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सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी से सरकार से पूछा-क्या आदेश को कूड़ेदान में फेंक दिया गया?

सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के कल्याण के लिए बने कानून का पालन नहीं करने पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई।

Bhaskar News | Last Modified - Jan 18, 2018, 06:02 AM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी से सरकार से पूछा-क्या आदेश को कूड़ेदान में फेंक दिया गया?

    नई दिल्ली .सुप्रीम कोर्ट ने निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के कल्याण के लिए बने कानून का पालन नहीं करने पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने पूछा कि क्या इस बारे में उसके आदेश को भी सरकार ने कूड़ेदान में फेंक दिया है? केंद्र के रवैये पर सवाल उठाते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि यह स्पष्ट है कि बिल्डिंग एंड अदर कंस्ट्रक्शन वर्कर्स (रोजगार का नियमन और सेवा की शर्ताें) एक्ट 1996 को बिल्कुल भी लागू नहीं किया गया। इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई होगी।

    -जस्टिस मदन बी लोकुर और दीपक गुप्ता की बेंच ने एएसजी मनिंदर सिंह से कहा, “यह पूरी तरह असहाय स्थिति है। अगर सरकार गंभीर नहीं है तो हमें बताएं। आप जिनके लिए पैसा जमा कर रहे हैं, उन्हें नहीं दे रहे। आप एफिडेविट जमा कर रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट का इस संबंध में दिया गया आदेश निरर्थक है और आपने इसे कूड़ेदान में फेंक दिया, ताकि कोई नया आदेश पारित न हो।’

    - एएसजी ने जैसे ही माॅनिटिरिंग कमेटी के साथ हाल ही में हुई मीटिंग के बारे में बताया तो कोर्ट ने कहा, “सरकार का रवैया ऐसा लग रहा है कि वह मीटिंग के मिनट्स बता रही हो।’ एएसजी ने कहा कि चूंकि राज्यों के अपने विचार हैं, इसलिए कानून के क्रियान्वयन को सेंट्रलाइज किया जाना चाहिए।

    37 हजार करोड़ रु. से खरीदे लैपटॉप और वाशिंग मशीन

    - 1996 में बने कानून के बाद सरकार ने सेस के तौर पर 37 हजार करोड़ रुपए जमा किए। सीएजी हलफनामा देकर कोर्ट को बता चुके हैं कि यह फंड निर्माण कार्य में लगे वर्कर्स के कल्याण के लिए है, लेकिन इसका इस्तेमाल लैपटॉप और वाशिंग मशीन खरीदने में किया गया।

    पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास की सुविधा देने पर मांगी राय
    - सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति, पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास की सुविधा मुहैया कराने के मुद्दे पर केंद्र और राज्य सरकारों से अपनी राय स्पष्ट करने को कहा है। उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मुख्यमंत्री को सरकारी बंगला मुहैया कराने के लिए कानून में विधानसभा की ओर से किए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में राज्यों ओर केंद्र सरकार का पक्ष जानना जरूरी है। जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने इस मुद्दे पर एमिकस क्यूरी गोपाल सुब्रमण्यम के सुझाव पर यह बात कही। मामले की सुनवाई 13 मार्च को होगी।

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Web Title: Supreme Court Asked The Government With Displeasure
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