--Advertisement--

निर्भया कांड के पांच साल, महिलाएं दिल्ली में खुद को किसी भी समय नहीं समझतीं सुरक्षित

मैं पेपर स्प्रे के बगैर सफर नहीं कर सकती क्योंकि मेरी खुद की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है।

Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 05:20 AM IST

नई दिल्ली. मैं पेपर स्प्रे के बगैर सफर नहीं कर सकती क्योंकि मेरी खुद की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है। मैं पुलिस पर भी निर्भर नहीं रह सकती, क्योंकि ज्यादातर समय उनका हेल्पलाइन नंबर काम ही नहीं करता। यह कहना है गुरुग्राम की 24 साल की डिजायनर उत्कर्षा दीक्षित का। यह पीड़ा सिर्फ उत्कर्षा की नहीं बल्कि दिल्ली में रहने वाली हर लड़कियों और महिलाओं की है। सभी खुद को राजधानी में असुरक्षित महसूस करती हैं क्योंकि निर्भया कांड के पांच साल बाद भी दिल्ली को आधी आबादी के लिए सुरक्षित नहीं बनाया गया।

राजधानी में हर 6 घंटे रेप की एक वारदात

दिल्ली पुलिस के आंकड़े इस बात की तस्दीक कर रहे हैं। हालात यह हैं कि सार्वजनिक स्थलों की बात तो दूर,घर और स्कूल में भी आधी आबादी असुरक्षित हैं।

राजधानी में हर छह घंटे में दुष्कर्म की एक वारदात होती है। वहीं, इस साल हर तीन महीने में स्कूल में एक बच्ची को दुष्कर्म का शिकार बनाया गया।


निर्भया कांड के बाद से बढ़ते गए दुष्कर्म के केस
निर्भया कांड के बाद से लेकर वर्ष 2015 तक राजधानी में रेप, छेड़छाड़ और किडनैप के मामले घटने की बजाय बढ़ते ही गए। हालांकि, साल 2016 और इस साल 30 नवंबर तक इन आंकड़ों में न के बराबर कमी दर्ज की गई। वर्ष 2012 में रेप के 706 मामले दर्ज हुए थे, जो 2013 में बढ़कर 1636, 2014 में 2166 और 2015 में 2199 हो गए। हालांकि, न के बराबर कमी के साथ वर्ष 2016 में 2155 और इस साल 30 नवंबर तक 1968 दुष्कर्म के मामले दर्ज किए गए।