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सत्ता पक्ष ने 129 बार मेजें थपथपाईं, विपक्ष ने 12 बार जताया विरोध

मोदी सरकार के आखिरी पूर्णकालिक बजट से लोकलुभावन घोषणाओं की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद वित्त...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:05 AM IST

मोदी सरकार के आखिरी पूर्णकालिक बजट से लोकलुभावन घोषणाओं की उम्मीद थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बावजूद वित्त मंत्री अरुण जेटली के 65 मिनट के बजट भाषण में 129 ऐसे मौके आए, जब सत्ता पक्ष के सांसदों ने मेज थपथपाकर खुशी जाहिर किया। वहीं, 12 बार विपक्ष ने विरोध जताया। सदन में उस वक्त सत्ता पक्ष के सांसद गर्मजोशी में दिखे, जब जेटली ने कहा कि किसी भी योजना के लिए गरीबों की स्टडी कर आंकड़े जुटाए जाते हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जीवन अपने आप में ही गरीब और मध्यम वर्ग के लिए केस स्टडी है क्योंकि उन्होंने इस जीवन को जिया है। इसका लाभ अब सरकार की योजनाओं में मिल रहा है। गरीब भी लाभान्वित हो रहे हैं।

जवानों के वेलफेयर की बात पर विपक्ष भी खुश : जेटली ने 11.05 बजे संसद में बजट भाषण देना शुरू किया, जो दोपहर 12.10 बजे खत्म हुआ। भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने जब कहा कि 10 करोड़ से अधिक बीपीएल परिवारों (50 करोड़ से अधिक लोग) को प्रति हर वर्ष पांच लाख रुपए तक का हेल्थ कवरेज देने जा रहे हैं।

इस घोषणा के बाद सत्ता पक्ष के सांसद करीब 30 सेकंड तक मेज थपथपाते रहे, जबकि विपक्ष शांत बैठा रहा। वित्त मंत्री ने जब भारतीय सीमा की सुरक्षा में लगे जवानों के वेलफेयर की बात की तो सत्ता और विपक्ष दोनों ने मेज थपथपाकर बजट का स्वागत किया।

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किसानों के मुद्दे पर पहली बार देखने को मिला विरोध

बजट भाषण के दौरान 12 बार विपक्ष ने शोर-शराबा कर विरोध जताया। पहली बार वामपंथी पार्टी के सांसद ने किसानों के मुद्दे पर शोर-शराबा किया। दूसरी बार फसलों के लागत मूल्य की बात पर हंगामा हुआ। तीसरी बार उज्ज्वला योजना पर, चौथी बार ग्रामीण आवास योजना पर, पांचवीं और छठी बार क्वालिटी एजुकेशन, सातवीं बार हेल्थ के मुद्दे पर, आठवीं बार गंगा की सफाई पर, नौवीं बार पीएफ अकाउंट, 10वीं बार बुलेट ट्रेन, 11वीं बार राज्यपाल व सांसदों के वेतन-भत्ते और 12वीं बार कॉरपोरेट टैक्स में छूट देने पर विपक्ष ने शोर-शराबा किया।

जिस पकौड़े से पीएम का बना था मजाक, वही पकौड़ा बजट भाषण का बना अहम हिस्सा

बजट भाषण के दौरान अरुण जेटली ने खासतौर पर पकौड़े बेचने वाले की दुकान से नए भारत के निर्माण की बात कही। इस पर कई मंत्री-सांसद मुस्कराने लगे। जेटली ने स्वामी विवेकानंद को कोट करते हुए कहा- “आप स्वंय को उस रिक्त में विलय कर दें और विलुप्त हो जाएं तथा नए भारत का सृजन होने दें। उसे किसानों की कुटिया से, हल के जुए से, झोपड़ी से उत्पन्न होने दें। उसे किराना दुकानदार की दुकान से तथा पकौड़ा, फल या सब्जी बेचने वाले के चूल्हे की बगल में सृजित होने दें।” दरअसल, प्रधानमंत्री ने दावोस में विश्व आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए जाने से पहले एक इंटरव्यू में रोजगार में कमी के सवाल पर कहा था कि पकौड़े की दुकान लगाना भी रोजगार है। उनकी इस टिप्पणी का सोशल मीडिया पर खूब मजाक बना। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने तो यहां तक कहा कि ऐसे तो भीख मांगना भी रोजगार हो गया।

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