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हकीकत: एक लाख की पुरानी घोषणा नहीं हुई लागू, नई योजना के लिए तैयारी नहीं

संतोष कुमार| नई दिल्ली santosh.kumar8@dbcorp.in मोदी सरकार ने आखिरी बजट में देश के 10 करोड़ से ज्यादा बीपीएल परिवारों के लिए...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 04:05 AM IST
हकीकत: एक लाख की पुरानी घोषणा नहीं हुई लागू, नई योजना के लिए तैयारी नहीं
संतोष कुमार| नई दिल्ली santosh.kumar8@dbcorp.in

मोदी सरकार ने आखिरी बजट में देश के 10 करोड़ से ज्यादा बीपीएल परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना के तहत सालाना 5 लाख रुपए की स्वास्थ्य बीमा की घोषणा की। इसका ढांचा कैसा होगा, बजट में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया। इस योजना को ट्रस्ट या बीमा मॉडल पर चलाया जाएगा, इसे लेकर भी सरकार में एक राय नहीं है। इस पर वित्त मंत्री अरुण जेटली का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्रालय इस संबंध में अपनी कार्ययोजना तैयार करेगा। सबसे बड़ी बात यह है कि जिस राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त, 2016 को लाल किले की प्राचीर से बीपीएल परिवारो के इलाज पर होने वाले खर्च की एक लाख रुपए तक की राशि देने का वादा किया था, उसका इस बजट में जिक्र तक नहीं हुआ। आम बजट 2016-17 में इस योजना की घोषणा हुई थी, जिसे 1 अप्रैल, 2017 से लागू करना था। लेकिन अब यह सरकार के एजेंडे में नहीं है। हालांकि, इससे पहले वाली राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत दिए जाने वाले 30 हजार रुपए का जिक्र इस बजट में जरूर हुआ। सरकार ने इस बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना को ही फ्लैगशिप योजना के तौर पर लिया है। दिलचस्प बात यह है कि योजना को लेकर सरकार की घोषणाओं की शब्दावली एक जैसी ही है।

खर्च के नफा-नुकसान में उलझी रही सरकार: बजट 2016-17 में फंड के प्रावधान और प्रधानमंत्री की 15 अगस्त, 2016 को लाल किले से घोषणा के बाद सामाजिक-आर्थिक-जातिगत जनगणना से छांटे गए 8 करोड़ बीपीएल परिवारों के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया गया। इस पर 7 महीने के मंथन के बाद नेशनल हेल्थ अथॉरिटी बनाने का प्रस्ताव केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तैयार किया था। इसका कैबिनेट नोट जनवरी, 2017 में ही प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया था। कैबिनेट नोट तैयार होने के बाद सरकार खर्च के नफा-नुकसान में उलझी रह गई।

मोदी सरकार के आखिरी बजट में 10 करोड़ से ज्यादा बीपीएल परिवारों के लिए सालाना 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा

घोषणा जो वादे और सपने तक सीमित रही

पीएम ने... 2016 में लाल किले से दिखाया था सपना

प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2016 को लाल किले से कहा था कि गरीब के घर में अगर बीमारी आ जाए तो उसकी पूरी अर्थ रचना समाप्त हो जाती है। बेटी की शादी रुक जाती है। बच्चों की पढ़ाई अटक जाती है। कई बार तो शाम का खाना भी नहीं मिलता। स्वास्थ्य सेवाएं महंगी होती जा रही हैं। इसलिए मैं बताना चाहता हूं कि इन परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए सरकार एक अहम कदम उठाने जा रही है। इसके तहत अगर किसी बीपीएल परिवार को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेना हो तो साल में एक लाख रुपए तक का खर्च सरकार उठाएगी।

इस बजट में सरकार ने क्या कहा

महज 24% आबादी के पास स्वास्थ्य बीमा

28.80 करोड़ लोगों ने ही स्वास्थ्य बीमा करा रखा है देश में

18.1% शहरी लोगों के पास है हेल्थ इंश्योरेंस

14.1% ग्रामीण लोगों के पास है हेल्थ इंश्योरेंस

देश में... हेल्थ केयर पर जीडीपी का 5% भी खर्च नहीं

देश 1995 2014

अमेरिका 13.1% 17.1%

जर्मनी 9.4% 11.3%

चीन 6.5% 8.3%

रूस 5.4% 7.1%

भारत 4% 4.7%

(सोर्स- वर्ल्ड बैंक)

बजट पेश होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि 10 करोड़ से ज्यादा बीपीएल परिवारों (50 करोड़ लाभार्थी) को दायरे में लाने के लिए एक फ्लैगशिप राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण योजना शुरू की जाएगी। इसके तहत सेकेंडरी और टर्शियरी केयर अस्पतालों में भर्ती होने के लिए हर परिवार को सालान 5 लाख रुपए का कवरेज दिया जाएगा। यह विश्व का सबसे बड़ा सरकारी बीमा स्वास्थ्य देखरेख कार्यक्रम होगा।

(लोकसभा से मिली जानकारी)

उधर स्पेन में... विदेशी और माइग्रेंट्स को फ्री हेल्थ केयर





वित्त मंत्री का... 30 हजार रु. अतिरिक्त देने का वादा

वित्त मंत्री जेटली ने 2016-17 के आम बजट में कहा था कि गंभीर बीमारियां अप्रत्याशित और बड़े खर्च का अकेला सबसे बड़ा कारण हैं। यह प्रति वर्ष लाखों परिवारों को गरीबी रेखा से नीचे ले जाता है और उनकी आर्थिक सुरक्षा की बुनियाद को हिला देता है। ऐसे परिवारों की मदद करने के लिए सरकार एक नई स्वास्थ्य सुरक्षा स्कीम शुरू करेगी। इसमें प्रति परिवार एक लाख रुपए का हेल्थ कवर प्रदान किया जाएगा। इस श्रेणी में 60 वर्ष और इससे अधिक उम्र वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए 30 हजार रुपए का अतिरिक्त पैकेज दिया जाएगा।

चुनावी साल में मास्टर स्ट्रोक खेलने की सरकार की कवायद

अभी तक सरकार इंश्योरेंस मॉडल पर बीमा योजना चला रही है। इसका लाभ कंपनियों को मिलता है। इसलिए सरकार ने इसके लिए ट्रस्ट मॉडल लाने पर विचार किया था। केंद्र सरकार की मुश्किल यह थी कि 23 राज्यों में पहले से ही 1 लाख रुपए और उससे ज्यादा की योजनाएं चल रही हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के बदले राज्य सरकारों को ही इसका श्रेय मिलता है। ऐसे में केंद्र को उसकी योजना का श्रेय नहीं मिलता। इसलिए सरकार ने पहले यह पड़ताल की कि बीमा योजना पर कितना खर्च आएगा। सरकार के रणनीतिकारों को लगा कि एक लाख रुपए वाली योजना से उसे राजनीतिक फायदा नहीं मिलेगा। इसलिए अप्रैल, 2016 से जनवरी, 2018 तक के मंथन के बाद सरकार ने चुनावी साल में मास्टर स्ट्रोक खेलने का फैसला किया।

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