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एनडीए में दरार: 10 दिन में बीजेपी का दूसरा बड़ा साथी टीडीपी साथ छोड़ने को तैयार

पार्टी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू रविवार को इस बारे में संसदीय बोर्ड की बैठक में फैसला करेंगे।

Bhaskar News | Last Modified - Feb 03, 2018, 07:24 AM IST

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    ये हाथ अब छूट सकते हैं: इसी महीने चंद्रबाबू नायडू ने दिल्ली में मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास में मदद मांगी थी।- फाइल

    विजयवाड़ा. शिवसेना के बाद अब मोदी सरकार की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी तेलगू देशम पार्टी (टीडीपी) भी एनडीए से अलग हो सकती है। पार्टी आम बजट में आंध्र प्रदेश को नजरअंदाज किए जाने और उम्मीद के मुताबिक फंड नहीं मिलने से नाराज है। शुक्रवार को मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पार्टी की इमरजेंसी मीटिंग भी की। अब रविवार को पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक होगी, इसमें चंद्रबाबू केंद्र और राज्य में बीजेपी के साथ गठबंधन तोड़ने या जारी रखने पर फैसला करेंगे। वे पिछले हफ्ते भी कह चुके हैं कि उन्हें बीजेपी से नमस्ते करने में कोई गुरेज नहीं होगा। इस बारे में गुरुवार को उन्होंने दिल्ली में मौजूद सांसदों से बातचीत भी की थी।

    'बीजेपी के खिलाफ वॉर का एलान'
    - टीडीपी के सांसद टीजी वेंकटेश ने शुक्रवार को कहा कि हम बीजेपी के खिलाफ वॉर का एलान करने जा रहे हैं। हमारे पास तीन ही ऑप्शन हैं। पहला- एनडीए के साथ बने रहें, दूसरा- हमारे सांसद इस्तीफा दें, तीसरा- गठबंधन से बाहर निकल जाएं।

    - वहीं, टीडीपी नेता और केंद्रीय मंत्री सुजाना चौधरी ने कहा कि बजट से आंध्र के लोगों को काफी निराशा हुई। केंद्र को राज्य के प्रोजेक्ट्स के लिए फंड देना चाहिए था। टीडीपी आंध्र प्रदेश के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगी।

    2019 से पहले NDA के 6 से ज्यादा दल नाराज

    - 2019 लोकसभा चुनाव से पहले देश में राजनीतिक समीकरण बदलने शुरू हो गए हैं। टीडीपी समेत एनडीए में शामिल 6 से ज्यादा दल फिलहाल बीजेपी से नाराज चल रहे हैं।

    - शिवसेना तो गठबंधन से अलग भी हो गई। यूपी में सुहलदेव भारतीय समाज पार्टी, अपना दल, बिहार में लोक समता पार्टी, महाराष्ट्र में राष्ट्रीय समाज पक्ष भी बीजेपी से नाराज चल रही हैं।

    - इस साल 8 राज्यों में विधानसभा चुनाव हैं। कई दल इन चुनावों के नतीजों के बाद भी आगे का फैसला कर सकते हैं।

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    बीजेपी​-वाईएसआर के बीच बढ़ती नजदीकी

    - काफी दिनों से आंध्र प्रदेश में इस बात की खूब चर्चा है कि जगनमोहन रेड्डी की अगुआई वाली वाईएसआर कांग्रेस, बीजेपी से हाथ मिला सकती है, क्योंकि वाईएसआर कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने बीजेपी के सीनियर लीडर्स से मुलाकात की थी।

    - दिसंबर में वाईएसआर सांसद वी विजयसाई रेड्डी ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। वह अमित शाह के भी करीबी हैं।

    बजट बहाना है 2019 में चुनाव जीतने के लिए

    - राज्य में 2019 में लोकसभा चुनावों के साथ ही विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में टीडीपी राज्य में बीजेपी से अलग होकर जनता को यह संदेश देना चाहती है कि वह राज्य का और ज्यादा विकास केंद्र कर सकती थी, लेकिन केंद्र सरकार से सहयोग नहीं मिला। तेलंगाना के अलग होने से भी राज्य को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है।

    बीजेपी का 2019 में 380+ सीटों का टारगेट

    - बीजेपी ने 2019 के आम चुनाव में 380 प्लस सीटें जीतने का टारगेट रखा है। इसके लिए वह उन राज्यों पर फोकस कर रही है, जहां वह कमजोर थी या सहयोगी दलों के सहारे चुनाव में उतरती है।

    - वह 2019 में ऐसे राज्यों में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी का मनोबल बढ़ा है, क्योंकि 2014 के बाद कई ऐसे राज्यों में अच्छा प्रदर्शन भी किया है।

    NDA का चुनावी समीकरण

    एनडीए 22 दल- सांसद 318

    बीजेपी 282- टीडीपी 16

    - आंकड़े 2014 लोकसभा चुनाव के हैं। हालांकि शिवसेना इसमें शामिल नहीं है।

    आंध्र में बीजेपी-टीडीपी

    कुल सीटें -176

    टीडीपी-125

    बीजेपी- 04

    - टीडीपी ने बीजेपीके साथ 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले दूसरी बार गठबंधन किया था।

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    23 जनवरी को शिवसेना ने महाराष्ट्र और केंद्र सरकार में बीजेपी गठबंधन से अलग होने का एलान किया था। - फाइल
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