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दिल्ली से बाहर नहीं बनेगी सुप्रीम कोर्ट की बेंच

देश के दूर-दराज इलाके में रहने वाले लोगों को न्याय के लिए अंतिम कानूनी लड़ाई दिल्ली में ही लड़नी होगी।

Dainik Bhaskar

Jan 07, 2018, 05:50 AM IST
लॉ कमीशन ने चार कॉस्टीट्यूशनल बेच की मांग की थी। ( फाइल फोटो) लॉ कमीशन ने चार कॉस्टीट्यूशनल बेच की मांग की थी। ( फाइल फोटो)

नई दिल्ली. देश के दूर-दराज इलाके में रहने वाले लोगों को न्याय के लिए अंतिम कानूनी लड़ाई दिल्ली में ही लड़नी होगी। देश के चार महानगरों में सुप्रीम कोर्ट की अलग बेंच बनाने संबंधी लॉ कमीशन की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट ने तर्कसंगत नहीं पाया है। केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है।

कॉस्टीट्यूशन के आर्टिकल 130 के अनुसार दिल्ली में होगा सुप्रीम कोर्ट

- केंद्र सरकार के अनुसार लॉ कमीशन की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट का समर्थन नहीं मिला।

- कॉस्टीट्यूशन के आर्टिकल 130 के अनुसार सुप्रीम कोर्ट दिल्ली में होगा। अगर सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस उसे और किसी जगह पर स्थापित करना चाहें तो वह राष्ट्रपति की अनुमति से ऐसा कर सकते हैं।

- सुप्रीम कोर्ट की चार अलग बेंच कोर्ट आॅफ अपील के रूप में देश के चार बड़े महानगरों में बनाने करने की मांग कई दशकों से उठती रही है।

- कई राज्यों से खासतौर पर साउथ इंडिया के लोगों के लिए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचकर केस की पैरवी करना कठिन होता है। एक तो उन्हें काफी दूरी तय करनी पड़ती है।

- वकीलों की मोटी फीस, आने-जाने और दिल्ली में ठहरने और खाने-पीने का खर्च बहुत अधिक हो जाता है।

लाॅ कमीशन ने की थी सिफारिश
- लॉ कमीशन ने अपनी 229वीं रिपोर्ट में केंद्र सरकार से सुप्रीम कोर्ट की चार संवैधानिक पीठ देश के चार महानगरों मेंं बनाने की सिफारिश की थी।

- उत्तर भारत के लोगों के लिए दिल्ली, दक्षिण भारत के लोगों के लिए चेन्नई या हैदराबाद, पूर्वी भारत के लोगों के लिए कोलकाता में और पश्चिम भारत के लिए मुंबई में सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच की स्थापना की बात थी।

केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है। केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है।
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लॉ कमीशन ने चार कॉस्टीट्यूशनल बेच की मांग की थी। ( फाइल फोटो)लॉ कमीशन ने चार कॉस्टीट्यूशनल बेच की मांग की थी। ( फाइल फोटो)
केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है।केंद्रीय कानून राज्य मंत्री पीपी चौधरी ने संसद में एक सवाल के जवाब में यह जानकारी दी है।
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