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महिलाओं की 3 पीढ़ियां: ट्रेन चलाने से लेकर जेट उड़ाने तक हर पेशे में कर दिखाया बेहतर

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भास्कर बता रहे हैं देशभर की कुछ चुनिंदा ऐसी महिलाओं के बारे में।

Bhaskar News | Last Modified - Mar 08, 2018, 10:32 AM IST

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    नानम्मल के अपने 5 बच्चे, 12 पोते-पोती और 11 पड़पोते-पोती सभी योग करते हैं और योग सिखाते हैं।

    नई दिल्ली. 99 साल की नानम्मल की ऊर्जा और योगमुद्राएं देखकर आप दांतों तले उंगलियां दबा लेंगे। उनके अपने 5 बच्चे, 12 पोते-पोती और 11 पड़पोते-पोती सभी योग करते हैं और योग सिखाते हैं। वहीं 21 साल की अवनी चतुर्वेदी देश की पहली लड़ाकू जेट उड़ाकर चर्चा में आ गईं। ऐसी ही कुछ कहानी है भुसावल की रहने वाली 17 साल की मसिरा बी की। जिसने इस उम्र में 21 आविष्कार कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भास्कर बता रहा हैं देशभर की कुछ चुनिंदा ऐसी महिलाओं के बारे में जिन्होंने अलग तरह के पेशे में कर दिखाया बेहतर।

    99 की उम्र में इतनी फिट हैं, रोज लेती हैं 100 लोगों की योग क्लास

    99 साल की नानम्मल भास्कर से बातचीत में वे बताती हैं कि उन्होंने अपने दादा और नाना से तीन वर्ष की उम्र में योग सीखना शुरू कर दिया था। अभी वे अपने बेटे बालाकृष्णन के साथ रहती हैं और उनके घर पर 100 से ज्यादा लोग योग सीखने आते हैं। 30 सदस्यों के परिवार की वे मुखिया हैं। जीवन में कभी भी शकर का स्वाद नहीं लिया। कहती हैं, गांधीजी ने इसे सफेद जहर कहा था। न ही कॉफी और चाय का स्वाद पता है। वे सूकू कॉफी पीती हैं। रोस्टेड धनिए, जीरा और अदरक को मिलाकर इसे तैयार किया जाता है। कॉर्न सूप, हरी सब्जियां और फल उनका मुख्य आहार है। जीवन में कभी भी अस्पताल इलाज के लिए नहीं गई हूं।

    किचन से हुई थी योग करने की शुरुआत

    वे बताती हैं कि 19 की उम्र में शादी हो गई थी। उस समय मैं किचन में ही सोती थी। जल्दी उठने की आदत के कारण किचन में योग करने लगती थी। एक दिन मेरी सास ने मेरे पति से कहा कि ये किचन में क्यों खेलती है। पति वेंकटासामी ने बताया कि ये खेल नहीं बल्कि योग है। नानम्मल की सास को नाभी के हिस्से में दर्द रहता था। नानम्मल ने योग से उन्हें ठीक कर दिया। फिर क्या था औरों का इलाज भी शुरू कर दिया।

    रिपोर्ट : जेसी शिबू, कोयम्बटूर।

    आगे की स्लाइड्स में पढ़ें- 12 महिलाओं की ऐसी ही और सच्ची कहानियां...

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    अवनी चतुर्वेदी, फाइटर पायलट

    अकेले फाइटर प्लेन उड़ाने वाली देश की पहली महिला

    मध्यप्रदेश के रीवा की 24 वर्षीय अवनी ने यह इतिहास इसी साल 21 फरवरी को रचा है। वे 2016 में लड़ाकू दस्ते में आईं।

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    अलीशा अब्दुल्ला, रेसिंग ड्रा‌इवर

    चेन्नई की 28 वर्षीय अलीशा ने 14 साल की उम्र में नेशनल कार रेसिंग में पुरुषों के बीच पांचवां स्थान पाया था। 19 की उम्र में बाइक रेसिंग में तीसरा स्थान पाया।

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    ममता देवी, बॉडीबिल्डर।

    मणिपुर की 35 साल की ममता देश की पहली महिला बॉडीबिल्डर हैं। वर्ल्ड बॉडीबिल्डिंग चैम्पियनशिप -2012 में वे कांस्य पदक जीत चुकी हैं।

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    17 साल की नसिरा बी।

    21 आविष्कार हैं इनके नाम, बाइक में लगा दिया एसी

    भूसावल के नारखेड़े कॉलेज में 12वीं में पढ़ रही मसिरा ने 17 साल की उम्र मेंे ही 21 आविष्कार कर दिए हैं। पिता हनीफ पटेल वरणगांव की ऑर्डिनेन्स फैक्टरी में काम करते हैं। एक बार कार के एसी का आराम देखा तो मसिरा ने बाइक में एसी लगाने का इनोवेशन कर दिया। इसका पेटेंट भी लिया। इसके लिए 2014 में ‘नेशनल चाइल्ड अवाॅर्ड’ मिला। उनके इनोवेशन्स में अॉटोमेटिक सेंसर ऑपरेटेड स्ट्रीट लाइट, क्रॉसिंग पर रेल आने की सूचना देने वाला सेेंसर, पैर से चलने वाली सब्जी काटने की मशीन शामिल हैं।

    रिपोर्ट : यामिनी कुलकर्णी।

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    36 की प्रवीणा।

    बनीं श्मशान प्रबंधक ताकि नारियां दे सकें अपनों को विदाई

    बात 2014 की है चेन्नई का 120 साल पुराना श्मशान घाट डंपिंग ग्राउंड और गुंडे-बदमाशों का ठिकाना बन गया था। शहर के एक एनजीओ ने सोचा कि इसे ऐसा स्थान बनाना चाहिए जहां महिलाएं भी अपने परिजन को अंतिम विदाई देने आ सकें। इस चुनौती को स्वीकार किया प्रवीणा सोलाेमन ने। वैसे महिलाएं श्मशान नहीं जाती हैं। लेकिन 36 साल की प्रवीणा आज इस श्मशान घाट का प्रबंधन देखती हैं। पिछले साढ़े चार साल से वे यह काम कर रही हैं। प्रवीणा ने अंग्रेजी साहित्य में एम की डिग्री ले रखी है।

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    टेसी थॉमस, मिसाइल डेवलपर

    भारतीय मिसाइल प्रोजेक्ट का प्रमुख बनने वाली पहली महिला। अग्नि-4 तथा अग्नि-5 के विकास में केरल की 55 वर्षीय टेसी का अहम योगदान रहा।

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    सुरेखा यादव, लोकोपायलट

    सुरेखा यादव 1988 में रेलवे में भर्ती हुईं। 1989 में वे असिस्टेंट ड्राइवर बनीं और 2010 में पैसेंजर ट्रेन की ड्राइवर। अब वे 52 साल की हैं। कल्याण में ड्राइवर्स को ट्रेनिंग देती हैं।

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    मंजू यादव, कुली

    पति की मौत के बाद तीन बच्चों की परवरिश मुश्किल हुई तो मंजू उसी पेशे में उतर आईं जो उनके पति का था। 34 वर्षीय मंजू पिछले पांच साल से ये काम कर रही हैं।

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    के.सी. रेखा, लाइसेंस्ड फिशरवुमन

    45 वर्षीय रेखा ने 10 साल पहले यह काम चार बच्चों की परवरिश में पति का हाथ बंटाने के लिए शुरू किया। वे देश की एक मात्र ऐसी फिशरवुमन हैं, जिनके पास लाइसेंस है।

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    जमीता, इमाम

    26 जनवरी को केरल के मल्लपुरम में 34 वर्षीय जमीता ने जुम्मे की नमाज में इमाम की भूमिका निभाई। वे जिले के वंदूर शहर में कुरान सुन्नत सोसाइटी की महासचिव हैं।

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    चंद्राणी प्रसाद वर्मा, माइनिंग इंजीनियर

    महाराष्ट्र की चंद्राणी को माइनिंग इंजीनियरिंग केे डिग्री कोर्स में एडमिशन देने से इंकार कर दिया था। कोर्ट के आदेश पर प्रवेश मिला। 1999 में वे देश की पहली माइनिंग इंजीनियर बनीं।

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    सीमा राव, कमांडो ट्रेनर

    मिलिट्री मार्शल अार्ट्स में सेवन्थ डिग्री ब्लैक बेल्ट सीमा राव देश की एकमात्र महिला कमांडो ट्रेनर हैं। 48 वर्षीय सीमा 20 साल से बिना फीस प्रशिक्षण दे रही हैं।

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