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बजट भाषण खत्म होते ही बच्चों की तरह घर की ओर दौड़े कर्मचारी

राजीव कुमार |नई दिल्ली rajeev.kumar2@dbcorp.in केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण पर जैसे ही पूर्ण विराम लगा वैसे ही...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 04:05 AM IST

राजीव कुमार |नई दिल्ली rajeev.kumar2@dbcorp.in

केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली के बजट भाषण पर जैसे ही पूर्ण विराम लगा वैसे ही वित्त मंत्रालय के चुनिंदा 100 से ज्यादा कर्मचारियों ने राहत की सांस ली और एक हफ्ते बाद दौड़ पड़े अपने घरों की ओर। इन 100 से ज्यादा कर्मचारियों में ए-क्लास अफसर से लेकर दफ्तरी तक सभी शामिल थे।

नार्थ ब्लाक स्थित वित्त मंत्रालय के गेट नंबर दो से जब ये कर्मचारी निकल रहे थे तो ऐसा लग रहा था मानो किसी स्कूल की छुट्‌टी हुई हो और बच्चे दौड़ते-भागते निकल रहे हों। सभी लोग इतनी तेजी में थे, न कोई किसी से बात करने को तैयार था और न ही कोई किसी की बात सुनने को राजी।

दरअसल इन लोगों ने पिछले सात दिनों से न सुबह की धूप देखी थी और न ही शाम का धुंधलका। घर-परिवार से दूर ये वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में बजट छाप रहे। हालांकि ऐसा नहीं है कि बेसमेंट में छपाई के दौरान ये आराम नहीं करते थे। इनके आराम के लिए बेड लगे रहते हैं। नहाने-धोने की पूरी व्यवस्था होती है। चाय-नाश्ता और खाने का भी पूरा इंतजाम रहता है। बजट छपाई के दौरान यहां हर ग्रेड के कर्मचारी लगे रहते हैं। साल1980 से नॉर्थ ब्लॉक के बेसमेंट में बजट छापने का काम किया जा रहा है। बजट छपाई का अनुभव ले चुके वित्त मंत्रालय के एक कर्मचारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि संसद में बजट भाषण शुरू होते ही ये स्टॉफ बैग लेकर तैयार हो जाता हैं। बजट भाषण खत्म होने पर ही इन्हें मंत्रालय से बाहर जाने की इजाजत मिलती है।

मंत्री पर भी सख्ती

वित्त मंत्री को भी नहीं होती मोबाइल फोन रखने की इजाजत नहीं

बेसमेंट में होने वाली प्रिंटिंग में सुरक्षा इतनी सख्त होती है कि वित्त मंत्री भी इस एरिया में मोबाइल फोन लेकर नहीं जा सकते। छपाई के आखिरी चार-पांच दिन वाले दौर में तोयहां रुके सभी लोगों को घरवालों से भी संपर्क की इजाजत नहीं होती। घर में कोई इमरजेंसी हो जाए तो उन्हें मंत्रालय के लैंडलाइन से फोन करने की इजाजत होती है। लेकिन यह बातचीत भी निगरानी में होती है और इसकी रिकार्डिंग तक की जाती है। उन्होंने बताया कि छपाई के दौरान किसी स्टॉफ की तबियत खराब होने पर उन्हें अकेले अस्पताल जाने की इजाजत नहीं होती। बीमार कर्मचारी को सुरक्षा में इलाज के लिए बाहर लाया जाता है। कोशिश यही रहती है कि छपाई में जुटा स्टाफ बजट भाषण समाप्त होने के बाद ही बेसमेंट से बाहर आए।

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