--Advertisement--

संसदीय समिति का सरकार से सवाल, सैन्य शिविरों पर हमले आखिर इतने आम क्यों हो गए

Dainik Bhaskar

Mar 15, 2018, 03:24 AM IST

सुरक्षा घेरे की खामियों को लेकर संसदीय समिति ने लगाई फटकार, कहा- पठानकोट में हुए हमले से भी नहीं लिया सबक

Why the attacks on military camps became so commonplace

नई दिल्ली. रक्षा मंत्रालय से जुड़ी संसदीय समिति ने एक के बाद एक कई सैन्य शिविरों और प्रतिष्ठानों पर हाल में हुए हमलों को लेकर सरकार की जमकर खिंचाई की है। संसद में पेश समिति की रिपोर्ट में सवाल उठाया गया है कि सैन्य प्रतिष्ठानों पर आतंकी हमले होना आम बात क्यों हो गई है। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब पिछले महीने ही जम्मू-कश्मीर में सुंजवां आर्मी कैंप पर आतंकी हमला हुआ। इसमें सैनिकों के परिवारों को निशाना बनाया गया। हमले में पांच सुरक्षाकर्मी मारे गए जबकि तीन आतंकवादियों को ढेर कर दिया गया। संसदीय समिति ने इस हमले को कमजोर सुरक्षा घेरे की एक मिसाल करार दिया। समिति ने हैरानी जताई कि उच्च सुरक्षा वाले मिलिट्री कॉम्पलैक्स में सेंध लगाने में आतंकवादी कामयाब कैसे हो रहे हैं। जनवरी 2016 में पठानकोट के एयरबेस पर आतंकवादियों ने दुस्साहसी हमला किया था।

- समिति का मानना है कि उस हमले से भी कोई सबक नहीं लिया गया। इसके बाद से सैन्य शिविरों की किलेबंदी करने के लिए जो कदम उठाए जाने थे, उस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई। पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के बाद सरकार ने सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए उस समय के वाइस चीफ लेफ्टीनेंट जनरल फिलिप कम्पोस की अगुवाई में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने मई 2016 में अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्री को सौंप दी। इसमें पाया गया कि कई सैन्य प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में खामियां हैं।

- संसदीय समिति ने इस बात पर आश्चर्य जताया है कि उस कमेटी की सिफारिशों को लागू करने में महीनो लग गए। इस बीच अनेक सैन्य शिविरों पर आतंकी हमले होते रहे। सुंजवां सैन्य शिविर हमले के कुछ दिन बाद ही रक्षा मंत्रालय ने सैन्य प्रतिष्ठानों के सुरक्षा घेरों की मजबूती की खातिर 14 हजार 97 करोड़ रुपए जारी किए।

सेना का रुख : सुरक्षा पर खर्च भी सेना के बजट से
सेना ने समिति के सामने अपनी बात रखी है। सेना के प्रतिनिधियों ने समिति को बताया कि कहने को तो सरकार ने 14000 करोड़ रुपए शिविरों की सुरक्षा पर खर्च करने का अधिकार दे दिया है लेकिन सच यह है कि यह पैसा सेना को मिले बजट में से खर्च होना है। ऐसे सेना के पास अपनी जरूरतों को नए सिरे से तय करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। सेना का कहना है कि सुरक्षा घेरों को मजबूत करने के साजोसामान की खरीदारी के लिए अलग से फंड बनाने की जरूरत है।

समिति की रिपोर्ट : सिर्फ पॉलिसी का ही हुआ ऐलान
- सैन्य शिविरों की सुरक्षा के लिए सिर्फ पॉलिसी का ऐलान करने से कुछ नहीं होगा
- ज्यादा सैनिक ग्राउंड पर तैनात करने के बजाए टेक्नोलॉजी का सहारा लेना होगा
- सैन्य शिविरों के आसपास आबादी का दबाव बढ़ने पर ध्यान देना होगा
- खुफिया इनपुट बढ़ाने होंगे और सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल दुरुस्त करना होगा।
- सीमा सुरक्षा बल जैसे अर्ध सैनिक बलों को निगरानी के लिए नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना होगा ताकि आतंकवादी देश में न घुस पाएं

Why the attacks on military camps became so commonplace
X
Why the attacks on military camps became so commonplace
Why the attacks on military camps became so commonplace
Astrology

Recommended

Click to listen..