--Advertisement--

रेप रोको आंदोलन: पीएम को 5.55 लाख महिलाओं ने लिखी चिट्ठियां, पीएमओ ले जाने के दौरान रास्ते में पुलिस ने रोका

बच्चियों से रेप के दोषियों को छह माह में फांसी की सजा दिलाने दिल्ली महिला आयेाग अभियान चला रहा है।

Danik Bhaskar | Mar 08, 2018, 06:17 AM IST
आयोग के ऑफिस में बाेरों में भरे लेटर, जिनमें लोगों ने रेप के आरोपियों को जल्द सजा देने की अपील की है। आयोग के ऑफिस में बाेरों में भरे लेटर, जिनमें लोगों ने रेप के आरोपियों को जल्द सजा देने की अपील की है।

नई दिल्ली. दिल्ली महिला आयोग ने सत्याग्रह और ‘रेप रोको आंदोलन’ के समर्थन में महिलाओं से प्रधानमंत्री को लेटर लिखने की अपील की थी। इस पर 35 दिन में करीब 5 लाख 55 हजार लेटर आए। इनमें लोगों ने नरेंद्र मोदी से अपनी पीड़ा बताते हुए सख्त कानून बनाने की अपील की, ताकि महिलाओं और बच्चियों के प्रति लोगों का नजरिया बदल सके। बुधवार दोपहर 12 बजे आयोग की अध्यक्ष स्वाति जयहिंद छह ऑटो और 10 कार में ये लेटर लेकर सदस्यों के साथ पीएमओ के लिए निकलीं। पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोका और मंदिर मार्ग थाने ले गई। यहां से दोपहर तीन बजे उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय ले गई। जहां पीएमओ के अधिकारी ने उनकी मांगों का लेटर लिया।

'सीता ही सुरक्षित नहीं तो मंदिर बनाने का क्या मतलब?'

- एक लेटर में एक महिला ने लिखा है कि दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। अपराधियों में कोई डर नहीं है। हमारी भारतीय संस्कृति में महिलाओं को देवी का स्थान दिया गया है। इसके बावजूद महिलाएं शारीरिक, मानसिक अपराध से लगातार पीड़ित हो रही हैं। इनमें से कई मामलों में तो वे शिकायत तक नहीं करने जातीं। इसकी वजह कानून व्यवस्था का पुख्ता नहीं होना है। कुछ समय पहले मैंने आपको राम मंदिर निर्माण के पक्ष में बोलते सुना था। मेरा अनुरोध है कि यदि सीता ही सुरक्षित नहीं रहेगी तो फिर मंदिर बनाने का क्या मतलब होगा। मैं उत्तम नगर में रहती हूं। यहां आए दिन महिलाओं के साथ अपराध की घटनाएं होती हैं। इससे मेरी एक सहेली भी पीड़ित है, जिसे लंबे समय बाद भी न्याय नहीं मिला। मेरा आपसे अनुरोध है कि छोटी बच्चियों के साथ होने वाले अपराध को रोकने और कठोर कानून बनाने के लिए जल्द से जल्द कार्रवाई करें।

'बेटी घर न आ जाए तब तक डर लगा रहता है'

- एक लेटर में लिखा है, "प्रधानमंत्रीजी, मैं आसपास के माहौल के बारे में बताना चाहती हूं। मेरी दो बेटी हैं। जब वे घर से निकलती हैं और शाम को लौट नहीं आतीं मन में डर लगा रहता है। बस प्रार्थना करती रहती हूं कि वे सही सलामत घर लौट आएं। मेरी बेटी कई बार बताती है कि बस में कैसे उसके शरीर पर हाथ फेरा जाता है। सड़कों पर उसके करीब से बाइक पर निकलते हुए लड़के गंदी बातें बोलते हैं। मैं जब घर से बाहर अकेली होती हूं तो रात आठ बजे बाद डर लगता है। हर आदमी ऐसे घूरता है जैसे किसी औरत को कभी देखा ही नहीं। इस घटनाओं के चलते घर से बाहर निकलने में ही डर लगता है। आज हम बेटी को पढ़ाने-बचाने या उनके दहेज या उनके लालन पालन से नहीं डरते। आज हम उनकी इज्जत जाने से डरते हैं।"

'घर में गलत हरकत, पुलिस ने कुछ नहीं किया'

- एक अन्य लेटर में लिखा है, "मैं नौ साल की थी तो मेरे दादा मेरे साथ अश्लील हरकत करते थे। मुझे उस वक्त समझ नहीं आता था, लेकिन अंदर-अंदर बहुत गंदा लगता था। एक दिन दादाजी को मां ने देख लिया। उन्होंने विरोध किया तो उनको मारपीट कर घर से निकाल दिया। मां पढ़ी-लिखी नहीं थी, पापा कुछ नहीं कमाते थे। दादाजी की पेंशन से घर चलता था। कुछ महीनों बाद हमें मजबूर होकर फिर दादाजी के साथ ही रहना पड़ा। पुलिस में शिकायत करने पर वह कहते बूढ़ा आदमी है, अब गलती नहीं करेगा।"

सोशल मीडिया पर और घर-घर जाकर की थी अपील

- दिल्ली महिला आयोग ने 31 जनवरी को बच्चियों से रेप के आरोपियों को सजा दिलाने के लिए सत्याग्रह शुरू किया था। इसमें लोगों से लेटर लिखने की अपील की थी। एक लाख लेटर का टारगेट रखा गया था। सोशल मीडिया पर प्रचार किया गया था और आयोग की महिला पंचायत सदस्यों ने घर-घर जाकर लोगों से लेटर लिखने की अपील की।

आयोग अध्यक्ष और वालंटियर्स को पुलिस रास्ते में रोक कर मंदिर मार्ग थाने ले गई। आयोग अध्यक्ष और वालंटियर्स को पुलिस रास्ते में रोक कर मंदिर मार्ग थाने ले गई।