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22 बेड की बर्न यूनिट में 4 ड्रेसर, रात को इमरजेंसी में नहीं रहते ड्रेसर, इंटर्न करते हैं ड्रेसिंग

आशु मिश्रा | नई दिल्ली ashu.mishra@dbcorp.in यमुनापार में मौजूद दिल्ली सरकार की एकमात्र बर्न यूनिट अधिकारियों की मनमानी का...

Dainik Bhaskar

Apr 02, 2018, 02:10 AM IST
22 बेड की बर्न यूनिट में 4 ड्रेसर, रात को इमरजेंसी में नहीं रहते ड्रेसर, इंटर्न करते हैं ड्रेसिंग
आशु मिश्रा | नई दिल्ली ashu.mishra@dbcorp.in

यमुनापार में मौजूद दिल्ली सरकार की एकमात्र बर्न यूनिट अधिकारियों की मनमानी का शिकार है। गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल स्थित 22 बेड की इस बर्न यूनिट में महज चार ड्रेसर हैं।

रात में तो ये इमरजेंसी में रहते ही नहीं हैं। उस वक्त अगर कोई बर्न मरीज इमरजेंसी में आ जाए तो उसकी ड्रेसिंग का काम रेजिडेंट डॉक्टर्स या इंटर्न करते हैं। एक मरीज के ड्रेसिंग में 20 मिनट से अधिक लगते हैं। ऐसे में यहां आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए कम से कम 10 ड्रेसर की आवश्यकता है। अस्पताल की बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट में वर्ष 2012 से ही बेड बढ़ाने की बात हो रही है, जिसे अब तक नहीं बढ़ाया गया है। यहां यूपी, हरियाणा और एनसीआर से मरीज इलाज कराने आते हैं। इस कारण आए दिन यहां बेड फुल रहते हैं।

अधिकारियों की मनमानी

यमुनापार स्थित दिल्ली सरकार के सबसे बड़े जीटीबी अस्पताल की बर्न यूनिट में 10 ड्रेसर की है जरूरत

बेड बढ़ाकर 40 करने का है प्रस्ताव

बर्न एवं प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट में बेड की संख्या 22 से बढ़ाकर 40 करने का प्रस्ताव है। हर साल फाइनेंशियल ईयर में लगभग 10 करोड़ का प्रस्ताव भेजा जाता है, लेकिन आज तक विभाग में कोई भी काम पूरा नहीं हुआ है।

जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स के भी पद खाली

जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स के 14 पद हैं, जिनमें से 4 खाली हैं। सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स के 5 में से 4 पदों पर ही तैनाती हो सकी है। जब एमएस डॉ. सुनील से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं लगा।

प्रस्ताव बनाने के अलावा मेरे हाथ में कुछ भी नहीं

डिपार्टमेंट में जो कमियां हैं, उनसे संबंधित प्रस्ताव बनाकर हर साल अस्पताल के एमएस को भेज दिया जाता है। इससे ज्यादा मेरे हाथ में कुछ नहीं है। डॉ. धनंजय, हेड, बर्न एंड प्लास्टिक सर्जरी डिपार्टमेंट

रेनोवेशन के नाम पर डेढ़ साल से बंद है ड्रेसिंग रूप

प्लास्टिक एंड सर्जरी डिपार्टमेंट में बर्न मरीजों के लिए ड्रेसिंग रूम तक की व्यवस्था नहीं है। डेढ़ साल पहले तक यहां महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग ड्रेसिंग रूम की व्यवस्था थी, लेकिन रेनोवेशन के नाम पर इसे बंद कर दिया गया। जरूरत पड़ने पर वार्ड में ही मूविंग कर्टेन (पर्दे) की मदद से बर्न के मरीजों की ड्रेसिंग की जाती है।

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