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पांच साल में मार्च में सबसे ज्यादा बढ़ा ओजोन पॉल्यूशन लेवल

राहुल मानव | नई दिल्ली Rahul.Manav@dbcorp.in तेज धूप से दिल्ली में गर्मी बढ़ने लगी है। इसका असर ना सिर्फ मौसम पर पड़ रहा है...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 14, 2018, 02:10 AM IST

पांच साल में मार्च में सबसे ज्यादा बढ़ा ओजोन पॉल्यूशन लेवल
राहुल मानव | नई दिल्ली Rahul.Manav@dbcorp.in

तेज धूप से दिल्ली में गर्मी बढ़ने लगी है। इसका असर ना सिर्फ मौसम पर पड़ रहा है बल्कि ओजोन पॉल्यूशन लेवल भी बढ़ने लगा है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के प्रोजेक्ट सफर के निदेशक डॉ. गुफरान बेग ने बताया कि पांच सालों के ट्रेंड को देखें तो इस साल मार्च में सबसे ज्यादा ओजोन पॉल्यूशन दर्ज हुआ है। इसका सीधा असर सांस लेते समय फेफड़ों पर पड़ता है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली में ओजोन पॉल्यूशन इसलिए ज्यादा है, क्योंकि वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं कई अवैध इंडस्ट्री भी चल रही हैं। इससे वातावरण में 60% तक पॉल्यूशन फेल रहा है।

तेज धूप का असर भी पड़ रहा है ओजोन पर

वाहनों की संख्या और इंडस्ट्री से निकलने वाले प्रदूषित कण भी जिम्मेदार, बारिश के बाद आ सकती है कमी

70% बढ़ा नाइट्रोजन पॉल्यूशन

नई दिल्ली। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के सदस्यों ने और इंडियन नाइट्रोजन ग्रुप (आईएनजी) के वैज्ञानिकों ने नाइट्रोजन गैस पर एक विशेष स्टडी तैयार की है। इसमें खुलासा हुआ है कि पंजाब, उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे राज्यों के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में भी नाइट्रोजन प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। यह 70% तक बढ़ गया है।

इसलिए बढ़ने लगा है ओजोन पॉल्यूशन का लेवल

डॉ. बेग ने बताया कि ओजोन पॉल्यूशन बढ़ना मौसम के ऊपर काफी निर्भर करता है। पृथ्वी सतह के पास वाले ओजोन प्रदूषण का लेवल बढ़ने के लिए प्रदूषण जिम्मेदार है। वाहनों के प्रदूषित कण तापमान बढ़ने से सूरज की किरणों के साथ कैमिकल रिएक्शन करते हैं और ओजोन पॉल्यूशन बढ़ा देते हैं। जितनी ज्यादा गर्मी बढ़ेगी, यह पॉल्यूशन लेवल उतना ही अधिक हो जाता है। हालांकि बारिश होने के बाद इसमें कमी आ जाती है और जितनी ज्यादा बारिश होगी, ओजोन पॉल्यूशन का यह लेवल उतना ही कम हो जाएगा।

पांच सालों में ओजोन पॉल्यूशन का ट्रेंड

50-80

2014

ओजोन पॉल्यूशन के 13 मार्च तक के आंकड़े

2015

यह है ओजोन पॉल्यूशन| डॉ गुफरान बेग ने बताया कि गर्मी बढ़ने से ओजोन पॉल्यूशन वातावरण में फैलता है। सूरज की किरणें जब पृथ्वी की सतह पर पहुंचती हैं तो ये पर्यावरण में मौजूद प्रदूषित कणों के साथ रिएक्शन करती हैं। इससे जो प्रदूषण फैलता है, उसे ओजोन पॉल्यूशन कहते हैं। यह सीधे तौर पर पृथ्वी के 500 से 1 हजार मीटर की ऊंचाई तक असर डालता है।

40-70

20-35

2016

40-90

2017

80-120

2018

आंकड़े | एमजीसीएम में

दिल्ली में इस प्रकार बेअसर रहेगा ओजोन पॉल्यूशन

इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन और वाहनों के पॉल्यूशन से ओजोन पॉल्यूशन में इजाफा होता है। ओजोन पॉल्यूशन को नियंत्रित करने के लिए वाहनों के प्रदूषण और इंडस्ट्री से होने वाले प्रदूषण को कंट्रोल करना बेहद जरूरी है। तापमान के बढ़ने से ओजोन पॉल्यूशन जरूर बढ़ता है। लेकिन दिल्ली में वाहनों और इंडस्ट्रियल पॉल्यूशन को कंट्रोल किया जाए तो 40 डिग्री के तापमान में भी यह प्रदूषण बेअसर रहेगा। - पोलाश मुखर्जी, रिसर्च एसोसिएट, सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट

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