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गायत्री देवी से अमृता प्रीतम तक, जाने-पहचाने लोगों के प्यार के अनजाने किस्से

गायत्री ने कहा था, हां मैं जानती हूं कि मैं तीसरी बीवी बनूंगी लेकिन मेरे बाद काेई अाैर नहीं अाएगी।

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2018, 05:07 AM IST
गायत्री ने कहा था मेरे बाद नहीं| गायत्री ने कहा था मेरे बाद नहीं|

नई दिल्ली. मोहब्बत अपने आप में एक ऐसी नज्म है, जिसे हर दिल गुनगुनाता है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मोहब्बत करने वाले कौन हैं और कहां के हैं। हमारे गली-मोहल्लों में तो इश्क की ढेरों दास्तान बिखरी ही होती हैं लेकिन कुछ कहानियां ऐसी भी होती हैं जिनके किरदार उन्हें खास बना देते हैं। वेलेंटाइंस डे पर डेल्ही भास्कर ने कुछ ऐसे ही लोगों की दिलचस्प कहानी खास आपके लिए तलाशी...

गायत्री ने कहा था- मेरे बाद तीसरी नहीं

- कूच बिहार की राजकुमारी गायत्री देवी और जयपुर के राजा के प्यार की कहानी भी कुछ कम नहीं है। जय, गायत्री से पहली बार कोलकाता में मिले थे। तभी गायत्री उनकी ओर अट्रेक्ट हाे गई थीं। जय की दाे शादियां हाे चुकीं थी।

- बात जब दोनों की शादी की चली ताे उनकी मां ने कहा, तुम जानती हाे उनकी दाे शादियां हाे चुकी हैं। तब गायत्री ने कहा था, हां मैं जानती हूं कि मैं तीसरी बीवी बनूंगी लेकिन मेरे बाद काेई अाैर नहीं अाएगी।

पोलो से करीब आए गायत्री देवी और मानसिंह
- आजादी के पूर्व जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई मानसिंह की लव मैरिज भी पूरे देश में चर्चित रही। पोलो मैच की वजह से दोनों का प्रेम परवान चढ़ा।

- मानसिंह जहां मेयो कॉलेज में पढ़ते थे वहीं कूच बिहार की प्रिंसेज गायत्री देवी कॉन्वेंट की स्टूडेंट थीं। गायत्री देवी की पोलो मैच के प्रति गहरी रुचि एक दूसरे को करीब लाई। गौरतलब है कि मानसिंह का यह तीसरा विवाह था जो सफल रहा।

ये पीठ भी अमृता की है ये पीठ भी अमृता की है

- लेखिका अमृता प्रीतम शायर साहिर लुधियानवी से प्यार करती थीं, लेकिन इमरोज से भी उनका रिश्ता कम खूबसूरत नहीं था। जब दोनों साथ होते थे तो अमृता उनकी स्कूटर पर बैठती थीं और उनकी पीठ पर उंगलियों से साहिर का नाम लिखा करती थीं।

- एक बार ऐसे ही जब किसी ने इमरोज से पूछा कि क्या आपको बुरा नहीं लगता? उन्होंने कहा था- ये पीठ भी अमृता की है और वह नाम भी जो वह लिखती हैं, उसी का है, मुझे बुरा क्यों लगेगा।

राजीव साथ हैं ताे कहीं भी राजीव साथ हैं ताे कहीं भी

- इटली के मायनाे परिवार की साेनिया गांधी की मुलाकात राजीव गांधी से कैंब्रिज में हुई थी। सोनिया के पिता दोनों की शादी के खिलाफ थे। बावजूद इसके उन्होंने राजीव से शादी की। दोनों ने तय किया था कि शादी के बाद वे अलग अपाटर्मेंट में रहेंगे।

- भारत आने पर जब इंदिरा गांधी ने इससे इंकार कर दिया तो साेनिया ने यह विचार छोड़ दिया। वैसे भी उन्हाेंने एक बार कहा था कि राजीव साथ हैं ताे वे कहीं भी रह सकती हैं। 

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