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4 बहनों ने मां की अर्थी को दिया कंधा, गैरों की तरह घर में बैठा रहा बेटा

100 गज जमीन के लिए बेटे ने मां को घर से निकाल दिया।

Dainik Bhaskar

Jan 06, 2018, 12:25 AM IST
81 साल की मनकौर को उसकी चार बेटियों ने कांधा दिया। 81 साल की मनकौर को उसकी चार बेटियों ने कांधा दिया।

नई दिल्ली. 100 गज जमीन के लिए बेटे ने मां को घर से निकाल दिया। मां बेटी के पास रहने लगी। 14 साल तक बेटे ने मां को शक्ल तक नहीं दिखाया। न ही मां की कुशलक्षेम पूछी। बुधवार को उस बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। बेटा आया और देखता रहा। और मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दिया। गुरुवार को चारों बेटियों ने मां की अर्थी सजाई और उनका अंतिम संस्कार कर दिया।

14 साल तक नहीं मिला मां से

- 81 साल की मनकौर अपने परिवार के साथ रामापार्क उत्तम नगर इलाके में रहती थीं।

- 2003 में उसके पति की मौत हो गई। इसके बाद उन्होंने अपनी सारी प्राॅपर्टी बेटे शमशेर के नाम कर दी।

- पिता की मौत के बाद शमशेर और उसकी पत्नी का जमीन को लेकर मां से विवाद था। ऐसे में शमशेर और उसकी पत्नी उन्हें परेशान करते थे।

- मनकौर को बीड़ी पीने की आदत थी। लेकिन शमशेर और उसकी पत्नी खाने-पीने के साथ ही उसे बीड़ी के लिए भी तरसाते थे।

- इसके चलते पटेल गार्डन में रहने वाली उनकी बेटी मां को अपने घर ले गई। तब से मनकौर अपनी बेटियों के घर ही रह रही थीं।

गैरों की तरह बैठा रहा बेटा

- मां मनकौर की मौत की खबर सुनने के बाद बेटा शमशेर अपनी बहन के घर पटेल गार्डन आ तो गया, लेकिन अंजान लोगों की तरह की बाहर बैठा रहा।

- अंतिम 14 सालों तक मां के साथ रहने वाली बहनों ने अपनी मां की अर्थी सजाई और घर से श्मशान तक लेकर गईं और उनका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान शमशेर ने अर्थी को न तो हाथ लगाया और न ही अंतिम संस्कार किया।

मनकौर अपने बेटियों के साथ रहती थी। मनकौर अपने बेटियों के साथ रहती थी।
14 सालों तक मां के साथ रहने वाली बहनों ने अपनी मां की अर्थी सजाई और घर से श्मशान तक लेकर गईं और उनका अंतिम संस्कार किया 14 सालों तक मां के साथ रहने वाली बहनों ने अपनी मां की अर्थी सजाई और घर से श्मशान तक लेकर गईं और उनका अंतिम संस्कार किया
बेटा आया और देखता रहा। और मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दिया। बेटा आया और देखता रहा। और मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दिया।
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81 साल की मनकौर को उसकी चार बेटियों ने कांधा दिया।81 साल की मनकौर को उसकी चार बेटियों ने कांधा दिया।
मनकौर अपने बेटियों के साथ रहती थी।मनकौर अपने बेटियों के साथ रहती थी।
14 सालों तक मां के साथ रहने वाली बहनों ने अपनी मां की अर्थी सजाई और घर से श्मशान तक लेकर गईं और उनका अंतिम संस्कार किया14 सालों तक मां के साथ रहने वाली बहनों ने अपनी मां की अर्थी सजाई और घर से श्मशान तक लेकर गईं और उनका अंतिम संस्कार किया
बेटा आया और देखता रहा। और मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दिया।बेटा आया और देखता रहा। और मां की अर्थी को कंधा भी नहीं दिया।
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