Hindi News »Union Territory »New Delhi »News» आरटीआई के तहत ओवरसीज सिटीजन भी ले सकता है

आरटीआई के तहत ओवरसीज सिटीजन भी ले सकता है

आरटीआई के तहत ओवरसीज सिटीजन भी ले सकता है जानकारी, अभी तक सिर्फ भारतीय नागरिक को था अधिकार अमित कसाना|नई...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 02:10 AM IST

आरटीआई के तहत ओवरसीज सिटीजन भी ले सकता है

जानकारी, अभी तक सिर्फ भारतीय नागरिक को था अधिकार

अमित कसाना|नई दिल्ली amit.kasana@dbcorp.in

सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम 2005 के तहत ओवरसीज सिटीजन को जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता। यह फैसला दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस राजीव शकधर की बेंच ने सुनाया। कोर्ट ने सीआईसी मेंबर द्वारा याची को जानकारी देने से इनकार करने पर नाराजगी जताई। अब सीआईसी को 12 हफ्ते में निपटारा करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि सीआईसी ने रबर स्टैंप की तरह जानकारी न देने के पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए, जो गलत है। उसे याची को सुनकर अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए थी। हितेंद्र कुमार ऑस्ट्रेलिया, सिडनी स्थित कंसल्ट जनरल ऑफ इंडिया में शोफर कम मैसेंजर के रूप में काम करता था। 2015 में उसे निकाल दिया गया। उसने विदेश मंत्रालय में आरटीआई डालकर जानकारी मांगी कि विभाग ने अब तक उसका 2014 का बोनस व इंक्रीमेंट क्यों नहीं दिया। 23 जून 2017 को विभाग ने उसे पत्र लिखकर यह बताया कि चूंकि वह ओवरसीज सिटीजन है और उसके पास ऑस्ट्रेलिया की नागरिकता है, आरटीआई में जानकारी नहीं दी जा सकती है। इस जवाब में सीआईसी मेंबर के भी साइन थे। कोर्ट ने सीआईसी के जवाब को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा, दोबारा विचार करें।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को सूचना देने से इनकार करने पर कोर्ट ने फटकारा

इन पर लागू नहीं होता कानून

किसी भी खुफिया एजेंसी की वैसी जानकारियां, जिनके सार्वजनिक होने से देश की सुरक्षा और अखंडता को खतरा हो।

दूसरे देशों के साथ भारत से जुड़े मामले।

सूचना न देने पर ये बताना जरूरी

जानकारी न देने का कारण, टाइम पीरियड की जानकारी, जिसमें अपील दायर की जा सके।

वो सब जो आप जानना चाहते हैं...

थर्ड पार्टी यानी निजी संस्थानों संबंधी जानकारी, पर इन संस्थाओं की जानकारी संबंधित सरकारी विभाग के जरिए ले सकते हैं।

अधिकारी का नाम व पता, जिसके यहां इस फैसले के खिलाफ अपील की जा सकती है।

कब किया जा सकता है इनकार

भारतीय नागरिक ही इस कानून का फायदा ले सकते हैं। इसमें निगम, यूनियन, कंपनी वगैरह को सूचना देने का प्रावधान नहीं है ये नागरिकों की परिभाषा में नहीं आते।

रिटेंशन पीरियड यानी जितने वक्त तक रिकॉर्ड सरकारी विभाग में रखने का प्रावधान हो, उतने वक्त तक की ही सूचनाएं मांगी जा सकती हैं।

जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू है।

निगम, यूनियन, कंपनी या एनजीओ का कर्मचारी या अधिकारी आरटीआई दाखिल करता है तो उसे सूचना दी जाएगी, बशर्ते उसने सूचना अपने नाम से मांगी हो।

नागरिकों को डिस्क, टेप, वीडियो कैसेट या किसी और इलेक्ट्रॉनिक या प्रिंटआउट के रूप में सूचना मांगने का हक है, सूचना उस रूप में मौजूद हो।

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×