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एक साल में एसआईपी में निवेश 45% बढ़ा, शेयर ने दिया 24% रिटर्न

म्यूचुअल फंड सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट फंड (एसआईपी) में वर्ष 2017-18 के दौरान हर महीने 8.86 लाख लोग (एकाउंट) जुड़ रहे हैं।

Dharmendra Singh Bhadauria| Last Modified - Dec 03, 2017, 07:21 AM IST

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डेमो फोटो।

मुंबई. बीते एक वर्ष में निवेशकों को सोना और रियल एस्टेट ने निराश किया है। लेकिन शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड ने खुश होने का मौका दिया है। शेयर बाजार लगातार ऊंचाइयों को छू रहा है। एक वर्ष में बाॅम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी-50 करीब 24 फीसदी बढ़े हैं। म्यूचुअल फंड में देखें तो लार्ज कैप फंड में औसतन 25 से 28.5 फीसदी से अधिक का रिटर्न एक वर्ष में दिया है। दूसरी ओर सोना और रियल एस्टेट लगभग फ्लैट रहे हैं। जबकि फिक्स डिपॉजिट, गवर्मेंट बॉन्ड, फिक्स्ड इनकम म्यूचुअल फंड्स में रिटर्न 0.65 से 1.5 फीसदी तक कम आया है। 

 

बीते एक वर्ष में एसआईपी में निवेश 45 फीसदी बढ़ा है। 

म्यूचुअल फंड सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट फंड (एसआईपी) में वर्ष 2017-18 के दौरान हर महीने 8.86 लाख लोग (एकाउंट) जुड़ रहे हैं। इनकी संख्या अक्टूबर तक 1.73 करोड़ हो गई है। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के मुताबिक बीते एक वर्ष में एसआईपी में निवेश 45 फीसदी बढ़ा है। यह नवंबर 2016 के 3,884 करोड़ रुपए से बढ़कर अक्टूबर 2017 में 5,621 करोड़ रुपए हो गया। वहीं अक्टूबर 2017 में पूरी म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री 21.79 लाख करोड़ रुपए की हो गई है। निवेश विशेषज्ञों के मुताबिक ब्याज दरों में कमी, सोना और रियल एस्टेट में रिटर्न न मिलने के कारण आम निवेशक शेयर और म्यूचुल फंड की ओर आकर्षित हो रहे हैं। 

 

बीते एक वर्ष में निवेश करने की परंपरा में बदलाव आया है। परंपरागत रूप से भारतीय निवेशक अपना पैसा सोना और रियल एस्टेट (फिजिकल एसेट्स) में लगाते थे, लेकिन अब निवेश फाइनेंशियल सेविंग्स जैसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, एफडी, बाॅन्ड, गोल्ड ईटीएफ की ओर बढ़ रहा है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी निवेश का माहौल बदला है। बीते एक वर्ष में छोटे शहरों में (बी-15 शहर) निवेश में 39 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है। जबकि बड़े शहरों (टी-15) में 28 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।

 

घरेलू निवेशकों ने 80 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है।

विदेशी निवेशकों के प्रभुत्व वाले शेयर बाजार में घरेलू निवेशक तेजी से पैसा लगा रहे हैं। बीते एक वर्ष में जहां विदेशी निवेशकों ने इक्विटी मार्केट में 60 हजार करोड़ रुपए लगाए हैं। दूसरी ओर घरेलू निवेशकों ने 80 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है। इस संबंध में बात करने पर क्रिसिल रिसर्च के सीनियर डायरेक्टर फंड एंड फिक्स्ड इनकम जिजू विद्याधरन के मुताबिक भारत में अभी भी अधिकांश निवेश परंपरागत रूप से सोना और रियल एस्टेट में ही होता है। लेकिन बीते एक वर्ष में फाइनेंशियल सेविंग्स जैसे शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड, बाॅन्ड, फिक्स डिपॉजिट आदि में भी निवेश बढ़ा है। फाइनेंशियल सेविंग्स में भी ट्रेंड बदल रहा है। आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक पहले फिक्स डिपॉजिट की हिस्सेदारी फाइनेंशियल सेविंग्स में 56 फीसदी थी। वर्तमान में यह 46 फीसदी है। 

 

विशेषज्ञ मानते हैं कि मूडीज की देश की रेटिंग में वृद्धि करने के बाद भारत में लॉन्ग टर्म का निवेश बेहतर रहेगा। भारतीय शेयर बाजार अगले वर्ष 20 फीसदी से अधिक का रिटर्न दे सकता है। अगले वर्ष तक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों, बीमा कंपनियों, नए निजी बैंक जैसे क्षेत्र में निवेश से रिटर्न बेहतर मिल सकता है। फाइनेंशियल अवेयरनेस बढ़ने की वजह से इस साल अक्टूबर महीने तक एसआईपी अकाउंट्स की संख्या 1.73 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एएमएफआई) के डेटा के अनुसार, साल के पहले 7 महीने में एसआईपी के जरिए म्यूचुअल फंड में निवेश 34,887 करोड़ रुपए हुआ है। पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में एसआईपी इंफ्लो में 47 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। एएमएफआई डेटा के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2017-18 में औसतन प्रत्येक महीने में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री ने 8.86 लाख एसआईपी अकाउंट जोड़े हैं। 

 

एफडी में निवेश में कमी आ रही है।

एडिलवाइस एएमसी की सीईओ राधिका गुप्ता कहती हैं कि लोग पिछले वर्ष के रिटर्न के आधार पर भविष्य में अपनी निवेश की प्लानिंग न करें, क्योंकि हो सकता है कि पिछले वर्ष आपको जो रिटर्न मिला वह इस बार न मिले। फिक्स इनकम म्यूचुअल फंड की बात करें तो दो वर्ष पहले अगर हम एक वर्ष के लिए इनवेस्टमेंट करने पर औसत रिटर्न 7.5 से आठ फीसदी रहा अभी वह छह से 6.5 फीसदी हो गया है। वहीं बैंक फिक्स डिपॉजिट रेट में भी 0.75 फीसदी तक कम हुआ है। फिक्स इनकम वाले निवेशक भी निवेश करने के तरीके बदल रहे हैं। एफडी का छह से साढ़े छह फीसदी का रिटर्न मिलता है, जबकि टैक्स के बाद तो चार फीसदी ही रिटर्न आ पाता है, जबकि महंगाई अधिक हो रही है, इसलिए एफडी में निवेश में कमी आ रही है। बाजार में एफआईआई निवेश के बारे में पूछने पर गुप्ता ने कहा कि चार-पांच साल पहले हम किसी पार्टी या फंक्शन में जाते थे तो लोग कहते थे कि एफआईआई का क्या हो रहा है, लेकिन अब एसआईपी की बात पूछते हैं। तो अब मार्केट में विदेशी पूंजी उतनी अहम नहीं रह गई है, जितनी कि पहले रहती थी। एफआईआई का फ्लो इस बार 60 हजार करोड़ रहा है, जबकि घरेलू निवेश 80 हजार करोड़ रुपए पिछले एक वर्ष में इक्विटी मार्केट में रहा है। छोटे शहरों से पैसा तेजी से आ रहा है। पिछले एक वर्ष में बड़े शहर यानी टी-15 शहरों की ग्रोथ 28 फीसदी रही, वहीं छोटे शहरों बी-15 शहरों की निवेश ग्रोथ 39 फीसदी रही। अब गोल्ड, रियल एस्टेट की तुलना में निवेश फाइनेंशियल प्रोडक्ट में आएगा, क्योंकि इस सेक्टर में भी लगातार नए प्रोडक्ट आ रहे हैं। 

 

औम कैपिटल के मैनेजिंग डायरेक्टर दिनेश जैन के मुताबिक फिक्स्ड इनकम म्यूचुअल फंड में रिटर्न घटा है। डिमोनिटाइजेशन के बाद लोगों ने फाइनेंशियल सेविंग्स की ओर कदम बढ़ाया है। सेमको सिक्योरिटी के रिसर्च हेड उमेश मेहता के अनुसार सरकार के विभिन्न कदमों से लोग सोना में निवेश से पीछे हटे हैं। इस दौरान कीमतें भी लगभग स्थिर रहने के कारण भी निवेश कम हो रहा है। वैसे भी इक्विटी बाजार अगर ऊपर जाता है तो फिर सोना बेहतर नहीं कर पाता है। यह हमने 2003 और 2008 में भी देखा है। आने वाले वर्ष में फिक्स इनकम म्यूचुअल फंड में छह से सात फीसदी का रिटर्न निवेशकों को मिल सकता है। 

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