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‘मोदीकेयर’ 15 अगस्त या 2 अक्टूबर से, सालाना 12 हजार करोड़ का खर्च

Dainik Bhaskar

Feb 03, 2018, 04:39 AM IST

दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थकेयर प्रोग्राम कैशलैस होगा

world s largest healthcare program will be cashless
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नई दिल्ली. देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को 5 लाख रु. का बीमा कवर देने वाला दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थकेयर प्रोग्राम कैशलेस होगा। रीईंबर्समेंट नहीं होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को बताया कि योजना आगामी वित्त वर्ष से लागू होगी। यह योजना 15 अगस्त या 2 अक्टूबर को लॉन्च हो सकती है।

- नीति आयोग के अनुसार, योजना पर हर साल 10 से 12 हजार करोड़ रु. खर्च होंगे। प्रति परिवार 1000 से 1200 रु. का प्रीमियम होगा। पूरा खर्च सरकार उठाएगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को बजट में नेशनल हेल्थ प्रोटेक्शन स्कीम की घोषणा की थी। इसे मोदीकेयर भी कहा जा रहा है। सरकार का दावा है कि योजना के तहत करीब 50 करोड़ लोगों का स्वास्थ्य बीमा होगा और 40% आबादी कवर होगी।

टैक्स में छूट नहीं देने पर बोले वित्तंत्री अरुण जेटली- पहले के बजट में दे चुके हैं

- जेटली ने बजट में मिडिल क्लास को बड़ी राहत नहीं देने पर कहा कि पहले के हर बजट में अलग-अलग तरीकों से छोटे करदाताओं को राहत दी है। यह जरूरी नहीं कि मध्य वर्ग की राहत के लिए टैक्स स्लैब ही बदलें। उन्होंने कहा, "जब मैं वित्त मंत्री बना तो टैक्स छूट सीमा 2 लाख रु. थी। मैंने यह 3 लाख कर दी।

- दरअसल, दो साल बाद मैंने कहा कि अगले 50 हजार रुपए के लिए आपको कोई टैक्स नहीं देना है। तो छोटे टैक्स पेयर्स के लिए टैक्स छूट की प्रभावी सीमा 3 लाख रुपए हो गई। हमने बचत के लिए 50 हजार रुपए की अतिरिक्त छूट फिर से दी। अब सेविंग्स पर 1 लाख की छूट 1.5 लाख रुपए हो गई। हाउसिंग लोन रीपेमेंट्स पर 50 हजार की अतिरिक्त छूट दी गई। यानी यह 1.50 लाख रुपए से बढ़कर 2 लाख रुपए हो गई। ये सारे कदम ईमानदार करदाताओं को राहत देने के लिए उठाए गए हैं।'

- जेटली ने कहा, इसी तरह डॉक्टर, वकील जैसे प्रोफेसनल्स, जिनकी सालाना आय 50 लाख तक है उनके लिए टैक्सेशन आसान की गई है। उनकी 50 प्रतिशत आमदनी को खर्च मान लिया जाएगा और आधी आमदनी को इनकम मानकर टैक्स देना होगा।

अभी 2000 करोड़ रुपए की व्यवस्था

जेटली ने बताया कि योजना पर अभी नीति आयोग और स्वास्थ्य मंत्रालय काम कर रहे हैं। इसके लिए 2000 करोड़ रु. की व्यवस्था की है। योजना के लिए और फंड की जरूरत पड़ी तो अगले वित्त वर्ष में इंतजाम किया जाएगा। लागत ज्यादा आने के कारण 25 करोड़ की जगह, 10 करोड़ परिवारों से ही योजना की शुरुआत की जा रही है। बाद में बाकी आबादी भी दायरे में लाई जा सकती है।

परिवार के सदस्यों की सीमा नहीं, हर तरह की बीमारी कवर होगी

नीति आयोग के अनुसार बीमा लाभ के लिए परिवार के सदस्यों की संख्या की कोई सीमा नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने फंड की चिंताएं खारिज करते हुए कहा कि इसकी बारीकियों पर काम जारी है। केंद्र और राज्य मिलकर प्रीमियम भरेंगी। यह राज्यों को तय करना है कि वह योजना में शामिल होंगे या अपनी-अपनी स्वास्थ्य योजनाएं लागू करेंगे। योजना के तहत हर तरह की बीमारी कवर होगी। वहीं, एक अधिकारी ने बताया कि योजना के लिए 7 हजार करोड़ रु. केंद्र सरकार देगी। शेष राशि का इंतजाम राज्यों को करना होगा।

सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी इलाज

योजना के तहत गरीब परिवार सरकारी के साथ चुनिंदा निजी अस्पतालों में इलाज करवा सकेंगे। इलाज कैशलेस होगा। खुद के खर्चे से इलाज करवाकर सरकार से पांच लाख रुपए तक रीईंबर्समेंट करवाने का मॉडल इसमें नहीं रहेगा। जेटली ने कहा कि रीईंबर्समेंट मॉडल में बहुत शिकायतें आती हैं।

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