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जीएसटी काउंसिल कल : 75 गुड्स और सर्विसेज पर घटा सकती है टैक्स

जीएसटी काउंसिल की 24वीं बैठक 18 जनवरी को होगी। आम बजट से ठीक पहले होने के कारण इसका महत्व बढ़ गया है।

Danik Bhaskar | Jan 17, 2018, 05:07 AM IST
इस मीटिंग में काउंसिल लॉ रिव्य इस मीटिंग में काउंसिल लॉ रिव्य

नई दिल्ली. जीएसटी काउंसिल की 24वीं बैठक 18 जनवरी को होगी। आम बजट से ठीक पहले होने की वजह से इसकी अहमियत बढ़ गई है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, इसमें करीब 25 वस्तुओं और 50 सेवाओं पर टैक्स रेट घटाने का फैसला हो सकता है। इरिगेशन की कुछ मशीनों पर जीएसटी रेट 18% से घटाकर 12% किया जा सकता है। इससे पहले 10 नवंबर को गुवाहाटी की बैठक में 211 वस्तुओं पर टैक्स रेट कम किए गए थे। वहां रियल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर चर्चा हुई थी। गुरुवार की बैठक में भी इस पर बात होने की उम्मीद है। ऑफिसर्स ने रियल्टी कंपनियों से इस बारे में बातचीत भी की है।

काउंसिल लॉ रिव्यू कमेटी की सिफारिशों पर भी विचार करेगी
- कमेटी ने कई नियमों को आसान बनाने की बात कही है। इनमें रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग और टैक्स क्रेडिट क्लेम करने के नियम भी शामिल हैं।
- 10 से ज्यादा राज्यों में कारोबार करने वाली बड़ी कंपनियों के लिए सिंगल रजिस्ट्रेशन शुरू किया जा सकता है। इससे बैंकों और दूसरी फाइनेंशियल कंपनियों को फायदा होगा। अभी हर राज्य में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। जीएसटी रेट घटाने के बाद टैक्स कलेक्शन भी कम हुआ है।

- जुलाई में 94,063 करोड़ रुपए का जीएसटी आया था, जबकि नवंबर में यह सिर्फ 80,808 करोड़ रह गया। काउंसिल की बैठक में इस पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

रिटर्न फाइलिंग: तीन की जगह एक फॉर्म हो सकता है लागू
- रिटर्न फाइलिंग के लिए जीएसटीआर-1, 2 और 3 फॉर्म को मिलाकर एक किया जा सकता है। अभी सामान्य श्रेणी के कारोबारियों को हर महीने तीन रिटर्न देने होते हैं। हालांकि, इस पर अमल में कई महीने लग सकते हैं, क्योंकि पूरा सॉफ्टवेयर बदलना होगा और रिटर्न का नया फॉर्मेट बनाना पड़ेगा। तब तक कंसोलिडेटेड रिटर्न का जीएसटीआर-3बी फॉर्म जारी रखा जा सकता है।

हरियाणा समेत 6 और राज्यों में ई-वे बिल लागू
- मंगलवार से 6 राज्यों में ई-वे बिल ट्रायल के तौर पर शुरू हो गया। ये राज्य हैं- हरियाणा, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, सिक्किम और झारखंड। कर्नाटक, राजस्थान, उत्तराखंड और केरल में यह पहले से लागू है। 50,000 रुपए से ज्यादा का सामान एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाने के लिए ई-वे बिल जरूरी है। देशभर में यह व्यवस्था 1 फरवरी से लागू हो जाएगी।