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4 जजों के विराेध के बाद शीर्ष कोर्ट में नई व्यवस्था

काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:05 AM IST

काम के बंटवारे को लेकर चार जजों के नाराजगी जताने के बाद सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था बदल गई है। गुरुवार को चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने काम के बंटवारे का राेस्टर जारी किया। इसमें तय किया गया है कि कौन-से जज के पास किस सब्जेक्ट के केस जाएंगे। 5 फरवरी से अमल में आने वाला यह रोस्टर सिस्टम सुप्रीम कोर्ट में पहली बार लागू होगा। अभी तक चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री ही केस आवंटित करती थी। चीफ जस्टिस ने यह रोस्टर कोर्ट की वेबसाइट के जरिये सार्वजनिक किया। पुराने मामले नई व्यवस्था से बेअसर रहेंगे। नए रोस्टर के अनुसार अब सभी जनहित याचिकाओं पर सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही सुनवाई करेगी। शेष | पेज 10 पर

जस्टिस दीपक मिश्रा

पहली बार रोस्टर सिस्टम लागू, सभी पीआईएल चीफ जस्टिस सुनेंगे, संविधान पीठ तय करने का अधिकार भी उनके ही पास

चीफ जस्टिस का आदेश सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर सार्वजनिक, ऐसा भी पहली बार

5 सीनियर जजों के बीच इस तरह बंटेगा काम...

Áजस्टिस कुरियन जोसेफ: श्रम, किराया, नौकरी, अपराध, परिवार कानून, अवमानना, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन संपत्ति और भूमि कानून संबंधी केस।

Áजस्टिस जे चेलमेश्वर: श्रम, अप्रत्यक्ष कर, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, अपराध, साधारण सिविल, साधारण धन एवं गिरवी संपत्ति केस, न्यायिक अधिकारियों व कोर्ट कर्मचारियों से जुड़े मामले, भूमि एवं कृषि कानून, कब्जा छुड़ाने और उपभोक्ता संरक्षण संबंधी केस

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा :सुप्रीम कोर्ट के रोस्टर सिस्टम के तहत सभी जनहित याचिका, लेटर पिटीशन, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, आपराधिक, अवमानना, सिविल, जांच आयोग, कानूनी अधिकारियों की नियुक्ति, सामाजिक न्याय, संवैधानिक, सर्विस, चुनाव, आर्बिट्रेशन और संवैधानिक नियुक्तियों से जुड़े मामले।

फाइल फोटो

Áजस्टिस मदन बी लोकुर: भूमि अधिग्रहण, नौकरी, वन, वन्य जीवन, पर्यावरण असंतुलन, सामाजिक न्याय, साधारण सिविल केस, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन मामले, खदान, खनिज तत्व, भूमि कानून, उपभोक्ता संरक्षण और सशस्त्र बलों से जुड़े केस।

Áजस्टिस रंजन गोगोई : श्रम, अप्रत्यक्ष कर, कंपनी लॉ, सेबी, ट्राई, आरबीआई, अपराध, अवमानना, पर्सनल लॉ, धार्मिक एवं प्राचीन मामले, बैंकिंग, धन एवं गिरवी संपत्ति, स्टेट एक्साइज, सरकारी कांट्रेक्ट, न्यायिक अधिकारियों व कोर्ट कर्मचारियों और लाइसेंस विवाद से जुड़े केस।

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