Hindi News »Union Territory »New Delhi »News» ‘ग्रैंड क्रैब’ वायरस का अलर्ट जारी, कंप्यूटर हैक कर मांगता है फिरौती

‘ग्रैंड क्रैब’ वायरस का अलर्ट जारी, कंप्यूटर हैक कर मांगता है फिरौती

दुनियाभर में हजारों कंप्यूटरों और मोबाइलों को लॉक कर फिरौती वसूलने वाले लॉकी रैंसमवेयर के बाद भारतीय साइबर स्पेस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:05 AM IST

‘ग्रैंड क्रैब’ वायरस का अलर्ट जारी, कंप्यूटर हैक कर मांगता है फिरौती
दुनियाभर में हजारों कंप्यूटरों और मोबाइलों को लॉक कर फिरौती वसूलने वाले लॉकी रैंसमवेयर के बाद भारतीय साइबर स्पेस में ग्रैंड क्रैब नाम का नया रैंसमवेयर सक्रिय हो रहा है। यह भी लॉकी तरह मोबाइल या कंप्यूटर को हैक कर लॉक कर लेता है और फिर सिस्टम खोलने के बदले में यूजर से फिरौती की मांग करता है।

साइबर स्पेस में इसके बढ़ते प्रभाव को देखते हुए सूचना और प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय ने एडवायजरी जारी की है। एडवायजरी में सरकारी और गैर सरकारी सर्वर ऑपरेटर्स को अलर्ट करते हुए कहा गया है कि वे ग्रैंड क्रैब नाम के रैंसमवेयर से सतर्क रहें। यह कंप्यूटर नेटवर्क या सर्वरों को गंभीर तौर पर प्रभावित कर सकता है। इसकी जानकारी इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (सर्ट इन) को भी दी गई है। सर्ट-इन ने भी अपने पोर्टल पर इस खतरनाक वायरस की जानकारियां और बचाव के उपाए जारी किए हैं। ग्रैंड क्रैब के अलावा लॉकी वायरस के दोबारा हमले को लेकर भी आईटी मंत्रालय ने एडवायजरी जारी की है।

आईटी मंत्रालय ने जारी की चेतावनी, लॉकी जितना खतरनाक

सिर्फ दो महीने में 53 हजार से ज्यादा लोग हुए नए वायरस के शिकार

रूसी हैकर्स ने किया है तैयार | रूसी हैकर्स का बनाया ग्रैंड क्रैब वायरस जनवरी में फैला और दो महीने में इसने 53 हजार यूजर्स को प्रभावित किया। खास बात ये है कि हैकर्स कई अवैध वेबसाइटों को इसे फैलाने के एवज में कमीशन भी दे रहे हैं।

डिस्काउंट ऑफर के एड फंसा सकते हैं

ग्रैंड क्रैब, ई-मेल लिंक के अलावा फर्जी डिस्काउंट ऑफर वाले विज्ञापन और वेबसाइट के जरिए भी सिस्टम में आ सकता है। इन पर क्लिक करते ही वायरस सिस्टम में जगह बना लेता है।

गूगल आईडी लीक हुई तो खुल जाएगी सारी पोल

लीक हुए गूगल आईडी और पासवर्ड से कोई भी यह आसानी से पता लगा सकता कि आप इंटरनेट पर क्या देखते, सर्च करते और खरीदते हैं। यह सभी जानकारियां गूगल के माई एक्टिविटी समेत दूसरे सेक्शनों में स्टोर होती रहती हैं। वेब ब्राउजर से हिस्ट्री डिलीट करने के बावजूद ये जानकारियां गूगल के पास मौजूद रहती हैं। आईटी विशेषज्ञों ने बताया कि गूगल आपकी सूचना, लोकेशन, उम्र, आदत, रुचि को देखते हुए एड प्रोफाइल तैयार करता है। गूगल यह भी जानता है कि आप कौन से ऐप का इस्तेमाल कब करते हैं और कितने बजे आप सोते हैं।

ऐसे बच सकते हैं| अनजान ई-मेल लिंक और संदिग्ध लगने वाले एड या वेब लिंक को न खोलें। अगर सिस्टम करप्ट हो गया है तो सर्ट-इन पोर्टल पर दिए डिक्रिप्टर सॉफ्टवेयर की मदद से फाइलें वापस पा सकते हैं।

हैकिंग के बढ़ते केस

22 हजार वेबसाइट को हैकर्स ने बनाया शिकार

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार चार साल में साढ़े तीन सौ सरकारी वेबसाइट हैक हो चुकी हैं। 2013 में 189, 2014 में 165, 2015 में 164, 2016 में 199 और 2017 में 114 सरकारी वेबसाइट हैक हुईं। वहीं अप्रैल 2017 से लेकर जनवरी 2018 तक करीब 22 हजार भारतीय वेबसाइट हैकिंग का शिकार हुई हैं।

नहीं दी लॉकी की डिटेल्स| लॉकी वायरस कहां से आया और कितनी सरकारी वेबसाइटों को इसने नुकसान पहुंचाया यह जानकारी मंत्रालय के अधिकारी फिलहाल नहीं बता रहे हैं।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×