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कूड़े के पहाड़ पर सैर का मजा; ओखला लैंडफिल साइट पर बनेगा पार्क

लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुके कूड़े के पहाड़ों की तस्वीर बदलने की तैयारी है। दिल्ली के तीन में से एक कूड़े के...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 02:10 AM IST

कूड़े के पहाड़ पर सैर का मजा; ओखला लैंडफिल साइट पर बनेगा पार्क
लोगों के लिए परेशानी का सबब बन चुके कूड़े के पहाड़ों की तस्वीर बदलने की तैयारी है। दिल्ली के तीन में से एक कूड़े के पहाड़ ओखला लैंडफिल साइट पर पार्क बनाने का प्लान है। यदि यह सफल रहा तो तीनों जगह इस तरह के पार्क बनाए जाएंगे। हालांकि, पार्क बनाए जाने की प्रक्रिया अभी शुरुआती स्टेज में है, इसे पूरा होते-होते करीब दो साल का टाइम लगेगा। साउथ दिल्ली की 32 एकड़ में बनी ओखला लैंडफिल साइट की ऊंचाई 55 मीटर तक हो चुकी है, जबकि इसकी ऊंचाई 20 मीटर तक निर्धारित की गई थी। गाजीपुर लैंडफिल साइट की घटना के बाद यहां कूड़ा डालने पर रोक लगा दी गई है। यहां पार्क बनाने के लिए कंसल्टेंट नियुक्त कर दिया गया है, जो पार्क बनाने की संभावनाओं पर काम कर रहा है।

गाजीपुर-भलस्वा साइट को किया है ग्रीन कवर : ईस्ट दिल्ली के गाजीपुर और भलस्वा की लैंडफिल साइट दूर से दिखने में कूड़े का ढेर न दिखाई दे। इसके लिए इसे ग्रीन कवर किया गया है। काफी बड़े हिस्से पर घास लगाई गई है। मगर यहां कोई सैर करने नहीं जा सकता।

पार्क बनने में लगेंगे करीब 2 साल, सफल रहा तो बाकी जगह बनेंगे पार्क

साउथ एमसीडी ने बनाया प्लान, कंसल्टेंट तैयार कर रहे हैं डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट, गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट की भी बदलेगी सूरत

ओखला लैंडफिल साइट की ऊंचाई इंडिया गेट से भी ज्यादा

इंडिया गेट

42 मीटर

लैंडफिल ऊंचाई मानक

ओखला 55 20

गाजीपुर 35 20

भलस्वा 30 20

ऊंचाई मीटर में

लैंडफिल साइट पर पार्क बनाने की संभावनाओं को तलाशा जा रहा है। इसके लिए कंसल्टेंट भी नियुक्त कर दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद पार्क बनाए जाने की कार्रवाई और तेज हो सकेगी। उम्मीद है रिपोर्ट सकारात्मक आएगी। पार्क बनाने से पहले साइट की ऊंचाई को कम किया जाएगा। - कमलजीत सहरावत, मेयर, साउथ एमसीडी

ओखला लैंडफिल

55 मीटर

पहले 15 मीटर तक कम की जाएगी ऊंचाई

पार्क बनाने से पहले साइट की ऊंचाई को कम किया जाएगा, जो कि 55 मीटर तक पहुंच गई है। ऊंचाई को 15 मीटर तक कम किए जाने की योजना है। साथ ही साइट से मीथेन गैस को भी पूरी तरह निकाला जाएगा, ताकि कूड़े में आग लगने की कोई गुंजाइश न रहे। मीथेन की वजह से आए दिन लैंडफिल साइटों पर आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं। ओखला लैंडफिल साइट पर वर्ष 1996 से कचरा डालने की शुरुआत की गई थी। इसके अलावा गाजीपुर और भलस्वा लैंडफिल साइट का भी यही हाल है, यहां भी फिलहाल कूड़ा डालने पर रोक लगा दी गई है।

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