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पिछले साल सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 12 लोग मरे : दिल्ली सरकार

दिल्ली सरकार ने विधानसभा में बताया कि पिछले साल सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान राजधानी में12 लोगों की मौत हुई थी।...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

पिछले साल सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 12 लोग मरे : दिल्ली सरकार
दिल्ली सरकार ने विधानसभा में बताया कि पिछले साल सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान राजधानी में12 लोगों की मौत हुई थी। इस साल अब तक ऐसी कोई दुर्घटना नहीं हुई है। दिल्ली सरकार के शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने पिछले सप्ताह लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2017-18 में सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान 5 घटनाओं में 12 लोगों की मौत हो गई। कोई भी पीड़ित नगर निगम या सरकार के किसी अन्य नगर निकाय से संबद्ध नहीं था।

लिखित जवाब में उन्होंने बताया कि धारा 29 (3) मैला ढोने वालों के रूप में रोजगार का निषेध और उनके पुनर्वास अधिनियम-2013 के तहत, हाथ से मैला ढोने वालों का सर्वेक्षण करने के लिए जिला स्तर पर सतर्कता कमेटियां बनाई गई हैं। दिल्ली जल बोर्ड इस संबंध में एक मानक परिचालन प्रक्रिया तैयार कर रहा है। शहरी विकास विभाग ने 11 जिलों में राज्य स्तरीय निगरानी कमेटी और सतर्कता कमेटियों के गठन के लिए अधिसूचनाएं जारी की हैं। दिल्ली जल बोर्ड ने सेप्टिक मैनेजमेंट रेग्युलेशन-2018 तैयार किया है। इसमें सेप्टिक टैंकों की मशीन से सफाई सुनिश्चित की गई है। दिल्ली कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे सदन में रखा जाएगा। इसके बाद इसे लागू किया जाएगा।

अपने जवाब में जैन ने कहा कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), नई दिल्ली नगर निगम और तीनों निगम सेप्टिक टैंकों की सफाई मशीनों से करेंगे। जवाब के मुताबिक, पूर्वी दिल्ली नगर निगम के तहत नालियों की सफाई मशीनों से की जा रही है। इससे पीडब्ल्यूडी नाले की सफाई के दौरान आवश्यक सावधानियां सुनिश्चित करता है।

शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन ने लिखित जवाब में दी जानकारी

सुरक्षा उपायों की अनदेखी

दरअसल, राजधानी में सेप्टिक टैंकों की सफाई के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई मशीन उपलब्ध नहीं हैं, जिससे पूरी दिल्ली की सफाई हो सके। इसके अलावा सेप्टिक टैंकों की सफाई के दौरान सुरक्षा उपायों की अनदेखी की जाती है। हालांकि, जागरूक सफाई कर्मचारी सीवर लाइन या सेफ्टिक टैंक की सफाई करने से पहले माचिस की तिल्ली जलाकर मैन हॉल में डालते हैं। यदि आग लग जाती है तो कुछ समय के लिए मजदूर रुक जाते हैं। कई मामलों में ठेकेदार अपने लाए हुए मजदूरों को पैसों का लालच देकर मैन होल में उतार देते हैं।

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