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सोल्जर सिर्फ सोल्जर होता है, महिला या पुरुष नहीं: फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी

मैं जिस फाइटर प्लेन में सवार होती हूं उसे भी पता नहीं होता कि चलाने वाला लड़का है या लड़की।

मुकेश कौशिक | Last Modified - Mar 08, 2018, 07:54 AM IST

सोल्जर सिर्फ सोल्जर होता है, महिला या पुरुष नहीं: फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी

नई दिल्ली. फ्लाइंग ऑफिसर अवनी चतुर्वेदी ने पिछले महीने अकेले फाइटर जेट उड़ाकर इतिहास रच दिया था। इसी के साथ मध्य प्रदेश की इस बेटी ने देश की पहली महिला फाइटर पायलट बनने का सम्मान हासिल किया था। महिला दिवस के मौके पर भास्कर ने उनसे खास बातचीत की और उनके अनुभवों के बारे में जाना। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश...

Q. पायलट बनने का सपना कब से देखा था?

A. बचपन से ही मैं उड़ना चाहती थी। पक्षियों को उड़ते देखती थी तो मन में आकाश में परवाज भरने की इच्छा होती थी। मैंने मन में ठाना हुआ था कि एयरफोर्स में जाऊंगी।

Q. फाइटर पायलट बनने के बारे में कभी सोचा था?
A. जब मैंने एयरफोर्स ज्वाइन की तब महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम में जाने का प्रोविजन नहीं था। लेकिन बाद में एयरफोर्स ने महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में लेने का फैसला लिया। मैंने तभी सोच लिया था कि फाइटर पायलट बनना है। यह एक दिन का अनुभव नहीं बल्कि रोज की प्रोसेस है। सीखने की यह प्रोसेस पूरी सर्विस में चलती रहेगी।

Q. आप देश की पहली महिला हैं जिसने फाइटर जेट के कॉकपिट में अकेले उड़ान भरी। जिस दिन आप ने वह ऐतिहासिक सोलो फ्लाइट की, उससे पहली रात आपके मन क्या उधेड़बुन चल रही थी?

A. किसी तरह के डर जैसी कोई बात थी ही नहीं तो उधेड़बुन का सवाल भी पैदा नहीं होता। हम मिशन के लिए ट्रेनिंग लेते हैं। कई तरह के परीक्षणों से रोज गुजरते हैं। सोलो उड़ान से पहले की प्रशिक्षण उड़ानों में हम इस पूरी तैयारी से गुजर चुके थे। हां, अकेले उड़ान भरने का एक्साइटमेंट जरूर था।

Q. इस ऐतिहासिक उड़ान से पहले क्या आपने अपने घर बात की थी?
A. जी नहीं। हम मिशन के लिए ट्रेंड होते हैं। हर दिन का अलग मिशन होता है। इस तरह की बातों के बारे में हम घर पर बात नहीं करते। हां, उड़ान के बाद मैंने पापा को तुरंत फोन लगाया था। वो खुशी से झूम उठे थे।

Q. चूंकि आप एक लड़की हैं, क्या आपके साथ कभी कोई भेदभाव हुआ?
A. नहीं। जहां तक प्रोफेशनल करियर की बात है तो सोल्जर को मर्द या औरत के नजरिए से नहीं देख सकते। वह सिर्फ सोल्जर होता है। मैं जिस फाइटर प्लेन में सवार होती हूं उसे नहीं पता होता कि चलाने वाला लड़का है या लड़की। वहां तो बेस्ट एविएशन स्किल्स ही काम आती हैं।

Q. महिलाओं को फाइटर स्ट्रीम में लाने के फैसले से पहले ये तर्क दिए जा रहे थे कि अगर हमारी फाइटर को दुश्मन की सीमा में उतरना पड़ा तो क्या होगा? आप क्या सोचती हैं?
A. मैं अपनी बात फिर दोहरा रही हूं। सोल्जर को मिशन पूरा करने के लिए तैयार किया जाता है। मुझे भी इसी तरह ट्रेंड किया जा रहा है। किसी भी सिचुएशन का सामना कर सकती हूं। देश के लिए जो भी मिशन मिलेगा, उसे पूरा करूंगी।

Q. महिला दिवस पर अपने देश के लिए, खासतौर से महिलाओं के लिए आप क्या कहना चाहेंगी?
A. मैं यह बात सबसे कहना चाहती हूं कि सोच बड़ी होनी चाहिए। जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं लेकिन इच्छाशक्ति मजबूत होनी चाहिए। ऐसा होता है तो सभी परेशानियां हार मान लेती हैं।

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Web Title: soljr sirf soljr hotaa hai, mahila yaa purus nahi: flaainga aufisr avni chturvedi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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