए यहां आया हूं। यह कहते ही डीसीपी ने डरे और घबराए हुए मासूम को गोद में उठा लिया। विहान उनसे लिपट गया।

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    दूसरा अटैम्प्ट: जब तक बदमाश स्कूल वैन तक पहुंचे वह जा चुकी थी
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    तीसरा अटैम्प्ट : बदमाश वैन की ओर बढ़े तभी कुछ लोग बीच में आ गए
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    चौथे अटैम्प्ट में ; स्कूल वैन के एक स्टॉप पर पहुंचे, लेकिन वैन निकल गई
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    शूटआउट एट शालीमार: पांचवीं फ्लोर जहां विहान के रोने की आवाज बाहर न आए इसलिए अंदर के कमरे में कैद रखा

    मोबाइल टावर से ट्रेस हुआ नितिन, कोड वर्ड में बात करता था


    नितिन बहुत होशियारी से काम कर रहा था, लेकिन एक गलती कर बैठा। पुलिस को एक ऐसा नंबर मिला जो सीधे नितिन से जुड़ रहा था।
    जांच के दौरान पुलिस को एक मोबाइल नंबर ऐसा मिला जिसकी कड़ियां जुड़ते हुए नितिन शर्मा तक पहुंच गईं। फिरौती की कॉल के लिए नितिन मोबाइल के बजाए अन्य नंबरों का इस्तेमाल करता था। इस दौरान वह पुलिस से बचने के लिए अपना वास्तविक मोबाइल स्विच ऑफ कर लेता था। लेकिन इसी दौरान तीन से चार बार वह अपना मोबाइल स्विच ऑफ करना भूल गया। इस बात का सुराग उस वक्त मिला जब पुलिस ने डम्प डाटा में तीन से चार लोकेशन पर एक नंबर कॉमन मिला। इसके बाद पुलिस ने उस नंबर को सर्विलांस पर लगाया।

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    मां और पिता के साथ विहान।

    पुलिस ने कॉल को रिकॉर्ड करना किया शुरू
    पुलिस ने नितिन शर्मा के पर्सनल नंबर पर आने वाली कॉल को रिकॉर्ड करना शुरू किया। इस दौरान जानकारी मिली कि कुछ बात वह कोड वर्ड में बात करता है। इसी मोबाइल नंबर पर पुलिस का शक गहराता गया। इस बीच सोमवार शाम को ही पुलिस को अपने मुखबीर से नितिन के बारे में जानकारी मिली कि वह सीमापुरी बाॅर्डर के पास एक शादी में शामिल होने आने वाला है। पुलिस को उसकी स्विफ्ट कार का नंबर भी मिल गया। पहले से ही नितिन का मोबाइल सर्विलांस पर लगा था। जैसे ही वह सीमापुरी इलाके में आया तो पुलिस ने मोबाइल से लोकेशन लेकर उसका पीछा करना शुरू कर दिया। मुखबीर और टेक्निकल सर्विलांस से इसकी वारदात में शामिल होने की बात भी पुख्ता हो गई।

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    मुस्कराहट...मंगलवार रात 2.30 बजे मां की गोद में वापस पहुंचते ही विहान चहक उठा
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    शूटआउट के समय इस सहमकर कोने में दुबक गया था विहान
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    पंकज-रवि ने किया अगवा
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    किडनैपर्स को ट्रेस करने मेंे अफसरों की भूमिका... सारे ट्विस्ट एंड टर्न

    डीसीपी डॉ. जी. रामगोपाल नायक (क्राइम ब्रांच)
    (क्राइम ब्रांच) के नेतृत्व में 50 पुलिसकर्मियों की टीम बनाई गई। नाम दिया ऑपरेशन सी रिवर।
    यह रही भूमिका:हर टीम से लाइव कॉन्टैक्ट। शूटआउट तक मौके पर डटे रहे।

    एएसआई प्रमोद, रमेश कुमार, हवलदार बाबूराम
    शाहदरा जिला, उत्तर पूर्वी जिला, इहबास, मंडोली रोड के करीब 2500 कैमरों पर नजर बनाए हुई थी। जिनमें से करीब 250 सीसीटीवी फुटेज खंगाले।
    यह रही भूमिका:आखिर में जाकर जब सहिबाबाद बॉर्डर पर लगे एक सीसीटीवी कैमरे में बदमाश बाइक पर बच्चे के साथ दिखे तो इस फुटेज से नितिन शर्मा की पहचान हुई।

    डीसीपी क्राइम जॉय टिर्की व एसीपी संदीप लांबा

    टीम ने टेक्निकल सर्विलांस, मुखबिरों मोबाइल ट्रैकर और सीसीटीवी फुटेज और 35 टॉवरों के तीन लाख नंबर खंगाले।
    यह रही भूमिका | 4 फरवरी को नितिन को ट्रेस किया। इसी के बाद पुलिस उस तक पहुंची।

    इंस्पेक्टर विनय त्यागी : जिसे जिला पुलिस ने जांच से हटाया, उसी ने दिलाई कामयाबी

    इनके साथ सबइंस्पेक्टर अर्जुन, हवा सिंह, दिनेश, सुशील, एएसआई राजकुमार, मो. सलीम हवलदार शशिकांत व श्यामलाल ने मुखबिरों का जाल बिछाया। पुलिस के करीब 125 मुखबिर लगे हुए थे।


    यह रही भूमिका: क्राइम ब्रांच के पास मामले की जांच बेशक 28 जनवरी से आई थी, लेकिन जिस दिन बच्चे का अपहरण हुआ था, उसी दिन विनय त्यागी त्यागी टीम जांच में लग गए थे। इस पर जिला पुलिस की टीमों ने नाराजगी जताई थी। उच्च अधिकारियों ने त्यागी को जांच से रोक दिया था। बाद में केस अपराध शाखा को सौंपा गया और त्यागी की टीम विहान को ढूंढ़ लाई।

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Web Title: Student Vihan Saved From Kidnappers On 12th Day Of Kidnapping
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