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23 साल का बिजनेस छोड़ा, आर्टवर्क से प्लास्टिक रियूज का संदेश

जिस प्लास्टिक वेस्ट को आप कूड़ा समझ कर फेंक देते हैं या फिर कबाड़ी को बेचने के लिए स्टोर रूम में रख देते हैं। क्या...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

23 साल का बिजनेस छोड़ा, आर्टवर्क से प्लास्टिक रियूज का संदेश
जिस प्लास्टिक वेस्ट को आप कूड़ा समझ कर फेंक देते हैं या फिर कबाड़ी को बेचने के लिए स्टोर रूम में रख देते हैं। क्या आपने सोचा है कि उस वेस्ट प्लास्टिक से नायाब पेंटिंग बनाई जा सकती है। नहीं न, उसी कबाड़ की प्लास्टिक को इकट्ठा कर उससे खूबसूरत रंग भरे जा रहे हैं। कला और पर्यावरण के लिए मुफीद इस आर्टफॉर्म को ईजाद करने का श्रेय फरीदाबाद के एतमादपुर निवासी उदित नारायण बैसला को जाता है। जिन्होंने देश को पॉल्यूशन फ्री बनाने की दिशा में अपनी कला के माध्यम से एक अनूठा प्रयास शुरू किया। इसके लिए उन्होंने अपना 23 साल पुराना बिजनेस छोड़ दिया। ये कबाड़ में निकलने वाली वेस्टेज प्लास्टिक वायर से नायाब पेंटिंग बनाते हैं। करीब दो साल पहले उन्होंने पेंटिंग बनाना शुरू कर दिया।

समाज के लिए कुछ करना था, इसलिए छोड़ा बिजनेस

49 साल के उदित नारायण बैसला पेशे से टेक्सटाइल डिजाइनर थे और शौकिया पेंटर। उन्होंने बताया बढ़ता पॉल्यूशन हर किसी को परेशान कर रहा है। वे बिजनेस में तो थे, लेकिन उनकी आत्मा पेंटिंग में बसती थी। एक दिन घर से निकलते वक्त देखा कि कुछ कबाड़ी खाली प्लॉट में पड़े वायर के गट्ठर में आग लगा रहे थे। इसके धुएं से आसपास के लोगों को सांस लेना मुश्किल हो रहा था। उदित ने कहा कि यह देख उन्हें दुख हुआ। उन्होंने सोचा कि कुछ ऐसा तरीका निकाला जाए जो पारंपरिक शैली से अलग हो, रोचक हो और सस्ता हो। इसके अलावा आर्ट के जरिए पर्यावरण को बचाया जा सके। इसके लिए उन्होंने अपना बिजनेस छोड़ दिया। उन्होंने कबाड़ से निकलने वाली सभी कलर की प्लास्टिक वायर को इकट्ठा किया। उन्होंने उन्हीं वायरों में बिना किसी कटाई-छंटाई के उन्हें रूप देना शुरू किया। उदित प्लास्टिक वायर को तोड़-मरोड़ कर ऐसी खूबसूरत पेंटिंग बना देते हैं कि एक बार लोगों को पता ही नहीं चलता कि पेंटिंग कलर या कलम से नहीं बल्कि सिर्फ प्लास्टिक वायर से तैयार की गई है।

उदित नारायण बैसला

ऐसे इकट्ठा करते हैं वायर

उदित अपने आसपास के इलाकों से प्लास्टिक के कचरे को उठाते हैं। उसकी पतली स्ट्रिप्स बनाते हैं। सबसे पहले लकड़ी का बोर्ड लेते हैं। इस पर पेंसिल से डिजाइन तैयार कर लेते हैं। फिर इसके बाद बिजली की बारीक तारों को बोर्ड में सेट कर देते हैं। इस काम में लोशन व प्लास्टिक टेप का प्रयोग करते हैं। उदित अपनी कला के जरिए लोगों को प्लास्टिक रियूज करने व पर्यावरण को बचाने का संदेश दे रहे हैं।

कॉलेजों में देंगे प्रशिक्षण

उदित ने कहा कि वायर पेंटिंग को लोग पसंद करने लगे हैं। अब उनके पास स्कूलों व कॉलेजों से भी प्रशिक्षण के ऑफर आ रहे हैं। वह जल्द ही छात्र-छात्राओं को वायर पेंटिंग का प्रशिक्षण देंगे। जिससे इस आर्ट वर्क को फेमस कर प्लास्टिक रियूज को बल दिया जा सके। पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।

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